कोरोना वायरस: प्रतिदिन 10 लाख टेस्ट करने के रास्ते पर भारत, जानिए किस तरह हो रही है टेस्टिंग

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 नई दिल्ली 
सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत में गुरुवार को 6 लाख पचास हज़ार टेस्ट हुए। जुलाई के शुरू में ये संख्या अब हो रहे टेस्टों की लगभग आधी थी। भारत में अब हर रोज़ टेस्टों की संख्या बढ़ रही है।  माना जा रहा कि देश प्रतिदिन दस लाख टेस्ट करने के रास्ते पर है और जल्द ही इसे पूरा भी कर लेगा। शुक्रवार को देश भर में कोरोना वायरस मामलों की संख्या 16.9 लाख पहुंच गई जिसमें मरने वालों की संख्या 36,549 थी। इसी के साथ भारत विश्वमें  कोरोना वायरस से लड़ने के मामले में तीसरे नंबर पर आ गया है। पहले नंबर पर अमेरिका है जहां कोरोना से 1 लाख 55 हज़ार मौते हुई हैं औ दूसरे नंबर पर है ब्राज़ील जहां कोरोना वायरस से 91 हज़ार मौते हुई हैं। 
भारत लगभग 1.9 करोड़ टेस्ट करने के करीब पहुंच चुका है लेकिन नए मामलों का पता लगाकर उन्हें ठीक करने की प्रक्रिया में टेस्टों की गति बढ़ाने की ज़रूरत होगी। 30 जुलाई को भारत का प्रति दस लाख परीक्षण लगभग 14,129 है, जो एक जुलाई को होने वाले  6,794 के आंकड़े से सुधरा हुआ है लेकिन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी के होने के बाद भी दुनिया में सबसे कम है। 1.9 करोड़ हुए टेस्ट भारत की जनसंख्या का केवल 1.5 प्रतिशत हिस्सा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने शुक्रवार को कोविड -19 को लेकर मंत्रियों की एक बैठक की। टेस्टों की संख्या को बढ़ाने पर भी इस बैठक में बात की गई। जिसमें उन्होंने कहा “किए जाने वाले उपायों में कंटेंमेंट ज़ोन्स में चल रहे प्रबंधन की रणनीति को कड़े नियंत्रण के साथ सुधारा जाएगा, बड़े स्तर पर रैपिड एंटीज़न टेस्ट होंगे और डोर टू डोर जाया जाएगा"

एंटीज़न टेस्टों से हो रहा है फायदा
स्वास्थ्य मंत्री ने एंटीज़न टेस्टों को इंडिया डिज़िज़ सर्विलेंस के प्रयासो का हिस्सा बताया। एंटीज़न टेस्ट में 30 मिनट का समय लगता है और इसमें खर्चा भी बहुत कम आता है। इस टेस्ट के रिज़ल्ट आने में ज़्यादा से ज़्यादा एक दिन का समय लगता है। एंटीज़न टेस्ट को बड़े पैमाने पर विश्वसनीय के टेस्ट के रूप में देखा जा रहा है। 
देश में पैदा हो रहे नए हॉटस्पॉट आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के लिए ये रणनीति महत्वपूर्ण साबित होगी। अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, सिक्किम, तेलंगाना, गुजरात, यूपी और केरल उन राज्यों में शामिल हैं जिन्होंने साप्ताहिक टोस्टों की संख्या में सबसे बड़ा सुधार दर्ज किया है।  अरुणाचल की संख्या में 622% की बढ़ोतरी हुई जबकि यूपी में संख्या 257%  बढ़ी। दूसरी ओर बिहार, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और कर्नाटक में दैनिक टेस्टों में बढ़ोतरी की रफ्तार धीमी दर्ज हुई।
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के आंकड़ों से पता चलता है कि ये बढ़ोतरी एंटीज़ टेस्ट के कारण हुई। जिन्हें 14 जून को लागू किया गया था और अब ये होने वाले सभी टेस्टों का 10 प्रतिशत हिस्सा हैं। पिछले एक मीहने में एंटीज़न टेस्टों ने भारत में प्रतिदिन होने वाली टेस्टों की संख्या को लगभग 25 प्रतिशत बढ़ाया है।  RRT-PCR टेस्ट के अलावा एंटीज़न टेस्ट ही एकमात्र दूसरा विकल्प है जिसे कोरोना से लड़ने के लिए महत्वपूर्ण हथियार समझा जा रहा है। एंटीजन एक प्रोटीन होता है जो एक बीमारी के खिलाफ एंटीबॉडी के उत्पादन के रूप में शरीर में प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को प्रेरित करता है और एंटीजन-आधारित परीक्षण के माध्यम से संक्रमण की वर्तमान स्थिति का पता लगाता है। इस तरह के टेस्टों को दिल्ली में बदलाव के रूप में देखा गया है वो लोग जो कोरोना पॉज़ीटिव पाए जाते हैं उनमें  टेस्टों की सकारात्मकता दर उनका अनुपात – एक महीने पहले 37% से गिरकर लगभग 6% हो गया। सकारात्मकता दर में परिवर्तन यह संकेत दे सकता है कि कोई शहर या राज्य अपने सभी मामलों की पहचान करने में सक्षम है या नहीं। लेकिन एंटीज़न टेस्टों के मामले में आईसीएमआर का कहना है कि नकारात्मक मामलों की पुष्टि rRT-PCR टेस्ट के ज़रिए ही की जाती है ताकि झूठे आने वाले नकारात्मक नतीजों को नियंत्रित किया जा सके। 

RRT-PCR टेस्ट कितने बेहतर 
वायरोलॉजिस्ट और माइक्रोबायोलॉजिस्ट कहते हैं कि बड़े पैमाने पर की जाने वाली टेस्टिंग संक्रमण को फैलने से रोकने का सबसे बढ़िया उपाय है बड़े पैमाने पर टेस्टिंग।  क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज के वायरोलॉजी विभाग के पूर्व प्रमुख जैकब जॉन ने कहा, "ज़्यादा से ज़्यदा टेस्ट करके संक्रमित व्यक्ति की पहचान कर के अगर उसे अलग-थलग कर दिया जाता है तो समुदाय में फैल रहे संक्रमण से छुटकारा पाया जा सकता है"