चिटफंड कम्पनियों का फजीर्वाड़ा-5 हजार से ज्यादा स्थानीय एजेंटों को हाईकोर्ट से मिली राहत

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ भी उन राज्यों में अछूता नहीं रहा जहां चिटफंड कम्पनियों ने फजीर्वाड़ा कर निवेशकों को चूना लगाया है। कुछ पकड़ में आए तो कुछ अभी भी फरार हैं। लेकिन लूट गए निवेशकों का कुछ नहीं हो पाया। वहींअरबों रुपए के चिटफंड घोटाले में निवेशकों के लिये काम करने वाले प्रदेश के पांच हजार से अधिक एजेंटों को हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट प्रशासन ने प्रदेश के सभी जिला एवं सत्र न्यायालयों को निर्देश दिया है कि इन्हें अभियोजन में सहायक बनाने के लिये आवश्यक राहत दी जाये।
चिटफंड कम्पनियों के एजेंटों ने अपने विरुद्ध दर्ज मामलों से राहत देने के लिये हाईकोर्ट में अपील की थी। राज्य शासन का भी अभिमत था कि एजेंटों से साक्ष्य प्राप्त होने पर चिटफंड कम्पनियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई करने में मदद मिलेगी और उनसे राशि और सम्पत्ति वसूल की जा सकेगी।जिला अदालतों को भेजे गये पत्र में कहा गया है कि अभियोजन पक्ष को मजबूत करने में यदि सहायता मिलती हो तो ऐसे प्रकरणों में एजेंटों को विधि अनुरूप राहत दें। इसी तरह का आदेश गृह विभाग ने भी सभी कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों तथा लोक अभियोजन अधिकारियों को जारी किया है।
ज्ञात हो कि  प्रदेश में 200 से अधिक चिटफंड कम्पनियों ने करीब तीन लाख निवेशकों से 11 अरब रुपये से अधिक रकम जुटाई और अधिकांश कम्पनियों के संचालक फरार हो गये। प्रदेशभर में इनके 5000 से अधिक एजेंट थे, जिसमें स्थानीय युवा शामिल थे। ये निवेशकों से पैसे लेकर कम्पनियों के पास जमा कराते रहे। पुलिस में शिकायत आने पर चिटफंड कम्पनियों के मालिकों के अलावा एजेंटों के खिलाफ भी अपराध दर्ज किया गया था।