टर्की ने UN में उठाया कश्मीर का मुद्दा, गदगद हुए इमरान खान

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संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में टर्की के कश्मीर का मुद्दा उठाने को लेकर पाकिस्तान ने खुशी जाहिर की है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने टर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोवान को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन में कश्मीरियों का जिक्र करने के लिए शुक्रिया अदा किया है.
  
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने ट्वीट किया, "संयुक्त राष्ट्र महासभा में एर्दवान ने कश्मीरियों के अधिकारों के लिए एक बार फिर से आवाज उठाई जिसकी मैं तहे दिल से सराहना करता हूं. टर्की कश्मीरियों के आत्म-निर्णय के वैध संघर्ष के लिए ताकत का एक स्रोत बना हुआ है."
 
संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दूसरे दिन टर्की के राष्ट्रपति ने कहा, कश्मीर विवाद दक्षिण एशिया की शांति और स्थिरता के लिए बेहद अहम है और अब भी एक ज्वलंत मुद्दा है. जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जो कदम उठाए गए हैं, उनसे समस्या और जटिल हो गई है. हम संयुक्त राष्ट्र के दायरे में कश्मीर मुद्दे के ऐसे समाधान में पक्ष में हैं जो कश्मीरियों की उम्मीदों के अनुरूप हो.
  
संयुक्त राष्ट्र में भारतीय राजदूत टीएस त्रिमूर्ति ने टर्की के राष्ट्रपति एर्दोवान की टिप्पणी पर आपत्ति जताई. त्रिमूर्ति ने कहा, हमने भारत के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के संबंध में टर्की के राष्ट्रपति की टिप्पणी देखी है. ये सीधे-सीधे भारत के आंतरिक मामले में दखल है और बिल्कुल अस्वीकार्य है. टर्की को दूसरे देशों की संप्रुभता का सम्मान करना सीखना चाहिए.
 
पिछले साल भी, संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की बैठक में टर्की के राष्ट्रपति एर्दोवान ने कश्मीर का मुद्दा उठाया था और कहा था कि यूएन के प्रस्तावों के बावजूद 80 लाख लोग कश्मीरी कैद हैं. एर्दोवान ने कश्मीर विवाद पर ध्यान ना देने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी आलोचना की थी. इसी साल, फरवरी महीने में तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोवान ने पाकिस्तान का दौरा किया था. इस दौरे में उन्होंने पाकिस्तानी संसद को संबोधित करते हुए कहा था कि कश्मीर का मुद्दा जितना अहम पाकिस्तानियों के लिए है, उतना ही तुर्की के लोगों के लिए है.
  
UNGA में पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने भी कश्मीर के मुद्दे को लेकर जमकर भड़ास निकाली. पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र की उपलब्धियों की सराहना की लेकिन उसकी 'खामियों और असफलताओं' का भी जिक्र किया. कुरैशी ने कहा, "जम्मू-कश्मीर और फिलीस्तीन यूएन की सबसे बड़ी नाकामी है. जम्मू-कश्मीर के लोग आज भी इंतजार कर रहे हैं कि संयुक्त राष्ट्र ने उन्हें आत्म निर्णय का अधिकार दिलाने का जो वादा किया है, वो पूरा होगा. आज संयुक्त राष्ट्र को सिर्फ 'टॉक शॉप' के तौर पर देखा जाने लगा है जो अपने प्रस्तावों और फैसलों का लगातार उल्लंघन होते देख रहा है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अंतरराष्ट्रीय सहयोग सबसे निम्नतम स्तर पर है."
  
कुरैशी ने कहा कि युद्ध और श्रेष्ठता की गलत धारणा से हुए भारी नुकसान के बाद संयुक्त राष्ट्र एक उम्मीद की किरण बनकर आया. लेकिन जिन ताकतों ने नस्लवाद, फासीवाद और दूसरे विश्व युद्ध को जन्म दिया, वही आज शिनोफोबिया (चीन का फोबिया) और इस्लामोफोबिया के आकार में लौट रही हैं. संयुक्त राष्ट्र ने कश्मीर के लोगों से आत्म-निर्णय का अधिकार दिलाने का वादा किया था और वे आज भी इस वादे के पूरे होने का इंतजार कर रहे हैं. कुरैशी ने संयुक्त राष्ट्र की बैठक में कहा कि ये वक्त आत्म-निरीक्षण का है और जंग से आने वाली पीढ़ियों को बचाने के लिए जरूरी कदम उठाने का है.
 
पिछले कई सालों से पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र के अलग-अलग मंचों से कश्मीर मुद्दे को लगातार उठाता रहा है. कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद से चीन ने भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में तीन बार कश्मीर का मुद्दा उठाया. हालांकि, पाकिस्तान को अपनी इस मुहिम में मुस्लिम देशों का समर्थन नहीं मिला और इमरान खान इसे लेकर निराशा भी जाहिर कर चुके हैं.