किसान बिल के विरोध में आज भारत बंद, सड़कों पर ट्रैक्टर लेकर उतरे तेजस्वी 

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पटना 
संसद में पास हुए तीन कृषि विधेयकों का विरोध अब सड़कों पर जोर पकड़ने लगा है। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) समेत विभिन्न किसान संगठनों ने आज, शुक्रवार 25 सितंबर, को भारत बंद का ऐलान किया है। इस दौरान चक्का जाम किया जाएगा। इसे कई विपक्षी दलों का साथ मिल रहा है। राजद ने कृषि बिल को किसान विरोधी बताते हुए शुक्रवार को राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है।
 
– तेजस्वी यादव कृषि विधेयक के विरोध में आज सड़क पर प्रदर्शन कर रहे हैं। तेजस्वी यादव ने कहा कि सीएम नीतीश कुमार सबको कहते हैं कि ज्ञान नहीं है और खुद को बड़का ज्ञानी समझते हैं, लेकिन हम पूछना चाहते हैं कि क्या उन्होंने कृषि विधेयक को पढ़ा भी है या नहीं। 

– तेजस्वी यादव ने इस दौरान सीएम नीतीश कुमार पर हमला करते हुए कहा कि एक बार फिर से नीतीश जी ने यू टर्न मार लिया है। तेजस्वी ने कहा कि इस बिल ने अन्नदाताओं को तोड़ दिया है। इस बिल की वजह से किसान और गरीब होता जाएगा। इस बिल को हर हाल में सरकार को वापस लेना चाहिए।

– केंद्र सरकार द्वारा लाए गए किसान विरोधी कानून, महंगाई, बेरोजगारी आदि मुद्दों को लेकर बिहार बंद के आह्वान पर जाप कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को गांधी सेतु की ओर जाने वाली सड़क को जदुआ के पास जाम कर प्रदर्शन किया। 

– पटना में यह प्रदर्शन राजद प्रदेश कार्यालय से शुरू होगर आयकर गोलम्बर, डाकबंगला चैराहा होते हुए जिला मुख्यालय में समाप्त होगा। पटना में भी आज सुबह 9 बजे नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव अपने आवास से किसानों और समर्थकों के साथ विरोध प्रदर्शन करते हुए पार्टी कार्यालय जाएंगे। 

– तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि एनडीए सरकार लगातार गरीब और किसान विरोधी फैसले ले रही है। संख्या बल का इतना गुमान है कि बगैर किसानों, उनके संगठनों और राज्य सरकारों से राय-मशवरा किये ही कृषि क्षेत्र का भी निजीकरण, ठेका प्रथा और कॉर्पोरेटीकरण करने को आतुर है। 

– बिहार में कांग्रेस समर्थित सरकार बनी तो किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य गारंटी कानून लाएंगे। यह बात कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला, बिहार प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल और छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव ने कही।  

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि संसद में किसानों के हित की आवाज दबाई जा रही है और सड़क पर किसान पीटे जा रहे हैं। केन्द्र के तीनों कानून में ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य’ यानी एमएसपी की चर्चा तक नहीं है। सरकार कहे कि किसानों को एमएसपी देना अनिवार्य है तथा उससे कम खरीद करने पर सरकार नुकसान की भरपाई करेगी और दोषी को सजा देगी। ऐसा प्रवधान कानून में हो जाए तो हम अपना आंदोलन वापस ले लेंगे।