चीन की चालबाजी के बीच भारत का बांग्लादेश से संबंधों की मजबूती पर जोर

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नई दिल्ली 
चीन की चालबाजी के बीच भारत और बांग्लादेश के पारस्परिक हितों पर चर्चा और द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ाने को लेकर विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला मंगलवार को ढाका पहुंचे। वहां उनकी अपने समकक्ष अधिकारियों के अलावा कई स्तरों पर वार्ता शुरू हुई है। बातचीत बुधवार को भी जारी रहेगी, इसके बाद आधिकारिक बयान सामने आएगा। श्रृंगला की यात्रा ऐसे वक्त पर हुई है जब बांग्लादेश और चीन के बीच तीस्ता जल परियोजना को लेकर समझौता हो रहा है। चीन बांग्लादेश को एक अरब डॉलर का ऋण देने जा रहा है। विदेश सचिव बनने के बाद से बांग्लादेश के लिए उनका यह दूसरा दौरा है। इसके पहले वे मार्च में बांग्लादेश गए थे। दो दिवसीय दौरे के दौरान श्रृंगला दोनों देशों के बीच मजबूत संबंध को और प्रगाढ़ करने के मुद्दे पर विभिन्न स्तरों पर चर्चा करेंगे। उनकी अपने समकक्ष मसूद बिन मोमेन के अलावा प्रधानमंत्री शेख हसीना, विदेश मंत्री अब्दुल मोमेन से भी मुलाकात होनी है।

बांग्लादेश को एक बिलियन डॉलर दे रहा है चीन
सूत्रों के मुताबिक विदेश सचिव के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के लिए एक मैसेज भी भेजा गया है। सूत्रों ने कहा, श्रृंगला का बांग्लादेश के लिए अचानक दौरा इस ऐलान के बाद हो रहा है जिसमें बताया गया कि तीस्ता नदी परियोजना के लिए चीन से बांग्लादेश को एक बिलियन डॉलर मिल रहा है। नई दिल्ली-ढाका के बीच तीस्ता नदी की जल साझेदारी विवादित मुद्दों में से एक है। यह नदी सिक्किम से शुरू होती है और पश्चिम बंगाल से गुजरती हुई असम में आकर ब्रह्मपुत्र में और बांग्लादेश के जमुना में मिलती है। भारत ने हाल में ही बांग्लादेश के साथ काफी करीबी संबंध होने का जिक्र किया था। उधर चीन नेपाल की तरह अब बांग्लादेश को प्रभावित करने का प्रयास कर रहा है। जिससे भारत और बांग्लादेश के पारंपरिक संबंधों में खलल डाल सके।

चीनी चाल की काट में जुटा भारत
जानकारों का कहना है कि पड़ोस में भारत के लिए चुनौती पेश कर रहे चीन की कोशिश पाकिस्तान के जरिये ओआईसी व इस्लामिक देशों से भी करीबी बढ़ाने पर है। भारत इस रणनीति को भी काउंटर करने में जुट गया है। यूएई भारत के लिए मददगार देश के रूप में उभरा है। ओआईसी में पाकिस्तान की रणनीति यूएई की वजह से ही अब तक विफल रही है। सूत्रों ने कहा चीन की चाल को भारत बखूबी समझ रहा है। इसी रणनीति के तहत भारत ने एक्सटेंडेड नेबरहुड पालिसी पर भी खास जोर दिया है।