गांधीजी और स्वच्छता ही सेवा पर वेबिनार

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रायपुर
गांधीजी और स्वच्छता ही सेवा पर पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) और रीजनल आऊटरीच ब्यूरो (आरओबी), रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को दोपहर 12 बजे से 1 बजे तक एक वेबिनार का आयोजन किया गया। वेबिनार को संबोधित करते हुए राजनांदगांव के प्रख्यात लेखक, शिक्षाविद् और इतिहासकार श्री गणेश शंकर शर्मा ने कहा कि गांधीजी केवल एक संज्ञा नहीं हैं, बल्कि एक संपूर्ण जीवन पद्धति हैं। गांधीजी आंतरिक स्वच्छता- सत्य और अहिंसा के साथ ही साथ बाह्य स्वच्छता को भी महत्वपूर्ण मानते थे। श्री शर्मा ने गांधीजी के स्वच्छता के प्रति आग्रह को स्मरण करते हुए बताया कि गांधीजी कहते थे, यदि कोई व्यक्ति स्वच्छ नहीं है तो वह स्वस्थ भी नहीं रह सकता है। शौचालय को अपने ड्रॉइंग रूम की तरह ही साफ रखना चाहिए। गांधीजी का मानना था कि स्वच्छता को अपने आचरण में इस तरह से अपना लेना चाहिए कि वह आदत में बदल जाए।

इस अवसर पर धमतरी के वरिष्ठ पत्रकार, श्री जिआऊल हुसैनी ने कहा कि गांधीजी कोई राजनीतिक विचारक नहीं थे, बल्कि वे वास्तव में सत्य और अहिंसा के पुजारी, सच्चे समाज सुधारक और एक कर्मयोगी थे। वे हर व्यक्ति में एक महात्मा देखना चाहते थे। गांधीजी ने अपने जीवन में सत्य-अहिंसा के साथ ही स्वच्छता को भी एक मूलभूत सिद्धांत के रूप में अपनाया। श्री हुसैनी ने कहा कि गांधीजी के स्वच्छता के प्रति आग्रह को ही सबसे बड़ी जनसेवा मानते हैं।

पत्र सूचना कार्यालय, रायपुर के अपर महानिदेशक श्री सुदर्शन पनतोड़े ने कहा कि जब हम किसी नए शहर या गांव में जाते हैं तो उस शहर-गांव के स्वच्छ वातावरण और हरियाली से ही उस शहर अथवा गांव के बारे में हम धारणा बनाते हैं। इसलिए हमें अपने आस-पास स्वच्छता के साथ ही अपने शहर और गावों को भी स्वच्छ बनाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने वेबिनार में शामिल सभी लोगो का धन्यवाद किया। वेबिनार का संचालन रीजनल आऊरीच ब्यूरो (आरओबी), रायपुर के कार्यालय प्रमुख श्री शैलैष फाये ने किया।