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लॉकडाउन: पर्यटन से जुड़े 3.8 करोड़ लोगों के रोजगार पर खड़ा हुआ संकट

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नई दिल्ली 
देशभर में लॉकडाउन के बाद पर्यटन उद्योग से जुड़े 3.8 करोड़ लोगों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। देशभर में बड़ी संख्या में लोग प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से पर्यटन उद्योग से जुड़े हुए हैं।

पर्यटन क्षेत्र के संगठन फेडरेशन ऑफ एसोसिएशन इन इंडियन टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी (फैथ) ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर इस संबंध में अपनी चिंता से अवगत करवाया है। देश में 14 अप्रैल तक अंतरराष्ट्रीय और घरेलू सभी उड़ानें रद्द हैं। लॉक डाउन से पहले ही कई एयरलाइंस, टूर एंड ट्रेवल कंपनियों ने अपने 35% से अधिक कर्मचारियों को बिना सैलरी के छुट्टी पर भेज दिया था। जबकि पायलट, क्रू मेंबर समेत अन्य कर्मचारियों में 15 से 35% तक की कटौती कर दी थी।

विमानों के पहिए रुके: विमानों के पहिए रुकने से हवाई अड्डों की पार्किंग वे में इनकी कतारें लग गई हैं। इन्हें खड़ा रखना और इनकी मरम्मत करना एयरलाइन कंपनियों के लिए चुनौती है। विमानन जानकारों की मानें तो एक विमान के रखरखाव में प्रतिदिन पांच हजार रुपये कम से कम का खर्च आता है।

20 प्रतिशत हायरिंग कम: एसोचैम के मुताबिक वैश्विक महामारी के रूप में फैले इस कोरोना वायरस का सबसे अधिक असर होटल, टूर एंड ट्रेवल, विमानन, खानपान, निर्माण और मनोरंजन क्षेत्र पर पड़ेगा। आशंका है कि आने वाले समय में इन क्षेत्रों में कर्मचारियों की हायरिंग 15 से 20 प्रतिशत कम होगी।

ट्रैवल कंपनियों की जुलाई तक बुकिंग रद्द: एक अनुमान के मुताबिक देशभर में विमानन क्षेत्र में करीब पांच लाख करोड़ रुपये का नुकसान होगा। ट्रेवल कंपनियों की जुलाई तक बुकिंग रद्द हो चुकी हैं। कई कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को अगले नोटिस तक अस्थायी रूप से छुट्टी पर भेज दिया है। ट्रेवल कंपनी से जुड़े एक मैनेजर के मुताबिक इस बार गर्मियों का सीजन बुरी तरह पिट गया है। अब तो सर्दियों में ही धंधे की उम्मीद है।

कोरोना से लडने रेल विभाग के कर्मचारी देंगे 151 करोड़ रुपये

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Rail department employees to fight Corona will give Rs 151 crore

एक महीने की सैलरी देने का ऐलान

नई दिल्ली। कोरोना वायरस महामारी से निपटने के लिए बीते शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के लोगों से पीएम केयर फंड में अपनी स्वेच्छा से डोनेट करने को आह्वान किया था। पीएम मोदी के इस आह्वान के बाद देशभर में लोग अपनी सक्षमता के आधार पर इस फंड में डोनेट कर रहे हैं। अब रेल मंत्री पीयूष गोयल ने और रेल राज्य मंत्री ने भी इस फंड में अपनी एक महीने की सैलरी देने का ऐलान किया है। पीयूष गोयल ने अपनी आधिकारिक ट्विटर हैंडल से यह जानकारी दी।

Rail department employees to fight Corona will give Rs 151 crore

पीयूष गोयल द्वारा दी गई इस जानकारी के मुताबिक, रेल मंत्री, रेल राज्य मंत्री के अलावा रेलवे के 13 लाख कर्मचारी और पब्लिक सेक्टर ईकाईयों के कर्मचारी अपनी एक दिन की सैलरी भी पीएम केयर फंड में डोनेट करेंगे। कुल मिलाकर पीएम केयर फंड में यह रकम 151 करोड़ रुपये की होगी।

