प्रदेश के बड़े हिस्से में बाढ़ की स्थिति

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भोपाल

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि गत तीन दिनों में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हो रही अनवरत वर्षा के कारण प्रदेश के बड़े हिस्से में बाढ़ की स्थिति निर्मित हो गई है। देवास, हरदा, सीहोर, होशंगाबाद, रायसेन, विदिशा, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा, खंडवा आदि जिलों में बाढ़ का अधिक असर हुआ है। कई गाँव चारों ओर से बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। वहां मकानों की पहली मंजिल तक पानी भर गया है। खेत पूरी तरह डूब गए हैं। पेड़ों के ऊपरी हिस्से ही दिखाई दे रहे हैं। नर्मदा नदी के 10 किलोमीटर तक दोनों ओर के क्षेत्रों में बाढ़ का असर है। नर्मदा नदी की सहायक नदियों का पानी नर्मदा में जाने के बजाय वापस आने से उनके आसपास के क्षेत्र जलमग्न हो गए हैं। सरकार द्वारा बचाव व राहत कार्य 24 घंटे युद्ध स्तर पर चलाए जा रहे है। बाढ़ में फंसे एक-एक व्यक्ति को सुरक्षित निकालेंगे तथा हर बाढ़ पीड़ित को हर संभव सहायता देंगे। बाढ़ हमारे लिए चुनौती है और पीड़ित मानवता की सेवा धर्म। हम दोनों मोर्चों पर सफल होंगे।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि अभी बारिश की तीव्रता कम होने से बारिश का पानी उतर तो रहा है, परन्तु ऐसे में मौसमी बीमारियों के बढ़ने का खतरा रहता है। अत: सभी संबंधित विभाग पूरी मुस्तैदी एवं कर्मठता के साथ निरंतर प्रभावित व्यक्तियों को हर आवश्यक सहायता पहुंचाने का कार्य करें। कार्य में थोड़ी भी ढिलाई अथवा लापरवाही न हो।

मुख्यमंत्री चौहान ने आज मंत्रालय से वी.सी. के माध्यम से राजस्व, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, नगरीय प्रशासन एवं विकास, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा आदि के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए। आयुक्त जनसंपर्क डॉ. सुदाम खाड़े ने प्रदेश में बाढ़ की स्थिति एवं राहत कार्यों पर प्रजेन्टेशन दिया।

मुख्यमंत्री चौहान ने बताया कि प्रदेश के बाढ़ प्रभावित 454 गाँवों से लगभग 11 हजार लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। प्रदेश में 170 राहत शिविर संचालित हैं, जिनमें भोजन, दवाओं, शुद्ध पेयजल आदि सभी व्यवस्थाएं की गई हैं।

267 व्यक्तियों को एयर लिफ्ट किया गया

मुख्यमंत्री चौहान ने बताया कि एयरफोर्स के हैलीकाप्टर द्वारा प्रदेश के विभिन्न स्थानों से 267 व्यक्तियों को एयर लिफ्ट किया गया है। बचाव कार्यों में हवाई सेना के साथ ही, सेना, एन.डी.आर.एफ., एस.जी.आर.एफ., पुलिस, होमगार्ड सहित राजस्व का पूरा अमला निरंतर लगा हुआ है। इनके साथ ही समाजसेवी संगठन, संस्थाएं, हिम्मती नौजवान निरंतर सेवा कर रहे हैं।

बाढ़ की स्थिति पर निरंतर नजर

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि वे तथा मुख्य सचिव, डी.जी.पी. आदि निरंतर बाढ़ की स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। आज दोपहर उनके द्वारा प्रदेश के 6 जिलों का हवाई सर्वेक्षण कर बाढ़ की स्थिति को देखा। कल रातभर वे जागकर बाढ़ की स्थिति की पूरे प्रदेश से जानकारी लेते रहे। कई गांवाँ से सीधे उनके पास फोन आए। रातभर बचाव कार्य चला। रात में ढाई बजे ग्राम नरेला से 5 व्यक्तियों को निकाला गया। भोपाल कमिश्नर एवं आई.जी. रात में नाव से 2 किलोमीटर ग्राम सोमलवाड़ा गए व लोगों को बचाया।

बाढ़ कॉल सेंटर 24 घंटे कार्य करें

मुख्यमंत्री चौहान ने निर्देश दिए कि बाढ़ राहत के लिए सभी जिलों में बनाए गए नियंत्रण कक्षों के साथ ही राज्य स्तरीय कॉल सेंटर 1079 तथा डायल-100 चौबीस घंटे कार्य करें तथा समस्या आते ही तुरंत निदान करें। भोपाल स्तर से जो भी मदद चाहिए तुरंत मिलेगी। जिन क्षेत्रों में बाढ़ नहीं है वहां के संसाधनों का बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में इस्तेमाल किया जाए।

स्वच्छ पेयजल आपूर्ति सर्वोच्च प्राथमिकता

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि बाढ़ के कारण पेयजल स्त्रोतों, तालाबों, कुओं आदि में गंदा पानी भर गया है। ऐसे में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाना सर्वोच्च प्राथमिकता है। हैण्ड पंप का पानी अपेक्षाकृत शुद्ध होगा, अत: उसका अधिक इस्तेमाल हो। पेयजल को शुद्ध करने के लिए उसमें क्लोरीन आदि दवाओं का समुचित उपयोग हो। लोग गंदा पानी ना पीएं, यह जागरूकता आवश्यक है। इसके अलावा पानी को छानकर तथा उबालकर शुद्ध बनाया जा सकता है।

