चीन को ओली सरकार ने झटपट दी क्लीन चिट, अधिकारी से मंगवाई माफी, विपक्ष ने खोली पोल

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 काठमांडू  
नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी सरकार ने चीन के सामने सरेंडर कर दिया है। केपी शर्मा ओली की सरकार ने जैसे चीन को नेपाल की धरती पर कब्जे की छूट देकर आंखें मूंद ली हैं। एक बार फिर चीनी कब्जे की रिपोर्ट सामने आई तो नेपाल ने इसे झटपट खारिज करके ड्रगैन को क्लीन चिट दे दी है। यहां तक कि नेपाल के हुम्ला जिले में चीनी घुसपैठ की सच्चाई उजागर करने वाले अधिकारी से माफी मंगवा ली गई है। हालांकि, मुख्य विपक्षी पार्टी नेपाली कांग्रेस ने ओली सरकार की पोल खोलते हुए कहा है कि जांच रिपोर्ट का इंतजार किए बिना विदेश मंत्रालय ने चीन को निर्दोष बता दिया है।

शुक्रवार को नेपाल के विदेश मंत्रालय ने कहा कि आधिकारिक रिकॉर्ड, जमीन पर निरीक्षण और सीमा नक्शे के आधार पर नेपाल के सर्वे डिपार्टमेंट ने पुष्टि की है कि चीन के द्वारा बनाई गईं इमारतें नेपाली धरती पर नहीं हैं। इससे पहले नेपाली मीडिया ने हुम्ला जिले के नामखा रूरल म्यूनिसिपैलिटी के अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट दी थी कि  चीन ने नेपाली जमीन पर कब्जा करते हुए 11 इमारतों का निर्माण कर लिया है। 

नेपाली न्यूज वेबसाइट द हिमालयन टाइम्स की एक खबर के मुताबिक नेपाली कांग्रेस के प्रवक्ता बिश्व प्रकाश शर्मा ने कहा है कि विदेश मंत्रालय ने काफी जल्दबाजी में प्रतिक्रिया दी है और चीनी कब्जे को खारिज कर दिया है। सरकार ने विवादित स्थल पर गए अधिकारियों की रिपोर्ट मिलने से पहले ही चीन को क्लीन चिट दे दी है। उन्होंने कहा कि नेपाली कांग्रेस के सेंट्रल कमिटी के सदस्य और संसदीय बोर्ड के नेता जीवन बहादुर शाही इस मामले पर अधिक जानकारी के लिए हुम्ला गए हैं। 

शर्मा ने कहा कि यदि मौके पर गई टीम यह पाती है कि चीन ने नेपाल की धरती पर कब्जा किया है तो सरकार को कड़ी आपत्ति जाहिर करनी चाहिए और कूटनीतिक चैनल के जरिए इस मामले का समाधान निकाला जाए। नामखा रूरल म्यूनिसिपैलिटी के अध्यक्ष बिष्णु बहादुर लामा ने कहा कि स्थानीय अधिकारियों ने इलाके का दौरा किया है। हमें पिलर नंबर 11 मिल गया है और अब यह पता लगाना आसान होगा कि चीन ने नेपाल की धरती पर निर्माण किया है या नहीं। स्थानीय लोगों ने बताया कि वे पहले वहां अपने मवेशियों को चराने ले जाते थे लेकिन अब ऐसा नहीं है। 

नेपाली कांग्रेस के नेता जीवन बहादुर शाही ने द हिमालयन टाइम्स को फोन पर बताया कि विदेश मंत्रालय ने जल्दबादी में चीनी कब्जे को खारिज करके गलती की है। उन्होंने कहा कि 2010 में नेपाल ने लाप्चा लिमी के उत्तर में 3 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई थी, जहां चीन ने अब इमारतों का निर्माण किया है। उस समय चीन कोई आपत्ति जाहिर नहीं की थी इसका मतलब है कि उन्होंने यहां हमारी संप्रभुता स्वीकार की थी। स्थानीय लोग यहां मवेशियों को चराते रहे हैं। 

अधिकारी ने मांगी माफी
नेपाल के गृह मंत्रालय की ओर से स्पष्टीकरण मांगे जाने के बाद हुम्ला सहायक मुख्य जिला अधिकारी दत्तराज हमाल ने चीनी अतिक्रमण को लेकर अपने बयान पर माफी मांग ली है। गुरुवार दोपहर गृह विभाग ने उन्हें नोटिस देकर 24 घंटे में स्पष्टीकरण देने को कहा था। इसके जवाब में अधिकारी ने कहा कि स्थानीय लोगों ने जो कहा था, उस पर विश्वास करते हुए उन्होंने एक गलती की थी। गृह मंत्रालय के प्रवक्ता चक्र बहादुर बुधा ने कहा कि हमाल से स्पष्टीकरण मांगा गया क्योंकि उनकी टिप्पणी से दोनों देशों के संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा। उन्होंने कहा, "हमें ऐसे गंभीर और संवेदनशील मुद्दे पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है। हुम्ला की ऑन-साइट रिपोर्ट की भी जांच की जा रही है।''  

पहले भी चीनी कब्जे को किया नजरअंदाज
भारत के साथ बेवजह सीमा विवाद पैदा कर रही नेपाल की ओली सरकार चीनी अतिक्रमण और घुसपैठ को लगातार नजरअंदाज कर रही है। इससे पहले गोरखा जिले के रुई गांव में चीनी कब्जे को भी नेपाल की सरकार ने खारिज कर दिया था, जबकि इस गांव को चीन ने अपने कब्जे में ले लिया है। इसके अलावा भी कई अन्य जिलों में चीन धीरे-धीरे पैर पसार रहा है लेकिन नेपाल की सरकार हर बार आंखें मूंद लेती हैं।