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी जी के आह्वान पर मैं और मेरे साथी रेल राज्य मंत्री सुरेश अंगड़ी जी एक महीने के, तथा रेलवे के 13 लाख, व PSU के साथी एक दिन के वेतन से, PM CARES में ₹151 करोड़ की राशि का सहयोग देंगे।’

65 लाख पेंशनर्स भी देंगे एक दिन की पेंशन
बता दें कि रविवार को ही कर्मचारी पेंशन योजना के दायरे में आने वाले पेंशनभोगियों के एक फोरम ने कोरोना वायरस महामारी से निपटने में सरकार की मदद के लिये अपनी एक दिन की पेंशन प्रधानमंत्री राहत कोष में देने का निर्णय किया है। EPS-95 के अंतर्गत आने वाले पेंशनभोगियों की संख्या करीब 65 लाख है।

अखिल भारतीय ईपीएस-95 पेंशनभोगी राष्ट्रीय संघर्ष समिति के अध्यक्ष कमांडर अशोक राउत ने रविवार को एक बयान में कहा, हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कोरोना वायरस महामारी से निपटने में सरकार की मदद की इच्छा जतायी है। इसके तहत हम सभी ने अपनी एक दिन की पेंशन प्रधानमंत्री राहत कोष में देंगे। पत्र की प्रति वित्त मंत्री, श्रम मंत्री, केंद्रीय न्यासी बोर्ड के सदस्यों और केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त को भी भेजी गयी है।

ऐपल इस साल नई वॉच सीरीज करेगा लॉन्च

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टेक ब्रैंड ऐपल का वियरेबल मार्केट के एक बड़े हिस्से पर कब्जा है और इसकी वजह पॉप्युलर Apple Watch है। प्रीमियम वियरेबल सेगमेंट में इस डिवाइस का कब्जा है और अब कंपनी इसमें ढेरों नए फीचर्स ऐड करने जा रही है। नए लीक्स और अफवाहों की मानें तो इस साल लॉन्च होने वाली Apple Watch सीरीज में टच-आईडी देखने को मिल सकती है। यानी कि ऐपल वॉच भी अब फिंगरप्रिंट की मदद से अनलॉक की जा सकेगी।

इजराल की वेबसाइट The Verifier और यूट्यूब चैनल iupdate की ओर से कहा गया है कि नई ऐपल वॉच सीरीज में टच आईडी के अलावा स्लीप ट्रैकिंग और ब्लड ऑक्सीजन लेवल मॉनीटरिंग जैसे फीचर्स दिए जा सकते हैं। दोनों ही सोर्स ऐपल से जुड़े लीक्स के मामले में सबसे ऑथेंटिक हैं, ऐसे में फाइनल प्रॉडक्ट में भी ये नए फीचर्स देखने को मिल सकते हैं। बता दें, ब्लड ऑक्सीजन मॉनीटरिंग ऐपल की नई वॉच में मिल सकती है, यह पहले भी सामने आया था।

साथ ही ऐपल वॉच में स्लीप ट्रैकिंग फीचर भी मिल सकता है, जो मॉनीटर करेगा कि यूजर ने कितने घंटे की हेल्दी स्लीप ली। नई वॉच में मिलने वाले ये फीचर्स इससे पहले iOS 14 के कोड में स्पॉट किए गए थे और फाइनल डिवाइस में दिए जा सकते हैं। हालांकि, ऐपल के वियरेबल में टच-आईडी पूरी तरह नया फीचर है और इसे लेकर कोई कयास नहीं लगाए गए थे। फिलहाल यह साफ नहीं है कि फिंगरप्रिंट रीडर स्क्रीन के अंदर दिया जाएगा या फिर वॉच के साइड फ्रेम में माउंट होगा।

मिलेगा नया सॉफ्टवेयर
सामने आए बाकी डीटेल्स की बात करें तो ऐपल वॉच का डिजाइन और शेप पहले जैसा ही होगा। ऐसे में ऐपल वॉच का सर्कुलर मॉडल इस साल भी देखने को नहीं मिलेगा। हार्डवेयर के अलावा सॉफ्टवेयर के मामले में भी ऐपल वॉच पहले से बेहतर होने वाली है और कई अपग्रेड्स के साथ आएगी। ऐपल इस वॉच सीरीज में watchOS 7 दे सकता है। लॉन्च के साथ इसमें कई हेल्थ और फिटनेस फीचर्स इंट्रोड्यूस किए जा सकते हैं।

