जोकीहाट विधानसभा सीट: तस्लीमुद्दीन परिवार की आंतरिक कलह खुलकर आई सामने

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अररिया 
जोकीहाट विधानसभा क्षेत्र में इस बार का चुनाव कुछ ज्यादा ही रोचक व रोमांचक होने की ओर बढ़ता दिख रहा है। महागठबंधन के टिकट घोषणा के बाद पूर्व सांसद तस्लीमुद्दीन के परिवार का अंदरूनी कलह खुल कर सामने आ गया है। परिवार दो धड़ों में बंट चुका है। राजद का टिकट हासिल करने में कामयाब रहने के बाद तस्लीमुद्दीन के पुत्र पूर्व सांसद सरफराज आलम पूरे दमखम के साथ चुनावी तैयारी में लग गए हैं। वहीं टिकट की रेस में मात खाने के बाद उनके छोटे भाई व जोकीहाट के निवर्तमान विधायक शाहनवाज आलम न केवल नाराज हैं, बल्कि सभा आयोजित कर अपनी नाराजगी खुले आम जता रहे हैं।

वहीं दूसरी तरफ बीजेपी प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद तस्वीर लगभग साफ होती नजर आ रही है। बीजेपी ने यहां से रंजीत यादव को उम्मीदवार बनाया है।  रंजीत यादव की भी राजनीतिक पृष्ट भूमि है। साथ ही उन्हें जोकीहाट विधानसभा से चुनाव लड़ने का अनुभव भी है।

गौरतलब है कि वर्ष 2017 में पिता के निधन के बाद जब सरफराज आलम लोकसभा का उपचुनाव लड़ कर सांसद बने तो खाली हुई जोकीहाट विधानसभा सीट के लिए उप चुनाव हुआ। उस समय भी राजद के टिकट को लेकर तस्लीमुद्दीन परिवार में काफी खींचतान हुई थी। तब बाजी तस्लीमुद्दीन के छोटे बेटे ने मारी। उन्हें टिकट मिला और उन्होंने जदयू के मुर्शिद आलम को लगभग 41 हजार मतों के अंतर से हरा दिया था। कहा जाता है कि चुनाव के बाद भी भाइयों के बीच की तल्खी बरकरार रही।

यह तल्खी इस विधानसभा चुनाव में पूरी तरह तब जाहिर होने लगी जब महागठबंधन के टिकट के लिए दोनों सगे भाई अपनी-अपनी दावेदारी जताने लगे। कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं था।  चर्चा तो ये भी होने लगी थी कि राजद का टिकट मिले या न मिले सरफराज आलम चुनाव हर हाल में लड़ेंगे। आखिरकार हुआ ये कि बड़े भाई का दांव भारी पड़ा। निवर्तमान विधायक का टिकट कट गया। सरफराज आलम राजद के उम्मीदवार घोषित हो गए। 

अब स्थिति ये है कि टिकट से वंचित छोटा भाई शाहनवाज नाराज हैं। सभाएं आयोजित कर अपने समर्थकों के बीच अपना दर्द बयां कर रहे है। हालांकि उन्होंने अब तक अपना पत्ता नहीं खोला है। लेकिन समर्थकों से सलाह और सुझाव मांग कर चुनाव लड़ने का संकेत जरूर दे रहे हैं। अगर सुलह नहीं हुई तो चुनावी मैदान में दोनों भाई के आमने-सामने होने की पूरी संभावना है। ऐसी हालत में मतदाताओं के लिए यह तय करना मुश्किल होगा कि वे दोनों में से किस भाई का पक्ष लें। इसके अलावा  तस्लीमुद्दीन परिवार के ही एक अन्य सदस्य शब्बीर अहमद भी चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी कर चुके हैं। श्री अहमद स्वर्गीय तस्लीमुद्दीन के न केवल रिश्ते में भाई लगते हैं बल्कि उनके बहुत करीबी रहे हैं। तस्लीमुद्दीन के जीवित रहते हर चुनाव में उनकी सक्रिय भागीदारी रहती थी। वे चुनावी रणनीतिकारों में से थे, पर उनके निधन के बाद वे भी चुनावी राजनीति में खुल कर सामने आ गए हैं।

टिकट नहीं मिलने से क्षेत्र के लोगों में बहुत नाराजगी है। चुनाव लड़ने या नहीं लड़ने का फैसला अभी नहीं लिया है। लोगों से मिल कर सुझाव ले रहे हैं। जनता के सुझाव के आधार पर ही फैसला लेंगे।
मो शाहनवाज, निवर्तमान विधायक, जोकीहाट

दोनों भाइयों के चुनाव लड़ने की संभावना नहीं है। पार्टी आलाकमान ने जोकीहाट के टिकट को लेकर जो फैसला लिया है उसे सभी स्वीकार कर रहे हैं। चुनाव में राजद का वोट एकजुट रहेगा।
सुरेश पासवान, राजद जिलाध्यक्ष