दिल्ली दंगे में आरोपी बुजुर्ग को जमानत देने से इनकार, कोर्ट ने पूछा-फुटेज में पहला पत्थर उठाकर फेंकते दिख रहा व्यक्ति कौन?

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नई दिल्ली
दिल्ली दंगा मामले के आरोपी बुजुर्ग को नसीहत देते हुए अदालत ने कहा कि यह बहुत दुखद है कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के दंगों में बुजुर्गों ने अपनी उम्र के हिसाब से समझदारी नहीं दिखाई। उलटा बुजुर्ग दंगाइयों का नेतृत्व कर रहे थे। सीसीटीवी फुटेज से साफ पता चल रहा है सबसे पहले पत्थर इस बुजुर्ग आरोपी ने लोगों पर फेंका। उसके बाद युवाओं ने पत्थरबाजी शुरू कर दी। ऐसे आरोपी को जमानत नहीं दे सकते। मामले की सुनवाई करते हुए कड़कड़डूमा स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव की अदालत ने कहा कि जब भी समाज या परिवार में किसी तरह की तनावपूर्ण स्थिति आती है तो बुजुर्ग अपनी समझदारी से हालात को संभालते हैं। वह युवा पीढ़ी को भाई-चारे का पाठ पढ़ाते हैं। लेकिन यहां तो उलटा ही हुआ। अधिकतर बुजुर्ग दंगों को भड़काने और ज्यादा से ज्यादा नुकसान करने में सबसे आगे थे। इस मामले की फुटेज में भी बुजुर्ग सबसे पहले पत्थर उठाकर फेंकता हुआ साफ दिख रहा है। फिर बुजुर्ग होने के नाते किस बात की राहत दी जाए। 

कहा, शरीर में ताकत नहीं

इस आरोपी की तरफ से उम्र का हवाला देते हुए जमानत मांगी गई थी। बुजुर्ग की जमानत याचिका में कहा गया था कि इस उम्र में कोई हिंसा में शामिल होने की हिम्मत कैसे कर सकता है। उसके शरीर में इस तरह की वारदात में शामिल होने की शक्ति नहीं है। इस पर अदालत ने टिप्पणी की कि फिर फुटेज में वो पहला पत्थर उठाकर फेंकता दिख रहा व्यक्ति कौन है। 

तीन मामले में है आरोपी

पुलिस रिपोर्ट में अदालत को बताया गया कि इस बुजुर्ग के खिलाफ दयालपुर व खजूरी थाने में तीन प्राथमिक अलग-अलग दर्ज हैं। इन सभी जगह बुजुर्ग को दंगाइयों का नेतृत्व करते व जान-माल का नुकसान करते देखा गया है। अदालत ने भी कहा इन दंगों में बुजुर्ग का कथित तौर पर साथ देने वाले दो और लोगों की जमानत याचिका कई बार खारिज हो चुकी है। अदालत ने कहा कि यदि अधिक उम्र कथित तौर पर दंगे भड़काने में आड़े नहीं आती, तो जेल में रहने में क्यों दिक्कत हो रही है। 

अदालत की टिप्पणी

‘बुजुर्गों का काम होता है ऐसे मुश्किल समय में अपने बच्चों को सही रास्ता दिखाना। ऐसा अब तक होता भी आया है। लेकिन फरवरी में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में बुजुर्गों की भूमिका कथित तौर पर दंगा भड़काने वालों के तौर पर सामने आई है। इसलिए यह राहत के हकदार नहीं हैं।’ 
विनोद यादव, एएसजे