जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी, जानिए कितना खूंखार था मारा गया लश्कर कमांडर एजाज रेशी

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सांबूरा 

कई सालों से सुरक्षाबलों से बचते रहे लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर एजाज रेशी को सुरक्षाबलों ने उसके साथी के साथ रविवार रात एक मुठभेड़ में मार गिराया। जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह ने यह जानकारी दी। एजाज का मारा जाना सुरक्षाबलों के लिए बड़ी कामयाबी है, क्योंकि एक तरफ तो वह सबसे लंबे समय तक चकमा देने वाले आतंकियों में से एक था और दूसरी तरफ राज्य के युवाओं को आतंक के अंधे सुरंग में धकेलने में जुटा हुआ था। वह सुरक्षाबलों पर कई घातक हमले कर चुका था। कश्मीर जोन पुलिस की ओर से जारी प्रेस बयान में कहा गया है, ''एजाज रेशी बुरहान वाली से पहले से एक्टिव था। उसके साथ सजाद सोफी को भी उसी ने रिक्रूट किया था। पांपोर एरिया में वह कई सुरक्षाकर्मियों की हत्या कर चुका था।'' पुलिस ने यह भी बताया कि वह युवाओं को आतंकी संगठनों में शामिल होने के लिए तैयार करता था।

जम्मू-कश्मीर पुलिस चीफ दिलबाग सिंह ने बताया कि दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के पांपोर के सांबूरा में रविवार को एनकाउंटर शुरू हुआ था। इस बेहद सफल ऑपरेशन में सुरक्षा कर्मियों ने सबसे लंबे समय से बचते रहे आतंकियों में से एक लश्कर-ए-तैयबा कमांडर को मारकर बड़ी सफलता हासिल की। उसका साथी भी मुठभेड़ में मारा गया। 

डीजीपी ने बताया कि वह 2015 में ओवर ग्राउंड वर्कर के रूप में काम करता था और बुरहान वानी से पहले वह आतंकी संगठन में शामिल हुआ था। डीजीपी ने यह भी कहा कि एजाज खतरनाक आतंकवादी था जिसने सुरक्षाबलों पर घातक हमले किए। EDI पांपोर पर हमले में भी वह शामिल था, जिसमें सीआरपीएफ के 8 जवान शहीद हो गए थे। उसने कादलाबल पांपोर में आर्मी पार्टी पर हमला किया था और तीन सैनिकों को शहीद कर दिया था। वह सुरक्षाबलों पर कई हमलों में हिस्सा लिया था। वह लश्कर का मुख्य रिक्रूटर था। मारे जा चुके लश्कर के आतंकियों तौसीफ खानडे, रफीक डार और आदिल अहमद को भी उसी ने आतंकी संगठन में शामिल किया था। एजाज एक अन्य स्थानीय आतंकवादी सजाद अहमद सोफी के साथ मारा गया,

जिसे उसने ही रिक्रूट किया था और ट्रेनिंग भी दी थी। मारे गए आतंकियों के कब्जे से दो एके 47 राइफल, दो मैगजीन, कुछ राउंड्स आदि बरामद किए गए हैं। डीजीपी ने कहा कि एजाज रेशी का मारा जाना सुरक्षाबलों के लिए बड़ी कामयाबी है और इससे आतंकियों के रिक्रूटमेंट में कमी आएगी। 50 आरआर और सीआरपीएफ की 110 बटालियन यूनिट की तारीफ करते हुए डीजीपी ने बताया कि दक्षिण कश्मीर में आतंकियों की भर्ती में कमी आई है। पिछले 15 दिनों में तीन युवाओं को वापस लाया गया है। इस साल अब तक 24 ऐसे युवाओं को वापस लाया गया है जिन्होंने आतंकवादी संगठनों में शामिल होने के इरादे से घर छोड़ दिया था।