बिहार के सभी अस्पतालों में मरीजों के लिए दीदी की रसोई जल्द 

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पटना 
बिहार के सभी जिला और अनुमंडल में मरीजों को जल्द ही दीदी की रसोई का खाना मिल सकता है। इसके लिए मुख्यमंत्री के समक्ष जीविका दीदी की रसोई को लेकर राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किया गया। ग्रामीण विकास विभाग के सचिव बाला मुरुगन डी एवं राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने इकरारनामे पर दस्तखत किये। ऐसे में राज्य के सभी जिला व अनुमंडल अस्पतालों में दीदी की रसोई जल्द शुरू हो जाएगी। 

इससे पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार की दोपहर मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित संवाद में आत्मनिर्भर बिहार के सात निश्चय पार्ट-2 के तहत ग्रामीण इलाकों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सुविधा, अश्विन पोर्टल, वंडर एप एवं रेफरल ट्रांसपोर्ट टैकिंग सिस्टम (एम्बुलेंस सेवा) का शुभारंभ किया। 

दीदी की रसोई में लोगों को नाश्ता एवं भोजन की सुविधा 
इस समारोह में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि कुछ दिन पहले पूर्णिया के धमदाहा में हमने देखा कि आशा की दीदियां एक मरीज के लिए 100 रुपये में नास्ता एवं खाना उपलब्ध करा रही हैं। हमने कहा कि इसे बढ़ाकर 150 रुपये कर दिया जाए। आज दीदी की रसोई कार्यक्रम के संचालन के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर भी किया गया, जिससे सभी सदर तथा अनुमंडलीय अस्पतालों में दीदी की रसोई स्थापित की जा सकेगी। इससे लोगों को नाश्ता एवं भोजन की सुविधा ससमय उपलब्ध होगी। 

स्वास्थ्य विभाग को दी बधाई
मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को अनेक कार्यक्रमों की शुरुआत के लिए बधाई दी। कहा कि हमलोगों ने संकल्प लिया है कि बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं का ऐसा प्रबंध करेंगे कि किसी को मजबूरी में इलाज के लिए बिहार से बाहर जाना न पड़े। अगर कोई अपनी इच्छा से इलाज के लिए बाहर जाना चाहते हैं तो अलग बात है। वर्ष 2005 में हमलोगों को काम करने का मौका मिला। उसके पहले स्वास्थ्य के क्षेत्र में क्या स्थिति थी, आप सभी अवगत हैं। हमलोगों ने स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के लिए डॉक्टर, स्वास्थ्यकर्मियों को पदस्थापित किया। जरूरत के अनुसार नियोजन एवं नियुक्ति की गई। मुफ्त दवा का भी प्रबंध कराया गया। वर्ष 2018 की रिपोर्ट के अनुसार औसतन 10 हजार मरीज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर पहुंचने लगे। आत्मनिर्भर बिहार के सात निश्चय पार्ट-2 में सभी स्वास्थ्य केंद्रों को अनुमंडल अस्पतालों एवं जिला अस्पतालों से लिंक कर देंगे और वहीं पर सारी सुविधाएं उपलब्ध करायी जाएंगी और जरूरत के अनुसार मरीजों का बेहतर इलाज किया जाएगा।