अतिक्रमण हटाने के नाम पर प्रशासन कर रहा सिर्फ औपचारिकता

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जहां जरूरी वहां नहीं हटाया जा रहा अतिक्रमण

सिद्ध स्थान अलखिया खो पर बढ़ता अतिक्रमण, प्रशासन सुस्त

awdhesh dandotia
मुरैना। सबलगढ़ में सरकार द्वारा अवैध उत्खनन और अतिक्रमण पर कठोर कदम उठाने की वजह से अपने ऊपर गाज गिरने से बचने के लिए प्रशासन को अब अतिक्रमण की सुध आ गई है। सबलगढ़ में कल से प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाओ अभियान चालू किया गया है लेकिन यह अभियान पूर्व के अभियानों की तरह ही महज एक औपचारिकता मात्र बन गया है। इस अतिक्रमण के शिकार बेबस और गरीब सब्जी वाले और ठेले वाले हो गए। हर बार की तरह पुन: इन्हीं को बलि का बकरा बनाया गया और जहां अतिक्रमण हटाने की आवश्यकता है, जो कद्दावर लोग हैं, जो धनाढ्य वर्ग है, जिसका राजनीति से सरोकार है, वहां इनके जाने की हिम्मत ही नहीं पड़ती चाहे संतरों की बात की जाए या रामपुर घाटी और अलखिया खो जैसे विभिन्न दर्शनीय स्थानों की बात की जाए वहां इनका ध्यान ही नहीं जाता उसका कारण यह भी है इन्हीं के कर्मचारियों द्वारा एक रसीद काटकर इनको कुछ समय के लिए जमीन दे दी जाती है और उनसे मोटी रकम ले ली जाती है । जिसे वह अपना कब्जा बता कर हथिया लेते हैं और अपना दावा ठोकते हैं।तथा भविष्य में सरकारी आवास के नाम पर और विभिन्न अनुदानों के नाम पर भवन खड़ा कर लेते हैं, लेकिन क्योंकि यह सब उन्हीं की मिलीभगत से होता है इसीलिए यह लोग कभी भी इसकी सुध नहीं लेते चाहे इनको कितने भी आवेदन दिए जाएं या लोग जा कर के इनके कार्यालय पर जाकरअपनी छाती पीटते रहें इनके कान में जूं तक नहीं रेंगती । कभी भी वह अपने पटवारी और कर्मचारियों को दंडित नहीं करते ना ही अतिक्रमण हटाने का प्रयास ही करते।

यही हाल इस वक्त रामपुर घाटी सिद्ध स्थान अलखिया खो और उसके आसपास के प्रांगण में हो रहा है गौरतलब है कि सिद्ध स्थान अलखिया खो शहर का 500 वर्ष पुराना स्थान है। चारों तरफ शहर के नजदीक एकमात्र जंगल है, जहॉं सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा निरंतर जंगल को बचाने की कोशिश की जा रही है, और लगातार वृक्षारोपण भी किया जा रहा है। अभी कुछ दिन पूर्व अनुविभागीय अधिकारी, सबलगढ और मुख्य नगरपालिका अधिकारी ने भी यहॉं पौधा रोपड़ किया था। लेकिन कुछ अतिक्रमण कर्ताओं द्वारा यह सोचकर कि शासन की जमीन जिस पर अतिक्रमण किया गया है अगर उस पर वृक्षारोपण हो गया तो कहीं अतिक्रमण खाली न करना पड़े तथा अतिक्रमण हटवाने हेतु प्रशासन हस्तक्षेप न करे, इस वजह से रोपे गए पेड़ पर लगे ट्री गार्ड पर अनुविभागीय अधिकारी की नाम पट्टिका को भी हटा दिया गया है, भविष्य में सारे लगे हुए पेड़ों को तोडऩे और ट्री गार्डों को चोरी करवाने की धमकी भी लगातार दी जा रही है। अलग किया हो पर हो रहे अतिक्रमण अवैध उत्खनन और सारी घटिया हरकतों की जानकारी प्रशासन को पत्र के माध्यम से ज्ञापन के माध्यम से पंचनामा के माध्यम से दी जाती है अखबारों में कई बार इस की खबरें आ चुकी हैं कई आला और वरिष्ठ अधिकारियों को भी इसकी शिकायत की जा चुकी है लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ। पटवारियों की मिलीभगत से बड़े इस अतिक्रमण से स्थान को अत्यधिक क्षति पहुॅंच रही है। इसके अलावा अलखिया खो स्थान की पहाड़ी के ऊपर ही अवैध उत्खनन चल रहा है, उन खदानों पर ठेकों की मान्यता समाप्त हुए, कई वर्ष हो गए लेकिन चुके, खनन कर्ताओं और प्लॉटिंग कर्ताओं द्वारा प्रशासन को मोटा पैसा जाता है, इस वजह से वे कभी भी उन पर कार्यवाही करवाने की जहमत नहीं उठाते ऐसे में सिर्फ निर्बल का ही मरना है और धीरे-धीरे अतिक्रमण कर्ताओं का वर्चस्व बढऩा स्पष्ट है। जंगल निश्चित तौर पर नष्ट होगा अगर प्रशासन इस पर कोई कार्यवाही नहीं करेगा।