भारतीय वायु व थल सेना ने चीन से निपटने साझा युद्ध रणनीति तैयार की

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नई दिल्ली
पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ तनाव को देखते हुए देश की तीनों सेनाओं की तैयारियां जोरों पर जारी है। वहीं चीफ डिफेंस स्टॉफ पद के बनने के 10 महीने बाद नैशनल डिफेंस ऐकेडमी के एक बैच से निकले दोनों कोर्समेट देश की थल और वायु सेना का नेतृत्व कर रहें हैं। एक हैं थल सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे और दूसरे हैं वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल राकेश कुमार सिंह भदौरिया। ऐसे जब दोनों ही सेनाओं के प्रमुख पूर्वा लद्दाख में चीने के साथ बढ़ते तनाव को देखते हुए दोनों ही सेनाओं के प्रमुख चीन के खिलाफ साझा युद्ध की रणनीति बना रहे हैं।

दरअसल लेह हवाई क्षेत्र में एक तरफ भारतीय वायु सेना के C-17s, Ilyushin-76s और C-130J सुपर हरक्यूलिस विमान राशन और और अन्य जरूरी सामनों को पहुंचा रहे हैं वहीं इसके साथ वे हर तरह से चीनी सेना के मुकाबला करने के लिए भी पूरी तरह तैयार हैं।

लद्दाख क्षेत्र में तैनात एक वरिष्ठ वायु सेना कमांडर ने बताया कि वायुसेना मुख्यालय निर्देश स्पष्ट हैं कि सेना और अन्य सुरक्षा बलों द्वारा जो भी आवश्यकताएं हैं, उन्हें पूरा किया जाना है। सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे और वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया एनडीए के दिनों से ही परिचित हैं और तब से वे दोनी ही पक्के दोस्त हैं।

दोनों ही सेनाएं संयुक्त रूप से कर रहीं काम
फ़ॉर्वर्ड एरिया में तैनात सेना के एक अधिकारी ने कहा कि इन दिनों रक्षा कर्मचारियों के प्रमुख जनरल बिपिन रावत और दो सेवाओं के प्रमुख अक्सर चर्चा करते हैं और चीनी सेना के खिलाफ कार्रवाई की योजना बनाते हैं, जो क्षेत्र स्तर पर भी मदद कर रही है। दोनों ही सेनाएं संयुक्त रूप से काम कर रही हैं। भारतीय सेना जो चीनी सेना के खिलाफ तनाव की स्थिति में तैनात है वह भी नियमित रूप से भारतीय वायु सेना को अपनी डोमेन जागरूकता बढ़ाने के लिए जमीन पर वास्तविक स्थिति में अपडेट कर रही है। इसके अलावा उन्होंने बिगड़ने की स्थिति में संयुक्त रूप से कुछ ऑपरेशन की योजना बनाई है। इस प्रयास को जमीन पर देखा जा सकता है क्योंकि दोनों सेनाएं चीन और पाकिस्तान दोनों से ही लद्दाख सेक्टर में निपटने की तैयारी कर रही हैं।

सर्दियों के बीच टिके रहने की पूरी तैयारी
पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा की ओर लेह से सड़क पर चीन और बेहद कठोर सर्दियों दोनों से जूझ रहे सेना के सैनिकों को आपूर्ति प्रदान करने के लिए सिंधु नदी के ऊपर चिनूक को उड़ते हुए देखा जा सकता है। वहीं LAC के पास टैंक युद्धाभ्यास करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। इसके साथ ही वायु सेना के चिनूक और Mi-17V5s हेलीकॉप्टरों को लैंडिंग ग्राउंड (ALG) की ओर उड़ान भर रहे हैं। वही सीमा क्षेत्रों में कठोर सर्दियों से निपटने के लिए भी स्पेशल तैयारी की जा रही है।

चिनूक और अपाचे निभा रहे बड़ी जिम्मेदारी
14 कोर के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल अरविंद कपूर ने बताया कि हमारे हेलीकॉप्टरों की लिफ्ट क्षमता एक बड़ा वरदान साबित हो रही है। हम कंटेनर को उठाने और स्थानांतरित करने की स्थिति में हैं, जिसके जरिए हम पूर्वी लद्दाख में सैनिकों के लिए शेल्टर बनाने में कामयाबी हासिल कर पा रहे हैं। इसके अलावा चिनूक और अपाचे हेलीकॉप्टर भारतीय वायु सेना के महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। एक अधिकारी ने बताया कि चिनूक दैनिक आधार पर सीमावर्ती क्षेत्रों में आवश्यक सामग्री की आपूर्ति कर रहे हैं, जबकि अपाचे बड़े पैमाने पर पूर्वी लद्दाख सेक्टर में सिंधु और अन्य नदियों के उच्च ऊंचाई वाले विस्तृत घाटियों में एक टैंक युद्ध में लगे हुए हैं।

चीन से संघर्ष के लिए दोनों सेनाएं तैयार
थल सेना और वायु सेना के अधिकारियों दोनों का कहना है कि अभी भी ऐसे क्षेत्र हैं जहां दोनों सेवाएं अपने संयुक्त और बेहतर तरीके से काम कर सकती हैं लेकिन यह महसूस करती हैं कि जब तक चीन के साथ सीमा संघर्ष खत्म नहीं हो जाता, तब तक दोनों सेनाएं संयुक्त रूप से युद्ध लड़ने के लिए बेहतर तरीके से तैयार रहेंगी।