क्या बिहार चुनाव में कृषि कानून, LAC और CAA जैसे मुद्दे डालेंगे असर? 

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नई दिल्ली 
बिहार विधानसभा चुनावों में विपक्ष ने राष्ट्रीय मुद्दों पर भाजपा को घेरने की रणनीति तैयार कर रखी है, लेकिन इसके कारगर होने के आसार नहीं हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि स्थानीय विकास के मुद्दे ही निर्णायक साबित होंगे।  हाल में किसानों से संबंधित तीन कानूनों को लेकर कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन हुए हैं तथा कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इसे बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश की है। इसी प्रकार श्रम सुधारों, हाथरस कांड के आलोक में महिला सुरक्षा, बिना तैयारी के लॉकडाउन और एलएसी की स्थिति को लेकर भी कांग्रेस आक्रामक है। बिहार चुनाव प्रचार में भी ये मुद्दे उसकी तरफ से उठाए जाएंगे। लेकिन मतदाताओं पर यह कितना असर डाल पाएंगे, इसमें संदेह है। इसी प्रकार बिहार में मुस्लिम मतदाताओं की खासी संख्या होने के कारण नागरिकता संशोधन कानून का मुद्दा भी उठेगा। यह मद्दा मुस्लिमों को भाजपा के खिलाफ कारगर हो सकता है, लेकिन ऐसा होना स्वभाविक माना जा रहा है। 

सीएसडीएस के संजय कुमार के अनुसार भले ही राजनीतिक दल इन मुद्दों को उठाएं लेकिन चुनाव पर इन मुद्दों का हावी होना मुश्किल है। दरअसल, यह देखा गया है कि राज्य के चुनाव में स्थानीय मुद्दे ही भारी पड़ते हैं। हालांकि कई मुद्दे ऐसे हैं जो केंद्रीय मुद्दे भी हैं और राज्य के भी है। जैसे बेरोजगारी मुद्दा इन चुनावों पर असर डालेगा। यह देशव्यापी मुद्दा है। इसी प्रकार कोरोना प्रबंधन से जुड़े मुद्दे का भी थोड़ा असर हो सकता है, लेकिन कृषि कानून, श्रम सुधार, एलएसी, नागरिकता संशोधन कानून के मुद्दों पर यह चुनाव नहीं लड़ा जा सकता है। स्थानीय विकास से जुड़े मुद्दे ही इस चुनाव में निर्णायक होंगे।