घुसपैठ की नाकाम कोशिश को स्वीकारने की हिम्मत नहीं दिखा पाया चीन 

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 बीजिंग  
लद्दाख में एक बार फिर घुसपैठ की कोशिश नाकाम होने के बाद चीन इस बात से साफ तौर पर मुकर गया है कि उसके सैनिकों ने सीमा पार करने की कोशिश की। भारत और चीनी सैनिकों के बीच 29-30 की दरम्यानी रात झड़प की सूचना के बीच चीनी विदेश मंत्रालय ने खुद को पाक साफ बताते हुए कहा है कि चीनी सैनिकों ने सख्ती से लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल का पालन किया है।

चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, चाइनीज विदेश मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि चीनी सीमा सैनिकों ने हमेशा लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल का सख्ती से पालन किया है और कभी सीमा को पार नहीं किया है। चीनी पक्ष ने यह भी कहा है कि जमीनी मुद्दे को लेकर दोनों देशों की सेनाओं की बीच बातचीत चल रही है। 
 
दरअसल, यह चीन की स्ट्रैटिजी का हिस्सा है। एक तरफ चीनी सैनिक सीमा पर आक्रामकता दिखाते हैं तो चीन दुनिया के सामने शांति-शांति का जाप करने लगता है। इससे पहले 15 जून को लद्दाख में भारत-चीन सैनिकों के बीच हिंसक झड़प के बाद भी उसने यही रुख अपनाया था। इस हिंसा में भारत के 20 सैनिक शहीद हो गए। चीनी सैनिक भी हताहत हुए, लेकिन उसने अपनी नाक बचाने के लिए संख्या का खुलासा नहीं किया। बार-बार सवाल पूछे जाने पर चीन ने कहा कि वह संख्या का खुलासा इसलिए नहीं कर रहा है क्योंकि इससे स्थिति और बिगड़ेगी।

भारतीय सेना ने सोमवार को कहा कि भारतीय जवानों ने पैंगोंग सो क्षेत्र में एकतरफा यथास्थिति बदलने के लिए चीन की सेना की ओर से चलाई गई उकसावेपूर्ण सैन्य गतिविधि विफल कर दी। सेना के प्रवक्ता कर्नल अमन आनंद ने बताया कि पीएलए ने पूर्वी लद्दाख गतिरोध पर सैन्य और राजनयिक बातचीत के जरिए बनी पिछली आम सहमति का उल्लंघन किया और 29 और 30 अगस्त की दरम्यानी रात यथास्थिति बदलने की कोशिश की। 

सेना के प्रवक्ता ने कहा, ''भारतीय सैनिकों ने पैंगोंग सो (झील) के दक्षिणी किनारे पर पीएलए की गतिविधि को पहले ही विफल कर दियाश, हमारे पोजिशन मजबूत करने और जमीनी तथ्यों को एकतरफा बदलने के चीनी इरादों को विफल करने के लिए उपाय भी किए।'' उन्होंने कहा कि भारतीय सेना बातचीत के माध्यम से शांति और स्थिरता बनाए रखने को प्रतिबद्ध है, लेकिन साथ ही देश की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने के लिए भी उतनी ही प्रतिबद्ध है।

दोनों देशों के बीच पहली बार गलवान घाटी में 15 जून को एक हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे। चीन ने उसके हताहत हुए सैनिकों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी लेकिन अमेरिका खुफिया रिपोर्ट के अनुसार उसके 35 सैनिक हताहत हुए थे।

भारत और चीन ने पिछले ढाई महीने में कई स्त्तर की सैन्य और राजनयिक बातचीत की है लेकिन पूर्वी लद्दाख मामले पर कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। पूर्वी लद्दाख में तनाव को कम करने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच फोन पर बातचीत के बाद छह जुलाई को दोनों पक्षों की ओर से पीछे हटने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। यह प्रक्रिया मध्य जुलाई से आगे नहीं बढ़ी है।