आयुर्वेद से पित्त दोष को करने संतुलित

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पित्त का अर्थ होता है गर्मी एवं पित्तअग्नि और जल दोनों का तत्‍व है। पित्त गर्म, तैलीय, तरल और बहता हुआ होता है। पित्त हमारे पाचन को नियंत्रित करता है, शरीर के तापमान को बनाए रखता है, त्‍वचा की रंगत,बुद्धि और भावनाओं पर भी पित्त का प्रभाव होता है। पित्त में असंतुलन आने के कारण व्‍यक्‍ति शारीरिक और भावनात्‍मक रूप से अस्‍वस्‍थ होने लगता है।

पित्त के असंतुलन के लक्षण
इसके लक्षणों में ज्‍यादा भूख और प्‍यास लगना, संक्रमण, बाल झड़ना या बालों का सफेद होना, हार्मोनल असंतुलन, माइग्रेन, गर्मी लगना, कुछ ठंडा खाने या पीने की इच्‍छा करना, मुंह से बदबू आना, गले में खराश, खाना न खाने पर जी मितली, अनिद्रा, स्‍तनों या लिंग को छूने पर दर्द होना, माहवारी के दौरान दर्द होना या ज्‍यादा खून आना शामिल है। इसके अलावा धैर्य कम होना, चिड़चिड़ापन, नाराज़गी, ईर्ष्या द्वेष, अस्थिरता की भावना रहती है।

पित्त दोष असंतुलित होने के कारण
तीखा, खट्टा, नमकीन, बहुत मसालेदार, तला हुआ, प्रोसेस्ड, रेड मीट खाने, कैफीन, ब्‍लैक टी, निकोटीन, शराब, धूप में ज्‍यादा रहने, भावनात्‍मक तनाव लेने, ज्‍यादा काम करने या आराम करने की वजह से पित्त दोष में असंतुलन आ सकता है।

पित्त दोष की वजह से होने वाली समस्‍याएं
यदि किसी व्‍यक्‍ति के शरीर में पित्त दोष असंतुलित हो जाता है तो सीने में जलन, सनबर्न, एक्जिमा, मुहांसे, एसिड रिफलक्‍स, पेप्टिक अल्‍सर, बुखार, खून के थक्‍के जमना, स्‍ट्रोक, किडनी में संक्रमण, हाइपरथायराइडिज्‍म, पीलिया, आर्थराइटिस, दस्‍त, क्रोनिक फटीग सिंड्रोम, कम दिखाई देना, ऑटोइम्‍यून विकार और डिप्रेशन की समस्‍या हो सकती है।

पित्त दोष दूर करने के उपाय

    कड़वी, कसैली और मीठी चीजें खाएं। पित्त को शांत करने में घी, मक्‍खन और दूध लाभकारी होते हैं। खट्टे फलों की बजाय मीठे फलों का सेवन करें। इसमें शहद एक अच्‍छा विकल्‍प है।
    ज्‍यादा शारीरिक गतिविधियों या अधिक आराम करने से बचें। आपको न तो बहुत ज्‍यादा काम करना है और न ही बहुत ज्‍यादा आराम।
    संतुलित आहार लें और दोस्‍तों से खूब बातें। प्रकृति के साथ कुछ समय बिताएं।
    पित्त को संतुलित करने का सबसे अच्‍छा तरीका मेडिटेशन या ध्‍यान भी है। इसके अलावा जो भी काम आपको पसंद है वो करें और ज्‍यादा से ज्‍यादा खुश रहने की कोशिश करें।
    योग की मदद से भी पित्त दोष को संतुलित किया जा सकता है। मार्जरीआसन, शिशु आसन, चंद्र नमस्‍कार, उत्‍कतासन, भुजंगासन, विपरीत शलभासन, पश्चिमोत्तासन, अर्ध नौकासन, अर्ध सर्वांगासन, सेतु बंधासन और शवासन करें।

