कोरोना वायरस पर पीएम मोदी की मुख्यमंत्रियों संग बैठक, बोले- जांच, ट्रेसिंग, इलाज पर केंद्रित करें ध्यान

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नई दिल्ली
वैश्विक महामारी कोरोना वायरस को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को हाई लेवल मीटिंग की। उन्होंने महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक समेत सात राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों एवं स्वास्थ्य मंत्रियों के साथ बातचीत की। इस बैठक में उन राज्यों को शामिल किया गया है, जो कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। बैठक में पीएम मोदी ने जांच, ट्रेसिंग, इलाज पर ध्यान केंद्रित करने को कहा। कोरोना वायरस के तकरीबन 63 फीसदी सक्रिय मामले इन सात राज्यों में हैं। इस बैठक में दिल्ली के अरविंद केजरीवाल, महाराष्ट्र के उद्धव ठाकरे, आंध्र प्रदेश के जगन मोहन रेड्डी, कर्नाटक के येदियुरप्पा समेत अन्य मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री शामिल हुए। वर्चुअल मीटिंग में गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी शामिल रहे।

कोरोना वायरस की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने मुख्यमंत्रियों से कहा कि हमें प्रभावशाली जांच, ट्रेसिंग, इलाज, निगरानी और स्पष्ट संदेश पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए। उन्होंने कहा, ''कोविड-19 से लड़ते हुए हमें आर्थिक मोर्चे पर भी पूरी ताकत से आगे बढ़ना होगा'' इसके अलावा, पीएम ने बताया कि अब मुख्यमंत्री राज्य आपदा राहत कोष का इस्तेमाल कोरोना के लिए 35 फीसदी की बजाय 50 फीसदी कर सकते हैं। देश में कोरोना के कुल पुष्ट मामलों का तकरीबन 65 फीसदी और कुल मृत्यु के 77 फीसदी मामले भी इन्हीं राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से हैं। पंजाब, दिल्ली और अन्य पांच राज्यों में हाल ही में कुल मामलों की संख्या में काफी तेज वृद्धि दर्ज की गई है। महाराष्ट्र, पंजाब और दिल्ली में मृतकों की संख्या भी काफी बढ़ी है। इन राज्यों में मृत्यु दर दो प्रतिशत से अधिक है जो कि मृत्यु दर का उच्च औसत है।

'बुनियादी सुविधाओं को बढ़ाने में मदद कर रही केंद्र सरकार'
बैठक को लेकर मंगलवार को जारी बयान में कहा गया था कि केंद्र सरकार राज्यों और संघ शासित प्रदेशों के प्रभावी सहयोग और निकट समन्वय के साथ मिलकर कोविड-19 महामारी के खिलाफ लड़ाई का नेतृत्व कर रही है। केंद्र सरकार उनकी स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा बुनियादी सुविधाओं को बढ़ाने के लिए लगातार सहायता कर रही है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा एम्स नई दिल्ली के सहयोग से किए गए ई-आईसीयू टेली-परामर्श के माध्यम से आईसीयू का संचालन करने वाले डॉक्टरों की नैदानिक प्रबंधन क्षमताओं को काफी हद तक बेहतर किया गया है।