भारत का अगला ‘चाबहार’ बनेगा म्यांमार का सित्तवे पोर्ट

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रंगून
पूर्वोत्तर के राज्यों से संपर्क को और मजबूत करने के लिए भारत चाबहार के तर्ज पर म्यांमार के सित्तवे पोर्ट को विकसित कर रहा है। इस पोर्ट की मदद से मिजोरम और मणिपुर समेत पूर्वोत्तर के अधिकतर राज्यों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। यह पोर्ट म्यांमार के राखाइन राज्य में स्थित है। माना जा रहा है कि यह पोर्ट साल 2021 के पहले तीन महीनों में चालू हो जाएगा।

अगले साल शुरू हो जाएगा यह पोर्ट
विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने गुरुवार को म्यामांर की दो दिवसीय यात्र के दौरान कहा कि कोरोना महामारी के बावजूद हम अगले वर्ष की पहली तिमाही तक सित्तवे पोर्ट पर ऑपरेशन शुरू कर देंगे। इस पोर्ट से आगे स्थित Paletwa से लेकर भारतीय बॉर्डर तक एक हाईवे का निर्माण भी किया जा रहा है। इस हाईवे पर बनने वाले 69 पुलों के बारे में भारतीय विदेश सचिव ने कहा कि इससे लिए हम जल्द ही टेंडर प्रक्रिया को आगे बढ़ाने वाले हैं।

म्यांमार में भारत कर रहा बड़ा निवेश
म्यांमार में भारत सित्तवे पोर्ट के अलावा सित्तवे और Paletwa में अंतर्देशीय जलमार्ग परिवहन टर्मिनल का भी निर्माण कर रहा है। इस परियोजना को मई 2017 में मंजूरी दी गई थी। जिसकी लागत 78 मिलियन डॉलर आंकी गई है। इस पोर्ट को संचालित करने वाली एजेंसी ने एक फरवरी 2020 से संचालन का जिम्मा भी संभाल लिया है।

क्यों अहम है यह परियोजना
सित्तवे पोर्ट भारत के कालदान मल्टी-मोडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट का हिस्सा है। इस परियोजना के पूरा होते ही न केवल म्यांमार के साथ कनेक्टिविटी बढ़ेगी बल्कि भारत के उत्तरपूर्वी क्षेत्र में माल के परिवहन के लिए परिवहन गलियारा भी बनेगा। म्यांमार की वर्तमान सरकार भारत के साथ मिलकर सीमाई क्षेत्र में और भी कई प्रोजक्ट पर काम कर रही है।

चीन की चाल होगी नाकाम
चीन सरकार म्यांमार पर उसके बेल्ट एंड रोड परियोजना में शामिल होने के लिए दबाव बना रही है। इसके लिए वह म्यांमार के उग्रवादी समूहों को हथियार तक सप्लाई करता है। ये आतंकी संगठन सुरक्षाबलों पर हमला करने के लिए चीन के बने हथियारों का प्रयोग करते हैं। कहा जाता है कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी म्यांमार में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए इन आतंकी समूहों को हथियार सप्लाई करवाती है। इन आतंकी समूहों के चीनी सेना के साथ भी घनिष्ठ संबंध हैं।