व्‍यक्‍ति के शरीर की प्रकृति को निर्धारित करने के लिए त्रिदोष होते हैं वात, पित्त और कफ। यदि इन तीनों में या इनमें से किसी एक दोष में असंतुल आ जाए तो मानसिक और शारीरिक स्‍वास्‍थ्‍य बिगड़ने लगता है। आयुर्वेदिक चिकित्‍सा पद्धति में व्‍यक्‍ति की प्रकृति को ध्‍यान में रखते हुए ही इलाज किया जाता है। इलाज से पहले ये जाना जाता है कि व्‍यक्‍ति पित्त प्रकृति का है, वात या फिर कफ प्रकृति का।
त्रिदोष में हमारे खानपान, जीवनशैली, नींद, व्‍यायाम और दैनिक गतिविधयों के कारण बदलाव आता रहता है। विचारों का भी त्रिदोष पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए शरीर में त्रिदोष को संतुलित रखना बहुत जरूरी है।

SMS से उपभोक्ताओं को बिजली बिल भेजेगी कंपनी

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सीहोर
सीहोर शहर में बिजली कंपनी के सामान्य कमर्शियल और घरेलू उपभोक्ता करीब 26 हजार है इन उपभोक्ताओं को बिजली कंपनी अप्रैल में आने वाले मार्च महीने के बिजली बिल की राशि एस एम एस से भेजेगी साथ ही उपभोक्ताओं से ऑनलाइन भुगतान कराने के लिए प्रेरित किया जाएगा

अभी पावर हाउस चौराहा स्थित बिजली कंपनी कार्यालय के सभी काउंटर अगले आदेश तक के लिए बंद कर दिए गए लागू डाउन की घोषणा के बाद बिजली कंपनी भी पब्लिक के लिए बिजली बिल जमा करने वाले काउंटर को बंद कर दिया है यह काउंटर लागू नाम हटाने के साथ ही अगले आदेश तक बंद रहेंगे शहर के उपभोक्ताओं के मोबाइल नंबर कंपनी का रखें जिन्हें मार्च के बिजली बिल भुगतान के लिए अप्रैल महीने में एस एम एस के जरिए राशि का भुगतान करने की जानकारी दी जाएगी ।

इसके साथ ही उपभोक्ताओं को ऑनलाइन माध्यमों से भुगतान करने के लिए प्रेरित किया जाएगा लाग डाउन से पहले कर ली रीडिंग शहर में मीटर वाचक को ने लाख डाउन से पहले शहर के मीटरों की रीडिंग ले ली थी इसके बाद बिजली बिल तैयार किए जा रहे थे लेकिन लाख डाउन के चलते बिजली के बिल को बांटने में परेशानी हो सकती है ऐसे में कंपनी ने उपभोक्ताओं को सुविधा देते हुए s.m.s. के माध्यम से बिजली बिल की जानकारी देने का निर्णय लिया है उपभोक्ताओं को अप्रैल में s.m.s. भेजे जाएंगे इस संबंध में बिजली कंपनी के जेई धनराज सिंह ने बताया कि कंपनी कार्यालय में ऑनलाइन बिजली बिल जमा होने वाले काउंटर बंद कर दिए गए हैं

 

मनीष सिंह और हरिनारायण चारी मिश्रा को इंदौर को नियंत्रित करने का दिया जिम्मा

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इंदौर
प्रदेश के बड़े शहरों में कोरोना को रोकने के लिए जिला और पुलिस प्रशासन के अफसर रात दिन एक किए हुए हैं। इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन और भोपाल के अफसर पूरी मुस्तैदी के साथ इसमें जुटे हुए हैं। स्वयं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं।

इंदौर में कोरोना के अपर सेकेंड स्टेज में पहुंचने से रोकने के लिए अब कमान नवागत कलेक्टर मनीष सिंह और डीआईजी हरिनारायणचारी मिश्रा को दी गई। मनीष सिंह ने शनिवार को और डीआईजी ने रविवार का चार्ज लिया। इंदौर को लॉक डाउन करने सहित तमाम व्यवस्थाओं को लेकर दोनों अफसरों ने शनिवार से ही काम शुरू कर दिया है। इलाज की भी दोनों अफसरों ने व्यवस्था देखी। मनीष सिंह ने कहा कि कोरोना का संक्रमण रोकना सबसे पहली प्राथमिकता है। सभी के सहयोग से कोरोना को हरा देंगे। कार्ययोजना पर तेजी से काम चल रहा है। वहीं डीआईजी हरिनारायणचारी मिश्रा ने कहा कि पुलिस की पहली प्राथमिकता कोरोना का संक्रण रोकना है। चुनौती है, लेकिन इंदौर शहर के लोगों की मदद से हम सफल होंगे। वहीं संभागायुक्त आकाश त्रिपाठी पिछले दस दिनों से कोरोना वायरस फैले ना इसे लेकर खासे सक्रिय है। इंदौर सहित पूरे संभागों के जिलों की पल-पल की जानकारी वे ले रहे हैं। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए वे दिन-रात एक किए हुए हैं। लोगों को भी जागरुक करने के लिए अपने वीडियो जारी कर रहे हैं। नगर निगम आयुक्त आशीष सिंह भी इस संक्रमण को रोकने के लिए सड़कों पर मोर्चा संभाले हुए हैं।