ग्रामीण डिपो में हों सभी आवश्यक दवाएं

मुख्यमंत्री चौहान ने निर्देश दिए कि नगरों सहित सभी ग्रामीण डिपो होल्डर्स के पास सभी आवश्यक दवाइयां उपलब्ध हों। स्वास्थ्य अमला विशेष चौकन्ना रहे तथा डेंगू, मलेरिया, हैजा आदि बीमारियों से बचाव के सभी इंतजाम करे। दवाओं का आवश्यक छिड़काव करें।

गाँवों में पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा नगरों में नगरीय विकास व्यवस्थाएं करें

मुख्यमंत्री चौहान ने निर्देश दिए कि नालों आदि की गाद निकालना, सड़कों आदि की साफ-सफाई, बिजली आपूर्ति आदि सभी मूलभूत सेवाओं की निर्बाध आपूर्ति गांवों में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा नगरों में नगरीय विकास विभाग सुनिश्चित करें। जानवरों के लिए चारे आदि की व्यवस्था के साथ ही मृत जानवरों को तत्परता के साथ हटाने की कार्रवाई हो।

वैज्ञानिक तरीके से करें क्षति का आकलन

31 अगस्त तक फसल बीमा करा सकते हैं किसान

मुख्यमंत्री चौहान ने निर्देश दिए कि राजस्व विभाग बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फसलों आदि की क्षति का आकलन वैज्ञानिक तरीके से करें, जिससे फसल बीमा की राशि मिलने में दिक्कत न आए। जान-माल की क्षति का तुरंत आकलन कर आर.बी.सी. 6/4 के अंतर्गत सहायता दें। साथ ही किसानों को बताया जाए कि वे 31 अगस्त तक फसल बीमा करवा सकते हैं।

बाढ़ एवं राहत कार्यों से संबंधित प्रमुख बिन्दु

    प्रदेश के बड़े हिस्से में बाढ़ जैसी स्थितियाँ निर्मित हो रही हैं। माँ नर्मदा जी और उनकी सहायक नदियाँ इस समय उफान पर हैं। पिछले 48 घंटों में तेजी से जलस्तर बढ़ा है।

    आज प्रदेश में 856.7 मिलीमीटर वर्षा हुई है जो सामान्य वर्षा से 14 प्रतिशत अधिक है। वर्षा का यह क्रम पिछले तीन दिनों से निरंतर जारी है। प्रदेश के 21 जिलों में सामान्य से 20 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई है।

    विशेषकर प्रदेश के नर्मदांचल के दक्षिणी भाग के जिलों में हुई अत्याधिक वर्षा के कारण इस क्षेत्र की नदियों, नालों तथा बाधों के संग्रहण क्षेत्र में जल स्तर काफी बढ़ गया है।

    नर्मदा नदी के लगभग समस्त प्रमुख बांध जैसे बरगी, तवा, बारना, इंदिरा सागर तथा ओंकारेश्वर अपने पूर्ण जलाशय स्तर (FRL) के समीप पहुंच चुके हैं। नर्मदा नदी कई स्थानों पर खतरे के निशान के काफी उपर के स्तर पर बह रही है।

    मध्यप्रदेश में भारी वर्षा के पूर्वानुमान के दृष्टिगत राज्य में स्थित निचले क्षेत्रों से लोगों को बाहर निकालने की संपूर्ण तैयारी की गई है। पिछले 2 दिनों में 12 जिलों के 454 ग्रामों से 11000 से अधिक व्यक्तियों को बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों से बाहर निकाला जा चुका है। वर्तमान में 9300 व्यक्तियों को 170 राहत शिविरों में ठहराया गया है।

    होशंगाबाद, सीहोर, रायसेन, छिन्दवाड़ा एवं बालाघाट जिलों में सेना की कंपनियों, राष्ट्रीय आपदा मोचन दल (NDRF), एस.डी.आर.एफ., पुलिस, होमगार्ड और हेलीकाप्टर्स, नावों आदि की मदद से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया है।

    पश्चिमी मध्यप्रदेश के सभी जिलों में भारी वर्षा की संभावना को देखते हुए जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

                                        प्रमुख निर्देश

    जिलों में बनाए गए राहत शिविरों में भोजन, पीने का पानी, दवाईयाँ, बिजली, साफ-सफाई आदि की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जानी होगी। इन कार्यों के लिए यदि जिलों से मांग प्राप्त होती है तो राज्य स्तर से आवश्यक सहयोग तत्काल किया जाए।

    राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम (1079) तथा डायल 100 चौबीसों घंटे कार्य करें, तत्काल रिस्पांस दिया जाना चाहिए।

    ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में साफ-सफाई, दवाओं का छिड़काव, शुद्ध पेयजल की आपूर्ति एवं दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

    मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा घर-घर में जागरूकता अभियान चलाया जाए।

    प्रत्येक ग्राम में दवाओं के डिपो होल्डर्स के पास सामान्य दवाओं का पूरा स्टॉक रखा जाना सुनिश्चित करें।

    जल स्त्रोंतों में ब्लीचिंग पाउडर तथा अन्य दवाओं का तत्काल उपयोग किया जाए। कुओं में बारिश का पानी भरने के कारण हैण्डपंप ही शुद्ध जल प्राप्ति के एकमात्र स्त्रोत है। अत: विशेष अभियान चलाकर खराब हैण्डपंपों का सुधार किया जाए।

    अतिरिक्त संसाधन लगाकर नालों तथा सड़कों की सफाई कराई जाए।

    जहाँ पर भी मृत जानवर पड़े हो उनके उठवाने की त्वरित व्यवस्था करें।

    ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत के माध्यम से नालों, गलियों से कीचड़ की निकासी की व्यवस्था की जाए।