मध्य प्रदेश के 7 हजार करोड़ के शराब ठेके बंद!

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जबलपुर
 कोरोना संकट (Coronavirus) के बीच मध्य प्रदेश के शराब कारोबार को तगड़ा झटका लग सकता है.  जानकारी के मुताबिक प्रदेश के 70 प्रतिशत शराब ठेकेदार सरकार की नई शराब नीति (Liquor Policy) से संतुष्ट नहीं है और अपने ठेकों को सरेंडर कर चुके हैं. जबकि 30 प्रतिशत ठेकेदार ही सरकार के साथ हैं. 70 प्रतिशत शराब ठेकेदारों के सरेंडर करने से करीब 7000 करोड़ के आबकारी ठेके सरेंडर हो जाएंगे. बहरहाल, सोमवार का दिन विकल्प चुनने के लिए शराब ठेकेदारों के लिए अंतिम दिन होगा.

सभी प्रमुख शहरों में ठेके सरेंडर

हाईकोर्ट से अंतरिम आदेश आने के बाद शराब ठेकेदारों ने दुकानें सरेंडर करना शुरू कर दिया है. भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर में ठेकेदारों ने शराब दुकान सरकार को सौंप दी है. इसकी जानकारी उन्होंने आबकारी विभाग को भेजे शपथ पत्रों में दी है. हाईकोर्ट ने ठेकेदारों को स्थिति स्पष्ट करने के लिए तीन दिन का मौका दिया था, लेकिन जबलपुर, ग्वालियर, इंदौर, भोपाल, मंदसौर, नीमच, रतलाम, उज्जैन, देवास, छिंदवाड़ा, कटनी, रीवा आदि शहरों के ठेकेदारों ने शपथ पत्र सौंप दिए. इन्हीं शहरों से 70 फीसदी राजस्व आता है.

आंकड़ों से समझे पूरे हालात

शराब ठेकेदारों ने 10460 करोड़ में से 7200 करोड़ की दुकानें छोड़ दी है.
प्रदेश में कुल टेंडर हुए 10460 करोड़ रुपए
दुकानें छोड़ीं 7200 करोड़ रुपए
दुकान चलाएंगे 30 से 33 प्रतिशत
चार बड़े शहर भोपाल, इंदौर, ग्वालियर,जबलपुर- 3 हजार करोड़ की कुल दुकानें
प्रदेश में कुल देशी  2544 और विदेशी 1061 शराब दुकानें

सरकार को नुकसान
मार्च- 653 करोड़
अप्रैल- 1029 करोड़
मई- 900 करोड़

33 फीसदी दुकानों से खजाने में आए
मई- 150 करोड़
अब सरकार के पास दो विकल्प
आबकारी विभाग से दुकानें चलवाए
नए सिरे से टेंडर जारी कर दुकानें नीलाम करें

लंबे समय से शराब ठेकेदार और सरकार के बीच चला विवाद हाईकोर्ट आने से पहले ही सुलझ सकता था लेकिन ऐसा हुआ नहीं. शराब ठेकेदारों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता नमन नागरथ के मुताबिक सरकार को पहले 25 प्रतिशत ठेके की रकम कम करने का प्रस्ताव दिया गया था, जिसे नहीं माना गया. अगर ऐसा होगा तो आज सरकार को राजस्व का नुकसान नहीं होता. जिन दुकाने पर ठेकेदार लाइसेंस सरेंडर कर रहे हैं उनपर अगर रीटेंडर भी हुआ तो भी सरकार को 50 प्रतिशत तक का घाटा हर हाल में होगा.