फेफड़े स्वस्थ बनाने के लिए करें ये 4 योगासन

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कोरोना वायरस का संक्रमण भारत में तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में लोगों को लॉकडाउन के जरिए घरों में ही रहने के निर्देश दिए जा रहे हैं। रेस्पिरेटरी सिस्टम से जुड़ी हुई बीमारी होने के कारण आपको अपने फेफड़े स्वस्थ बनाने के लिए कुछ योगासन का भी सहारा जरूर लेना चाहिए जो आप घर पर बैठकर बड़ी आसानी से कर सकते हैं।

दरअसल, फेफड़ों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए कुछ खास योगासन हैं और इन पर वैज्ञानिक रिसर्च भी हुआ है। इन योगासन को करने से आपकी श्वसन प्रणाली बेहतर होती है और आपके फेफड़े स्वस्थ बने रहते हैं।

​बितिलासन
इसे कॉउ पोज (Cow pose) के नाम से भी जाना जाता है। बितिलासन योग के जरिए भी फेफड़ों को स्वस्थ बनाया जा सकता है। दरअसल यह एक ऐसी योग मुद्रा होती है, जिसे करने के दौरान आपके शरीर की श्वास नलिकाओं में खिंचाव होता है और यह फेफड़ों को स्वस्थ रखने में मदद करती हैं। इसे आप रोजाना सुबह कर सकते हैं।

कैसे करें

    सबसे पहले किसी समतल जगह पर योग मैट बिछा लें।
    अब घुटनों और हाथों के बल इस पर बैठ जाएं।
    इस मुद्रा में आप छोटे बच्चे के चलने जैसी स्थिति में ही होंगे।
    अब अपने हाथों के बीच एक से डेढ़ फीट की दूरी रखें और पैरों के बीच 1 फीट की दूरी।
    अपनी गर्दन को ऊपर उठाते हुए आसमान की ओर देखने का प्रयास करें।
    अब इसी मुद्रा में कम से कम 10 से 15 सेकंड तक रहें है उसके बाद वापस प्रारंभिक मुद्रा में आ जाएं।
    इस योगासन को आप करीब 5 मिनट तक कर सकते हैं।

​​भुजंगासन
भुजंग का मतलब सांप होता है और यह योगासन की मुद्रा में आपको भी सांप जैसी स्थिति में आना पड़ता है। इसे कोबरा पोज के नाम से भी जाना जाता है। इस योगासन को करने से यह शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को सुचारू रूप से चलाने में मदद करता है और उसके साथ-साथ फेफड़े को स्वस्थ बनाए रखने में भी काम आ सकता है।

कैसे करें

    सबसे पहले योग मैट पर पेट के बल लेट जाएं।
    ध्यान दें कि आपके पैर और आपके हाथ दोनों बिल्कुल सीधे होने चाहिए।
    अब अपने हाथों को हल्का सीने के पास ले आएं।
    हाथों पर जोर देते हुए सीने को उठाने का प्रयास करें।
    ध्यान दें कि आपका सिर सांप के फन की तरह सामने की ओर उठना चाहिए।
    अब जितना हो सके अपने सिर को आसमान की ओ उठाने का प्रयास करें।
    इस बात का ध्यान दें कि आपके पेट के नीचे से पैर तक का हिस्सा जमीन से ही जुड़ा रहेगा।
    करीब 15 सेकेण्ड तक इसी मुद्रा में रहने के बाद धीरे-धीरे प्रारंभिक मुद्रा में वापस आ जाएं।
    इस योग मुद्रा को करीब 5 मिनट तक किया जा सकता है।

