मुख्यमंत्री कोविड-19 बाल सेवा योजना: अनाथ हुएु बच्चों का सहारा बनी सरकार

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मुख्यमंत्री कोविड-19 बाल सेवा योजना

डा. आनन्द शुक्ल

वैश्विक महामारी कोरोना ने पूरी दुनिया के सामाजिक, आर्थिक और पारिवारिक तंत्र के ताने-बाने को तबाह कर दिया है। बीते दो वर्षों से लगातार यह मानव समाज इस कोरोना से उबरने की कोशिशों में जुटा हुआ है। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर का सबसे अधिक प्रभाव अपने देश भारत और मध्यप्रदेश में देखने को मिला। इस संक्रमण से बचने के लिए सरकार के साथ समाज ने भी बराबर की सहभागिता निभाई है, किन्तु इन तमाम कोशिशों के बाद भी कोरोना ने अपना दंश प्रदेश के अनेक परिवारों पर छोड़ा है। इसकी भरपाई तो कभी नहीं की जा सकती। सब्र का बांध तब टूट गया जब कोरोना के कारण अनेक नौनिहाल और वयस्कों के सिर से अचानक माँ-बाप का साया उठ गया। वे अनाथ और निराश्रित हो गये।

जीवन की पाठशाला में ये नौनिहाल कुछ सीख पाते, उससे पहले ही भविष्य अंधकारमय हो गया। ऐसे विकट और प्रतिकूल समय में प्रदेश की शिवराज सरकार ने ‘मुख्यमंत्री कोविड-19 बाल सेवा योजना’ का शुभारंभ कर उन तमाम बच्चों को सहारा देने का कार्य किया है। देशभर में शिवराज सरकार ऐसी पहली सरकार है, जिसने मानवीय मूल्यों, सामाजिक तथा जनसरोकारों के प्रति इतनी सजग और गंभीर है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान इसके पहले भी ‘लाड़ली लक्ष्मी योजना’ के माध्यम से अपनी संवदेनशीलता का परिचय दे चुके हैं। उनकी कई योजनाओं को देश के अनेक राज्यों ने अपने यहां लागू किया है।

शिवराज सिंह चैहान सचमुच शासक के रूप में नहीं, सेवक के रूप में ही प्रदेश की सत्ता का संचालन करते हैं। उन्होंने बच्चों से अपना नाता मुख्यमंत्री का नहीं ‘मामा’ के रूप में जोड़ा है। जो प्रेम, दया और सहयोग की बुनियाद पर खड़ा है। वे इस रिश्ते को जीते भी हैं। ‘मुख्यमंत्री कोविड 19 बाल सेवा योजना’ उन बच्चों के लिए हैं, जिनके सिर से कोरोना की आपदा के चलते माँ-बाप का साया उठ गया है। उन बच्चों के जीवन में छाये अंधकार को मिटाने के लिए है ताकि वे फिर से उठ खड़े हों और अपने जीवन और भविष्य के ताने-बाने को फिर से बुन सकें। इस योजना के माध्यम से अनाथ बच्चों की सभी प्रकार की आवश्यकताओं को शामिल किया गया है, जिसमें भोजन, शिक्षा और आवास प्रमुख रूप से शामिल है।

योजना का शुभारंभ 30 मई 2021 को सीएम के हाथों हो चुका है, जिसके पहले चरण में प्रदेश के 130 परिवारों के 173 बच्चों के खातों में राशि भी अंतरित की जा चुकी है। इसके तहत प्रति बच्चा 5 हजार रुपये दिये जाने का प्रावधान है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का स्पष्ट मानना है कि आपदा की इस घड़ी में ऐसे बच्चों को दर-दर की ठोकरे खाने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता। हर हाल में इनकी देखरेख के लिए सरकार और समाज को आगे आना ही होगा। यही कारण है कि योजना में समाज की सहभागिता के लिए भी प्रावधान किया गया है।

योजना के अंतर्गत पांच हजार रुपये की मासिक सहायता के साथ-साथ शासकीय स्तर पर खाद्य सुरक्षा भी सुनिश्चित की गई है। इसके तहत निःशुल्क मासिक राशन और निःशुल्क स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा या विधि शिक्षा आदि की जिम्मेदारी सरकार की होगी। योजना में यह प्रावधान किया गया है कि ऐसे बच्चों के शासकीय स्कूल, केन्द्रीय विश्वविद्यालय, राज्य विश्वविद्यालय या महाविद्यालयों में अध्ययन करने पर समस्त शुल्क की प्रतिपूर्ति शासन द्वारा की जायेगी।

निजी स्कूल या महाविद्यालय में शिक्षा ग्रहण करने पर एक निश्चित सीमा तक प्रतिपूर्ति शासन द्वारा की जायेगी। ऐसे सभी बच्चे इस योजना में पात्र होंगे, जिनकी आयु 21 वर्ष या उससे कम है। परंतु स्नातक में अध्ययनरत् रहने की स्थिति में 24 वर्ष या स्नातक पाठ्यक्रम की निर्धारित अवधि तक इनमें से जो भी कम हो, उन्हें पात्रता होगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान ने इसके अलावा परिवार सहायता योजना, किसानों के खरीफ 2020 में लिये गये कर्ज की भुगतान की अन्तिम तिथि को आगे बढ़ाने, सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लाभार्थियों के लिए तीन माह का मुफ्त राशन दिया जाना तथा कर्मचारियों के लिए विशेष अनुग्रह योजना तथा अनुकम्पा नियुक्ति योजना जैसी व्यवस्था भी किया है।

इसके साथ ही भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिकों को वित्तीय सहायता, शहरी पथ विक्रेताओं तथा ग्रामीण पथ विक्रेताओं को वित्तीय सहायता देकर एक अनूठा कार्य किया है। इस प्रकार देखा जाये तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान ने एक ओर कोरोना पर नियंत्रण पाने की भागीरथी प्रयास को परिणाम तक पहुंचाया तथा दूसरी ओर समाज में आयी इस विपदा से निपटने के लिए परिवारों को संबल भी देने का काम किया है। इन तमाम चुनौतियों के बीच शिवराज सरकार प्रदेश को सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से मजबूत इरादों के साथ आगे बढ़ने का दिन-रात प्रयास कर रही है। ऐसे में सरकार के साथ समाज भी सहभागी बने, यही आज की आवश्यकता है। तभी म.प्र. का विकास सही दिशा में आगे बढ़ सकेगा और अन्य राज्यों के लिए एक माडल भी बनेगा।