शिक्षा विभाग द्वारा जारी डीपीआई को किया जाए तत्काल बंद

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रायपुर
लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा निजी स्कूल में प्रवेश नहीं लेने वाले छात्रों को शासकीय स्कूल में प्रवेश दिए जाने के आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए और कोरोना संकट से निपटने राष्ट्रीय और राज्य आपदा पैकेज के तहत दो वर्ष की राशि तत्काल प्रदान की जाए ताकि निजी स्कूल संचालकों को थोड़ी बहुत राहत मिल सकें। उक्त बातें फेडरेशन आॅफ एजुकेशन सोसाइटीज के अध्यक्ष अजय तिवारी ने कहीं।

उन्होंने कहा कि निजी शालाओं का आय का स्त्रोत सिर्फ पाकलों द्वारा दिए जाने वाला शिक्षण शुल्क होता है। मार्च माह से शालाएं बंद है किन्तु शिक्षकों के वेतन, बिजली बिल, टेलीफोन बिली, भवन का किराया, ईएसआईसी अंशदान और अन्य कई आवश्यक शालेय खर्च मार्च माह से कर्ज लेकर यथा संभव निजी शालाएं कर रही है। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद पालकगण धीरे-धीरे शिक्षक शुल्क जमा कर रहे है और आर्थिक रुप से कमजोर पालक फीस में छूट के लिए आवेदन भी कर रहे है। शालाओं द्वारा तथा संभव छूट प्रदान भी किया जा रहा है। धीरे-धीरे पालक भी अपने आर्थिक स्थिति ठीक कर शालाओं में फीस जमा कर रहे है, अब तक 10 से 20 प्रतिशत पालकों ने फीस भी जमा कर दिया है। ऐसी स्थिति में छुट्टी के दिन रविवार 20 सितंबर 2020 को लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा अपने निर्देश क्रमांक 6698 (एमडीएम) / विद्या / 2020-21 के माध्यम से सिर्फ निजी स्कूलों को टारगेट करते हुए निजी स्कूलों में इस वर्ष प्रवेश नहीं लेने वाले बच्चों की सूची प्राप्त करने हेतु जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया है साथ ही यह निर्देश भी दिया गया है कि बच्चों का प्रवेश पास के शासकीय स्कूलों में 15 दिन के अंदर किया जाये। क्या 80 से 90 प्रतिशत बच्चों की सूची माांग जाना उचित है।

निवेदन करते हुए तिवारी ने कहा कि र्थोड़ा समय पालकों और निजी शालों को संभलने के लिए दिया जाना चाहिए। पालक भी अपने बच्चों को उसी निजी स्कूल में पढ़ाना चाहते है। इस तरह के पत्र जारी करने से पालकों और शाला प्रबंधकों के बीच भय, तनाव और आक्रोश का वातावरण निर्मित हो गया है। अंग्रेजी माध्यम का पास छात्र हिन्दी माध्यम सरकारी स्कूल में कैसे पढ़ेगा? उसी तरह सीबीएसई बोर्ड के पाठ्यक्रम का छात्र छत्तीसगढ़ बोर्ड के पाठ्यक्रम को तीन माह बीत जाने के बाद कैसे समझ पाएगा? यह आदेश उच्च न्यायालय आदेश के साथ ही छग माध्यमिक शिक्षा मंडल के प्रवेश, नामांकन, ग्राहता और परीक्षा पात्रता के नियम का उल्लंघन भी है। इतनी हड़बड़ी में ऐसा उटपटंग आदेश निकालना जब छग में स्कूल खुले ही नहीं है सिर्फ आॅनलाइन से शिक्षण कार्य चल रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि शासकीय स्कूलों की गिरती साख को बचाने और गिरती दर्ज संख्या की पूर्ति निजी स्कूलों को बदनाम कर निजी स्कूलों के बच्चों से कराने की शिक्षा विभाग के अधिकारी की मंशा है।  

यह नियम पाकलों को फीस जमा नहीं करने के लिए उकसा कर साल भर फीस न देकर बिना टीसी और अंकसूची के  अगले सत्र में शासकीय स्कूलों में आसान प्रवेश का मार्ग प्रसस्त करने वाला और गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा प्रदान करने वाले निजी स्कूलों को हतोत्साहित और परेशान करने वाला है जिससे निजी स्कूलों की आर्थिक स्थिति कमजोर होती चली जाएंगी। कुछ पालक बढ़ते कोरोना के केस के कारण इस वर्ष भी जनरल प्रमोशन हो जाएगा ऐसा मानकर चल रहे है जिसके कारण वे फीस जमा नहीं कर रहे है। कृपया सार्वजनिक रुप से स्पष्ट करने का कष्ट करें कि क्या इस वर्ष भी जनरल प्रमोशन दिया जाएगा या नहीं?

तिवारी ने निवेदन करते हुए लोक शिक्षण संचालनालय के आदेश को तुरंत निरस्त करवाने की मांग करते हुए कहा कि अन्यथा हजारों निजी स्कूल बंद हो जाएंगे साथ ही निजी स्कूलों को आर्थिक संकट से उबारने के लिए दो वर्षों की लंबित आरटीई की प्रतिपूर्ति राशि और राष्ट्रीय – राज्य आपदा राहत पैकेज भी निजी स्कूलों को प्रदान की जाए ताकि निजी शालाओ को थोड़ी बहुत आर्थिक राहत मिल सकें।