​दंडासन
दंडासन के जरिए भी फेफेड़ों को स्वस्थ बनाए रखने में मदद मिल सकती है। नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फोर्मेशन के की ओर से जारी किए गए शोध में भी इस बारे में जानकारी दी गई है कि इस योगासन के जरिए फेफड़ों को स्वस्थ रखकर इन्हें स्वस्थ बनाए रखने में काफी मदद मिल सकती है। इस योगासन को शाम और सुबह दोनों समय में किया जा सकता है।

कैसे करें

    सबसे पहले योग मैट पर पद्मासन की मुद्रा में बैठ जाएं।
    अब अपने दोनों पैर को सामने की और फैलाएं।
    ध्यान दें कि आपके पैर कमर से 90 डिग्री के कोण पर होंगे।
    अपने हाथों को जमीन में रखें।
    ध्यान दें कि हाथों की हथेली जमीन से सटी हुई होनी चाहिए और हाथ भी शरीर से ज्यादा दूर नहीं होने चाहिए।
    अब धीरे-धीरे सांस लेते रहें और इसी मुद्रा में कम से कम पांच मिनट रहें।
    इस योगासन को करीब 5 मिनट तक किया जा सकता है।

​शलभासन
शलभासन योग मुद्रा के जरिए भी फेफड़ों को स्वस्थ बनाया रखा जा सकता है। इस योगासन को करने से श्वसन प्रणाली मजबूत होती है और फेफड़े भी सक्रिय रूप से कार्य कर सकते हैं। इससे आपको रेस्पिरेटरी सिस्टम से जुड़ी हुई किसी भी प्रकार की बीमारी का खतरा कई गुना तक कम हो जाता है।

कैसे करें

    योग मैट पर पेट के बल लेट जाएं।
    उसके बाद अब अपने दोनों हाथ को जांघों के नीचे रखें।
    अब अपने सिर को जमीन से ही चिपकाकर रखें।
    अब पैरों को पीछे की ओर से उठाएं।
    एक संतुलन की स्थिति बनाएं और इसी मुद्रा में करीब 10 सेकंड तक तक रहें।
    यह एक चक्र पूरा हुआ।
    इस योग प्रक्रिया को करीब पांच मिनट तक किया जा सकता है।

आसिम रियाज की एक तस्वीर ने सोशल मीडिया पर मचाया तहलका

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भले ही आसिम रियाज 'बिग बॉस 13' की ट्रोफी नहीं जीत पाए थे, लेकिन वह लोगों का दिल जीत गए और दुनियाभर के लोगों ने उन्हें सपॉर्ट किया। फिर भी फैन्स के मन में अभी भी उस हार की टीस बाकी है।

खैर, आसिम रियाज अब करियर में उड़ान भर रहे हैं और उनके पास ऑफर्स की लाइन लगी हुई है। उनके दो म्यूजिक विडियो रिलीज हो चुके हैं और रैपर बोहेमिया के साथ भी एक गाना आने वाला है। इसी बीच आसिम रियाज की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसने उनके फैन्स को झकझोर दिया है।
इस तस्वीर में आसिम रियाज के मुंह पर 'stop' लिखा है और पूरे शरीर पर बिग बॉस में मिले ताने लिखे हुए हैं। तस्वीर को आसिम के फैन ने बनाकर शेयर किया है। यह फैन आसिम की 'बिग बॉस 13' की हार से दुखी होने के साथ-साथ उन्हें मिले तानों से भी दुखी नजर आ रहा है।

आसिम की इस वायरल तस्वीर पर लोग भी खूब कॉमेंट कर रहे हैं। आसिम के एक फैन ने लिखा कि वह यह देखकर इमोशनल है और रोना आ रहा है। अन्य फैन्स ने भी कुछ इसी तरह के कॉमेंट किए हैं।

लॉकडाउन के बाद पलायन को लेकर केंद्र सख्त, कहा- सील करें राज्यों और जिलों की सीमाएं

