मध्यस्थता संधि से भारतीय कंपनियों के लिए सिंगापुर का महत्व बढ़ेगा: विधि मंत्री

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नई दिल्ली
सिंगापुर के विधि मंत्री षणमुगम ने कहा है कि मध्यस्थता विवाद निपटान का एक प्रभावी तरीका है। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता पर नई संधि से भारतीय कंपनियों के साथ-साथ अधिवक्ताओं के लिए सिंगापुर का 'मूल्य बढ़ेगा। मध्यस्थता पर सिंगापुर संधि इस साल सितंबर से लागू हुई है। यह सिंगापुर के नाम पर संयुक्त राष्ट्र की पहली संधि है।  इसे मध्यस्थता के परिणामस्वरूप संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय समाधान करार संधि भी कहा जाता है। यह संधि भारत और अन्य देशों में आपसी व्यावसायिक और बड़े कॉरपोरेट विवादों को निपटाने में मध्यस्थता का प्रभावी तरीका प्रदान करती है।

अभी तक 53 देशों का इस संधि पर हस्ताक्षर
जूम वीडियो कॉल के जरिये पीटीआई-भाषा से साक्षात्कार में भारतीय मूल के षणमुगम ने कहा कि यह संधि अंतरराष्ट्रीय व्यापार के साथ कंपनियों के लिए भी काफी महत्चपूर्ण है।  उन्होंने कहा, ''हमारे लोगों से लोगों के प्रवाह, व्यापार प्रवाह, कानूनी प्रवाह की दृष्टि से मजबूत संबंध हैं। मुझे लगता है कि इससे भारतीय कंपनियों और अधिवक्ताओं के लिए सिंगापुर का महत्व बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि भारतीय अधिवक्ताओं के परिप्रेक्ष्य में देखा जाए, तो उनका कारोबार नहीं लिया जाएगा। वे कारोबार करते रहेंगे। वे सिंगापुर में कामकाज कर सकेंगे, जो उनके लिए आकर्षक गंतव्य होगा। अभी तक 53 देशों ने इस संधि पर हस्ताक्षर किए हैं। कुछ ही देशों ने अभी संधि को अनुमोदित किया है। भारत ने अभी संधि का अनुमोदन नहीं किया है।  सिंगापुर के मंत्री ने कहा कि मध्यस्थता विवाद निपटान का एक प्रभावी तरीका है। यह कारोबारी संबंधों को जारी रखने की अनुमति देता है। षणमुगम ने कहा कि अभी तक मध्यस्थता में एक कमी रही है, यदि मध्यस्थता समझौता है, लेकिन एक पक्ष इसे पूरा नहीं करता है, तो इसे प्रभावी तरीके से क्रियान्वित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, ''इस संधि के बाद इसे अनुमोदित करने वाले देशों को इसका प्रवर्तन करना होगा। हमारी मंशा ज्यादा से ज्यादा देशों को इसे अनुमोदित करने के लिए प्रोत्साहित करने की है। मंत्री ने कहा कि मध्यस्थता पंचाट से एक कदम पहले की प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि मुकदमेबाजी और पंचाट महंगी प्रक्रियाएं हैं।