डायलॉग कम होने के चलते शोले में काम नहीं करना चाहते थे ‘सांभा’, मिली थी पहचान

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नई दिल्ली 

हिंदी फिल्मों में शोले का जब भी जिक्र होता है तो सिर्फ एक नाम नहीं बल्कि कई कैरेक्टर सामने आ जाते हैं. फिल्म में गब्बर का किरदार हो या फिर जय-वीरू, बसंती ये किरदार तो कोई नहीं भूल सकता. पर इसके अलावा भी मौसी, इमाम साहब, सूरमा भोपाली, सांभा, कालिया जैसे छोटे-छोटे किरदार थे जो उतने ही हिट हुए जितने की बड़े किरदार और उसे निभाने वाले.

सांभा की बात करें तो ये रोल मैकमोहन ने किया था. 10 मई 2010 को मैकमोहन का निधन हो गया था. उन्हें कैंसर था और लंबे समय के इलाज के बाद उनकी जान चली गई थी.

शोले को लेकर कई कहानियां फिल्म के कामयाब होने के बाद आईं. उसी में से एक कहानी ये थी कि शोले में सांभा का किरदार पहले मैकमोहन करने के लिए राजी नहीं थे. उन्होंने रमेश सिप्पी से फिल्म में सांभा का रोल करने से साफ मना कर दिया था. इसके पीछे उन्होंने तर्क दिया था कि सांभा के रोल में डायलॉग बहुत कम हैं.
 

आपको याद ही होगा कि शोले में गब्बर और सांभा के बीच जो संवाद हुआ था वो डायलॉग कितना फेमस हुआ था. लोग उसे आज भी बोलते हैं. जब गब्बर कहता है- सरकार ने हम पर कितने इनाम रखा है, तब सांभा कहता है- पूरे पचास हजार. ऐसे ही सांभा और गब्बर के की डायलॉग फेमस हुए थो जो लोग आज भी बोलते हैं.

काफी लंबा था फिल्मी करियर

मैकमोहन का फिल्मी करियर काफी लंबा था. 'हकीकत' से 1964 में फिल्मी सफर की शुरुआत की थी. जानकारी के मुताबिक, मैकमोहन ने करीब 200 हिंदी फिल्मों में काम किया था. उनके खाते में शोले के अलावा रफू चक्कर, कर्ज, डॉन, खून-पसीना जैसी फिल्में हैं. उन्होंने फिल्मी दुनिया में करीब 46 साल तक काम किया था.