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नई दिल्ली

लॉकडाउन के बाद पलायन की स्थिति पर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अख्तियार किया है। केंद्र सरकार ने कहा है कि लॉकडाउन का पालन करवाना डिस्ट्रिक्ट मैजिस्ट्रेट और एसपी की जिम्मेदारी है। केंद्र सरकार की तरफ से आदेश दिया गया है कि सभी राज्यों और जिलों की सीमाएं सील कर दी जाएं और बाहर से आने वाले लोगों को सीमाओं पर ही कैंपों में रखा जाए। केंद्र सरकार ने यह भी कहा है कि काम करने आने वाले मजदूरों के रहने का इंतजाम किया जाए और उनको समय से भुगतान किया जाए। सरकार ने कहा कि आदेश को न मानने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी।

 

बॉर्डर पर थे हजारों लोग, फेल होता दिखा लॉकडाउन

केंद्र सरकार ने कहा है कि शहरों से लोगों को हाइवे पर आने से रोका जाए। कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए सरकार ने लॉकडाउन का फैसला किया लेकिन शहरों से लोगों के पलायन के चलते यह लॉकडाउन फेल होता दिखा। शनिवार से दिल्ली के सीमावर्ती इलाकों में भारी भीड़ देखी गई। वहीं कई लोग पैदल ही सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए निकल पड़े। इसपर सियासी गलियारे में भी जुबानी जंग देखने को मिली। बिहार सरकार ने पहले ही कह दिया है कि बाहर से आने वाले लोगों को सीमा पर ही रोका जाएगा और वहीं रुकने की सुविधाएं दी जाएंगी।

 

हाइवे पर न आने के आदेश

केंद्र सरकार ने कहा है कि लोग हाइवे पर न निकलें और जहां हैं वहीं रहें। सरकार ने राज्यों को आदेश दिया है कि लोगों के खाने और रहने का प्रबंध किया जाए। दरअसल अगर यह खतरनाक वायरस गांवों तक पहुंचता है तो गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। देश में कोरोना मरीजों की संख्या 1000 के करीब पहुंच गई है वहीं अब तक 25 लोगों की मौत हो गई है।

दुनिया के 10 सबसे खतरनाक वायरस, Corona से पहले इन्होंने मचाई थी तबाही

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 नई दिल्ली
दुनिया के 10 सबसे खतरनाक वायरस, Corona से पहले इन्होंने मचाई थी तबाहीवायरसों की गिनती पृथ्वी के सबसे पुराने जीवों में होती है। ये हर जगह पाए जाते हैं और जीवन के लिए खतरा बन सकते हैं। दुनिया में ऐसा कोई जीव नहीं है, जिसे वायरस इंफेक्ट नहीं करते हों। आइए देखते हैं, दुनिया में अब तक के 10 सबसे खतरनाक वायरस (10 Most Deadliest Virus) कौन-कौन से हैं…
रोटा वायरस (Rota Virus)
 रोटा वायरस को चाइल्ड किलर वायरस भी बोला जाता है। ये करीब 5 दुनियाभर में हर साल 5 लाख बच्चों की जान लेता है। यह नवजात बच्चों और 6 से 8 साल के बच्चो में घातक डायरिया फैलाता है। जिससे कई बार बच्चों की जान तक चली जाती है।

चेचक (Small Pox)
 दूसरे किसी भी वायरस की तुलना में चेचक दुनिया के सबसे अधिक लोगों की जान (30 से 50 करोड़ मौत) ले चुका है। क्योंकि इस वायरस का R0 (इसे R-naught पढ़ा जाता है) यानी रिप्रोडक्शन नंबर 3.5 से 6 के बीच में होता है। यानी इस वायरस से संक्रमित एक व्यक्ति 3 से 6 लोगों को संक्रमित कर सकता है। इसका फैटेलिटी रेड 90 प्रतिशत होता है। हालांकि वैक्सिनेशन के जरिए इस वायरस को अब दुनिया से पूरी तरह खत्म कर दिया गया है।

मीजल्स (Measles)
 मीजल्स को आम भाषा में खसरा को रोग कहा जाता है। पिछले 150 साल में यह करीब 20 करोड़ लोगों की जान ले चुका है। पुराने रेकॉर्ड्स के हिसाब से यह हर साल करीब 2 लाख लोगों की जान लेता था। हालांकि अब वैक्सिनेशन के जरिए इस वायरस को कंट्रोल कर लिया गया है। लेकिन खसरा के मामले में सबसे बुरी बात यह है कि इस वायरस से संक्रमित एक व्यक्ति 12 से 18 लोगों को संक्रमित कर सकता है।

