देश में कोरोना के रिकवरी केस में छत्तीसगढ़ प्रथम

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रायपुर। पिछले छह दिनों में भारत में रोगियों के स्वस्थ होने की दर नए मामलों से अधिक हो गई है। यह दर जाँच, ट्रेसिंग, उपचार, निगरानी और स्पष्ट संदेश पर ध्यान देने का एक परिणाम है, जिसका उल्लेख प्रधानमंत्री ने कल सात प्रमुख राज्यों/संघ शासित प्रदेशों के साथ हुई समीक्षा बैठक में किया था। देश में पिछले 24 घंटों में 87,374 रोगी स्वस्थ हुए हैं, जबकि 86,508 नए मामलों की पुष्टि की गई है। इसके साथ, रिकवरी की कुल संख्या 46.7 लाख (46,74,987) है। रिकवरी दर 81.55 प्रतिशत के पार पहुँच गया है। पत्र सूचना कार्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि देश के 13 राज्यों में रिकवरी रेट में काफी कमी आई है जिसमें छत्तीसगढ़ प्रथम स्थान पर है जहां 2434 नये मामलों में 4772 मरीज ठीक होकर अपने घर जा चुके है।

विज्ञप्ति में बताया गया है कि जैसा कि भारत में नए मामलों की तुलना में अधिक रिकवरी दर्ज की गई हैं, इसलिए ठीक हुए मामलों और पुष्टि वाले मामलों के बीच का अंतर लगातार बढ़ रहा है। ठीक हुए रोगियों के मामले (46,74,987) पुष्टि हुए मामलों (9,66,382) से 37 लाख से अधिक हैं। इसने यह भी सुनिश्चित किया है कि पुष्टि वाले मामलों की संख्या कुल मामलों का मात्र 16.86 प्रतिशत है। मामलों में निरंतर कमी होना जारी है।
राष्ट्रीय स्तर पर, 13 राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों ने भी नए मामलों की तुलना में अधिक संख्या में नई रिकवरी दर्ज की हैं जिनमें छत्तीसगढ़ में 2434 नये मामलों में 4772, जम्मू-कश्मीर में 1249 में 2796, उत्तरप्रदेश 5143 में 6506, आंध्रप्रदेश 7228 में 8291, दिल्ली में 3714 में 4465, हरियाणा 1986 में 2571, झारखंड 1141 में 1532, हिमाचलप्रदेश 280 में 448, मणिपुर 96 में 221, चंडीगढ़ 180 में 255, मिजोरम 0 में 72, त्रिपुरा 451 में 492 तथा तमिलनाडू 5325 में 5363 शामिल है।

ये निरंतर उत्साहजनक परिणाम केंद्रीय नेतृत्व में बनाई गई सक्रिय और जाँच और टैस्ट ट्रैक ट्रीट ठोस रणनीति के कारण संभव हो पाए हैं, जो वायरस का पीछा करो दृष्टिकोण पर केंद्रित है। केंद्र द्वारा जारी स्टैंडर्ड आॅफ केयर प्रोटोकॉल के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा देखभाल के साथ संयुक्त रूप से उच्च एवं त्वरित जाँच, शीघ्र निगरानी और ट्रैकिंग के माध्यम से प्रारंभिक पहचान ने उच्च संख्या में रिकवरी दर्ज की है।
अस्पतालों में बेहतर और प्रभावी नैदानिक उपचार, देखभालयुक्त घरेलू अलगाव, नॉन-इनवेसिव आॅक्सीजन और स्टेरॉयड का उपयोग, एंटीकोआगुलंट्स और रोगियों के लिए एंबुलेंस की बेहतर सेवाओं एवं शीघ्र और समय पर उपचार के लिए राज्य/केंद्रशासित प्रदेशों पर निरंतर ध्यान केंद्रित किया गया है। आशा कार्यकतार्ओं के अथक प्रयासों ने घर में अलग रखे गए रोगियों की प्रभावी निगरानी और ट्रैकिंग से उनके स्वास्थ्य को बेहतर बनाना सुनिश्चित किया है

ई-संजीवनी डिजिटल प्लेटफॉर्म ने टेलीमेडिसिन सेवाओं को सक्षम बनाया है जो कोविड के प्रसार को रोकने और साथ ही साथ गैर-कोविड आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं के प्रावधानों को भी सक्षम बनाने में सफल रहे हैं। केंद्र ने आईसीयू में कार्यरत चिकित्सकों की नैदानिक प्रबंधन क्षमताओं के निर्माण पर भी ध्यान केंद्रित किया है। एम्स, नई दिल्ली के क्षेत्र विशेषज्ञों द्वारा कोविड-19 पर आयोजित राष्ट्रीय ई-आईसीयू प्रबंधन अभ्यास ने इसमें काफी सहायता प्रदान की है। 278 संस्थानों और उत्कृष्टता केंद्रों के साथ इस तरह के 20 सत्र 28 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में आयोजित किए गए हैं।