कृषि संबंधी विधेयकों को कांग्रेस ने बताया धीमा जहर, कहा- किसानों और खेती को कर देंगे खत्म

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नई दिल्ली 
शिरोमणि अकाली दल के एनडीए से बाहर हो जाने के एक दिन बाद रविवार को कांग्रेस ने भाजपा के सहयोगी दलों जद (यू), लोजपा और जजपा को केंद्र का विरोध करने और कृषि विधेयकों का समर्थन नहीं करने की चुनौती दी। इसके साथ ही पार्टी ने आरोप लगाया कि नए कृषि विधेयक कैंसर और धीमे जहर की तरह हैं जो किसानों और खेती को खत्म कर देंगे। एक संयुक्त डिजिटल संवाददाता सम्मेलन में हरियाणा कांग्रेस की प्रमुख कुमारी शैलजा और पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने सभी दलों से एक साथ आने और कृषि विधेयकों का विरोध करने का अनुरोध किया। उन्होंने केंद्र से इन विधेयकों को वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि ये किसानों को 'बड़े कारोबारियों का गुलाम' बना देंगे। कांग्रेस के दोनों नेताओं ने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि वह विधेयकों पर अपनी सहमति न दें क्योंकि किसान उनके खिलाफ सड़कों पर हैं।

शैलजा और जाखड़ ने कहा कि राजग के सहयोगियों को विपक्षी दलों का समर्थन करना चाहिए जिस प्रकार उन्होंने भूमि अधिग्रहण विधेयक के खिलाफ समर्थन किया था तथा भाजपा नीत केंद्र सरकार को उन्हें वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा था। अकाली दल के राजग से बाहर होने पर जाखड़ ने कहा कि पार्टी खुद सत्ताधारी गठबंधन से अलग नहीं हुयी बल्कि किसानों ने उसे ऐसा करने के लिए मजबूर किया। किसानों ने अकालियों के लिए पंजाब में प्रवेश मुश्किल बना दिया। उन्होंने दावा किया, ''अकाली मंत्री ने इस्तीफा नहीं दिया बल्कि भाजपा ने लिया था और अकाली दल ने खुद एनडीए नहीं छोड़ा बल्कि उन्हें बाहर कर दिया गया।'' शैलजा ने हरियाणा में भाजपा के साथ सत्ता में हिस्सेदारी करने वाली पार्टी जजपा को गठबंधन छोड़ने और राज्य में किसानों के साथ खड़े होने की चुनौती दी। उन्होंने जजपा पर निशाना साधते हुए कहा,''जजपा नेताओं ने चुनाव से पहले भाजपा को भलाबुरा कहा और हरियाणा में खंडित जानदेश के बाद, उससे हाथ मिलाया। दुष्यंत चौटाला को अपनी आंखें खोलनी चाहिए और उन्हें किसानों के साथ खड़ा होना चाहिए। जाखड़ ने कहा कि अपने परिवार के लोगों को किसान विरोधी भाजपा का समर्थन करते देख देवी लाल की आत्मा स्वर्ग में दुखी होगी।