गंगा के कछार और कोसी की धार के साथ बहती है कोसी, सीमांचल और पूर्व बिहार की राजनीति

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भागलपुर
गंगा के कछार और कोसी की धार से प्रभावित पूर्वी बिहार, कोसी और सीमांचल का इलाका प्रदेश में सत्ता की राह तय करता रहा है। गंगा और कोसी की तरह ही इस इलाके की राजनीति का बहाव भी दिशाएं बदलता रहा है। इन इलाकों की पहचान गंगा और कोसी के वरदान व अभिशाप दोनों से जुड़ी है। वैसे ही, यहां के मतदाता कभी दलों को बिहार की सत्ता की चाबी सौंपते हैं तो कभी सत्ता से दूर करते हैं। गंगा के किनारे मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर और कटिहार शहर हैं। भागलपुर का गोपालपुर और बिहपुर विधानसभा क्षेत्र गंगा और कोसी के दोआब में बसे हैं। वहीं सुपौल, अररिया, मधेपुरा, सहरसा, कटिहार और उससे सटे जिले कोसी की धार से प्रभावित हैं। दोनों नदियां इस क्षेत्र की पहचान और ऐतिहासिक धरोहर भी हैं। 2015 के विधानसभा चुनाव में महागठबंधन को 62 में से 51 सीटें यहां मिली थीं। एक सीट भाकपा (माले) के खाते में गयी थी। भाजपा को छोड़ एनडीए में शामिल किसी दल का खाता इस क्षेत्र में नहीं खुला। सीटों के मामले में भाजपा कांग्रेस से नीचे चौथे स्थान पर खिसक गयी थी। जदयू-भाजपा साथ हुए तो 40 सीटें इनके नाम रह गयीं। यानी गठबंधन का स्वरूप बदलते ही 11 सीटों का नुकसान। इस चुनाव में जो तस्वीर सामने है, उसके लिहाज से दोनों गठबंधन खुद को मजबूत करने के लिए जोर लगाएंगे।

भौगोलिक और जातीय समीकरण अलग
पूर्वी बिहार, कोसी और सीमांचल का भौगोलिक और जातीय समीकरण अन्य क्षेत्रों से अलग है। कृषि प्रधान इलाका होने के अलावा इस क्षेत्र की सीमाएं नेपाल, असम, पश्चिम बंगाल और झारखंड से जुड़ी हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में इसका असर भी देखने को मिलता है। जातीय समीकरण देखें तो किशनगंज, अररिया, पूर्णिया और कटिहार में अल्पसंख्यकों की आबादी अधिक है। कहावत है कि ‘रोम पोप का तो मधेपुरा गोप का’। महागठबंधन के लिए इस क्षेत्र का चुनाव किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है।

देश और सूबे की राजनीति में अहम भूमिका
देश और बिहार की राजनीति में क्षेत्र के नेताओं का अहम योगदान रहा है। यहां के कई नेता बिहार के मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, केन्द्रीय मंत्री और सूबे में मंत्री रहे हैं या वर्तमान में हैं। इनमें स्व. भागवत झा आजाद, बीपी मंडल, भोला पासवान शास्त्री, चन्द्रशेखर सिंह, शिवचन्द्र झा, सदानंद सिंह, शरद यादव, विजेन्द्र प्रसाद यादव, शकुनी चौधरी, तसलीमुद्दीन, तारिक अनवर जैसे कई नेता शामिल हैं। मधेपुरा लोकसभा सीट से ही एक बार लालू प्रसाद यादव ने भी जीत दर्ज की थी। हालांकि दो जगह से जीतने के चलते बाद में यहां से इस्तीफा दे दिया था। उपचुनाव में पप्पू यादव ने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था।  

विधानसभा की कुल सीटें -62
2015 का चुनाव परिणाम
जदयू- 25
राजद-15
कांग्रेस-11
भाजपा-10
सीपीआई (एमएल)-01