डेंगू (Dengue)
 डेंगू वायरस मच्छरों के काटने से फैलता है। ये वायरस दुनिया की 110 देशों में पाया है और हर साल करीब 10 करोड़ लोगों को इंफेक्ट करता है, जिनमें से करीब 20 हजार लोगों की मौत हो जाती है। जिन लोगों को यह वायरस दोबारा जकड़ लेता है, वे अक्सर गंभीर स्थिति में पहुंच जाते हैं।

पीत ज्वर (Yellow Fever)
 जब किसी व्यक्ति में येलो फीवर की स्थिति बहुत अधिक गंभीर होती है तो उसकी नाक, आंख, मुंह और पेट से खून आने लगता है। इस स्थिति में पहुंचने वाले मरीजों में से करीब 50 प्रतिशत लोगों को 7 से 10 दिन के अंदर ही अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है। आज भी येलो फीवर दुनियाभर में करीब 2 लाख लोगों को इंफेक्ट करता है और करीब 30 हजार लोगों की जान लेता है।

फ्लू (Flu or Influenza)
 फ्लू के कारण दुनियाभर हर साल करीब 5 लाख लोगों की जान चली जाती है। सबसे खतरनाक फ्लू पैंडेमिक (पैंडेमिक उस बीमारी को कहते हैं जो दुनिया के बड़े हिस्से को अपनी गिरफ्त में ले लेती है।) में स्पेनिश फ्लू ने 5 से 10 करोड़ लोगों की जान ली। यह अब तक का सबसे खतरनाक फ्लू पैंडेमिक माना जाता है।

रेबीज (Rabies)
 रेबीज को पुराने वक्त से ही एक बहुत अधिक खतरनाक बीमारी माना जाता रहा है। रेबीज की बीमारी चमगादड़ या कुत्ते के काटने या नाखून गड़ाने से भी हो सकती है। इस बीमारी से दुनियाभर में हर साल 60 हजार लोगों की मौत हो जाती है। इनमें से अधिकतर मौतें अफ्रीका और सदन एशिया में होती हैं।

हेपेटाइटिस-बी ऐंड सी (Hepatitis-B&C)
 हेपेटाइटिस-बी हर साल करीब 7 लाख लोगों की जान ले लेती है। वर्तमान में यह सबसे खतरनाक बीमारियों में गिनी जाती है। यह लीवर पर सबसे पहले अटैक करती है, जिससे लीवर कैंसर या लीवर डैमेज हो जाता है। इस बीमारी में होनेवाला लीवर डैमेज पर्मानेंट होता है, जिसे इलाज से ठीक नहीं किया जा सकता। हेपेटाइटिस-सी से दुनिया में हर साल करीब साढ़े तीन लाख लोगों की डेथ हो जाती है।

इबोला और मारबर्ग वायरस (Ebola and Marburg Virus)
 इबोला और मारबर्ग वायरस आज की दुनिया के सबसे खतरनाक वायरस में शामिल हैं। क्योंकि इनका अभी तक कोई पुख्ता इलाज या वैक्सीन इजात नहीं किया जा सका है। जबकि इन वायरस का फैटेलिटी रेट 90 प्रतिशत तक है। इन दोनों वायरस के लक्षण लगभग एक जैसे होते हैं। इनसे संक्रमित होने के बाद व्यक्ति को हैमरेजिक फीवर, ऑर्गन फेलियर जैसी समस्याएं हो जाती है।

एचआईवी एड्स (HIV)
 एक्सपर्स्ट्स के अनुसार, वर्तमान समय में दुनियाभर में करीब 4 करोड़ लोग HIV वायरस से पीड़ित हैं। एक अनुमान के मुताबिक, पिछले 30 साल से हर साल करीब 20 लाख लोग इस बीमारी के कारण अपनी जान से हाथ धो बैठते हैं। अब तक करीब ढाई करोड़ लोग इस बीमारी के कारण मर चुके हैं।

(इस खबर में दिए गए डेटा अलग-अलग स्टडीज और सोर्सेज से जुटाए गए हैं।)