कोटा में बड़े आंदोलन की हुंकार, प्रदेश की 247 मंडियों को बंद रखने का फैसला

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कोटा
राजस्थान के कोटा शहर में गुरुवार को केंद्र सरकार के खिलाफ किसान महापंचायत ने बिगुल फूंकने को लेकर फैसला लिया। साथ ही राजस्थान प्रदेश में किसान जागरण यात्रा 2020 के तहत किसानों की विभिन्न समस्याओं का समाधान चाहने के लिए बड़े आंदोलन की हुंकार भरी है। इसके लिए किसान महापंचायत राजस्थान प्रदेश के राष्ट्रीय अध्यक्ष व वरिष्ठ किसान नेता रामपाल जाट ने आज कोटा भामाशाह मंडी में कोटा संभाग के कोटा,बूंदी, बारां, झालावाड़ जिलों से आए किसान प्रतिनिधियों की कोरोना गाइडलाइन की पालना करते हुए आंदोलन की रूपरेखा बनाने के लिए बैठक ली।

जिला कलेक्टर और तहसीलदार को दिया जाएगा ज्ञापन
महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष जाट ने बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि 20 सितंबर को किसान अपना हक मांगने के लिए केंद्र सरकार के खिलाफ संभागीय आयुक्त, जिला कलेक्टर और तहसीलदार को ज्ञापन देंगे। 21 सितंबर को प्रदेश की 247 कृषि उपज मंडियों को बंद रखा जाएगा जिसका जिसका आह्वान रामपाल जाट ने कोटा में ली बैठक के दौरान किया है।

 

वाहनों पर काला झंडा लगाकर निकलेंगे किसान
जाट के मुताबिक इस दौरान जो भी किसान गांव से बाहर निकलेगा वह लोग केंद्र सरकार के विरोध में अपने वाहनों पर काला झंडा लगाकर निकलेंगे। केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए किसान महापंचायत राजस्थान प्रदेश के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने कहा कि केंद्र सरकार ने 'एक राष्ट्र एक बाजार' के तहत अध्यादेश लाई है , जो किसान विरोधी है केंद्र सरकार उस अध्यादेश को वापस लें। केंद्र सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की गारंटी का कानून बनाए साथ ही फसल खराबें पर किसानों को खराबे का मुआवजा दे, इसका भी केंद्र सरकार गारंटी कानून बनाएं। उन्होंने आगे कहा कि 'एक राष्ट्र एक बाजार' के अंतर्गत सरकार जिस अध्यादेश को लेकर आई है वह पूंजी पतियों के हित का है। ऐसे अध्यादेश से किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ेगा। ऐसे में केंद्र सरकार से संघर्ष करने के लिए किसान महापंचायत राजस्थान प्रदेश के बैनर तले करीब 50 किसान संगठनों एकजुट हुए है।

किसानों ने किया समान संघर्ष कार्यक्रम निर्घारित
उन्होंने कहा कि सरकार से संघर्ष करने के लिए किसान संगठनों का एक मंच गठित किया गया है। इसी के तहत किसान संगठन राजस्थान का 'समान संघर्ष कार्यक्रम' निर्धारित किया गया है, जो केंद्र सरकार से लंबी लड़ाई किसान हितों में लड़ेगा। रामपाल जाट ने कहा कि भारत सरकार ने किसानों की सुनिश्चित आय व मूल्य का अधिकार विधेयक 2012 के प्रारूप के आधार पर एक निजी विधेयक को लोकसभा में 8 अगस्त 2014 को सर्वसम्मति के साथ विचारार्थ स्वीकार किया। लेकिन 6 साल बीत जाने के बाद भी सरकार ने इसे पारित करने में सार्थक पहल नहीं की। इसके बदले में सरकार बड़े पूंजी पतियों को कृषि उपजों के व्यापार का एकाधिकार सौंपने, किसानों को उनकी भूमि पर ही मजदूर बनाने संबंधी अध्यादेश लेकर आए हैं। जिससे संपूर्ण देश में किसानों में आक्रोश व्याप्त है।