पशु आहार जैसा था रिजेक्ट किया गया चावल, जांच में हुआ खुलासा

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भा.खा.नि. के सलाहकार सदस्य की राईस मिलो का चांवल रिजेक्ट

राजनीतिक रसूख के चलते हो सकती है जांच प्रभावित

rafi ahmad ansari
बालाघाट। पिछले महिने भारत सरकार के खाद्य आपूर्ति निगम के उपायुक्त के द्वारा बालाघाट और मंडला जिले में किसानो से समर्थन मूल्य पर खरीदी गई सरकारी धान राईस मिलर्स के द्वारा मिलिंग कर विभिन्न गोदामों में प्रदाय किया गया था। शिकायत के आधार पर उसकी जांच की गई थी। जांच में भारी मात्रा में जिले के 18 राईस मिलर्स के चांवल रिजेक्ट किये गये थे। जिनमें बैहर उकवा बालाघाट वारासिवनी और कंटगी के राईस मिलर्स शामिल है।

जाचं दल द्वारा जो रिपोर्ट दी गई थी उसमें रिजेक्ट किये गये चांवल को पशु आहार जैसा साबित किया गया था। यह मामला जब अखबारो की सुर्खियों में आया तो समूचे प्रदेश भर में हडकंप मच गया और चावंल घोटले को लेकर कई दिनो तक विभिन्न अखबारो और न्युज चैनलो में छाया गया। तत्पश्चात राज्य शासन द्वारा अमानक स्तर पर चांवल प्रदाय करने वाले रांईस मिलर्स के खिलाफ कार्यवाही करते हुए उनके राईस मिलो और भंडारित किये गये गोदामो को सील करवा दिया गया और ईओडब्ल्यू से जांच करवायें जाने के आदेश जारी कर दिये गये। जिसकी जांच चल रही है। इस समूचे घोटाले में एक चौकाने वाला तथ्य सामने आया है कि जिनमें वारासिवनी स्थित संचेती राईस मिल, संचेती सारटेक्स-01 और सारटेक्स-02 के द्वारा मिलिंग किये गये चांवल भी रिजेक्ट किये गये है। इन तीनो राईस मिलर्स के प्रोपराईटर दो है, जिनमें गंभीर संचेती और उनके पुत्र गौरव संचेती है।

वर्तमान में गंभीर संचेती सत्ताधारी पार्टी से ताल्लुक रखते है और राजनैतिक रसूद के चलते वर्तमान में वे भारतीय खाद्य निगम सलाहकार बोर्ड के सदस्य भी है। ऐसे में प्रश्न यह पैदा होता है कि भारतीय खाद्य निगम बोर्ड के सलाहकार सदस्य के रिजेक्ट किये गये चांवल को क्या विभाग के द्वारा बदला जा सकता है या उनके दबाव में जांच को प्रभावित किया जा सकता है।

इनका कहना है

मै भारतीय खाद्य निगम सलाहकार बोर्ड का मेम्बर हू, मेरी स्वंय की तीनो राईसे मिले है, जो एक ही परिसर में है। मेरे मिल का चांवल रिजेक्ट हुआ है या नही वह विभाग ही बता सकता है।
गंभीर संचेती, प्रोपराईटर
संचेती राईस मिल वारासिवनी