उपचुनाव: CM शिवराज और मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने संगठन की शक्ति को प्रचंड करने अभियान की कमान संभाली

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ग्वालियर
प्रदेश में सत्ता परिवर्तन से लेकर उपचुनावों के लिए सियासी जमीन तैयार करने की धुरी के रुप में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और सांसद व पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अब नए सिरे से संगठन की शक्ति को प्रचंड करने एवं सूबे में विकास कार्यों के दम पर प्रगति की नई इबारत लिखने के अभियान की कमान संभाल ली है। इनके साथ में केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने इस मुहिम को नए रंग लगा दिए हैं।

भारतीय जनता पार्टी की मध्यप्रदेश में चौथी बार सरकार में वापसी के बाद संगठन और सत्ता की बागडोर संभाल रहे इन दिग्गज नेताओं का ग्वालियर और चंबल संभाग पर खास फोकस बना हुआ है। इसी के चलते अंचल में तीन दिन का विशेष सदस्यता ग्रहण समारोह आयोजित किया जा रहा है। इस दौरान यहां अंचल की चारों लोकसभा सीटों के अंतर्गत आने वालीं 27 विधानसभा सीटों पर गेम चेंजर प्लान का आगाज कर दिया है।

खास बात ये है कि इस दौरान पहले ही दिन में केवल ग्वालियर और शिवपुरी जिले के 20 हजार कांग्रेसियों को भाजपा की सदस्यता दिलावाई जा चुकी है। यह सिलसिला अभी दो दिन और जारी रहने वाला है। सूत्रों के मुताबिक अभियान के जरिए भाजपा करीब 50 हजार कांग्रेसियों को अपने पाले में ला सकती है। साथ ही ग्वालियर की प्यास बुझाने के लिए लंबे समय से अधर में अटके चंबल का पानी लाने के प्रोजेक्ट को जल्द पूरा करने और शहर में बदहाल ट्रेफिक एवं पार्किंग व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए स्वर्ण रेखा नदी पर एलीवेटेड रोड बनाए जाने की महत्वाकांक्षी योजना पर शीघ्र काम शुरु करने का ऐलान सीएम शिवराज सिंह ने भरे मंच से कर दिया है।

गौरतलब है कि प्रदेश की राजनीति में आए भूचाल के बाद करीब पांच महीने पहले भोपाल में घटे सनसनीखेज घटनाक्रम के चलते महज 15 महीने के भीतर सूबे की कांग्रेस सरकार पलट गई थी। खास बात ये है कि बीते विधानसभा चुनाव में जिस ग्वालियर-चंबल संभाग से कांग्रेस को 15 साल बाद प्रदेश में सत्ता की चाबी मिली, वहीं के बदले राजनैतिक समीकरणों ने उसे सत्ता से बाहर कर दिया। करीब सवा साल के दरम्यान यह लगातार दूसरा मौका था जब ग्वालियर-चंबल की सियासत ने राज्य सरकार को बनाने और गिराने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।

बता दें कि 2013 के विधानसभा चुनाव में अंचल की कुल 34 विधानसभा सीटों में से जिस बीजेपी को यहां की जनता ने बंपर 20 सीटों के साथ सत्ता की हैट्रिक बनाने का मौका दिया था, वहीं के लोगों ने 2018 में भाजपा को 7 सीटों पर समेटकर सत्ता की रेस से बाहर कर दिया। वहीं 2013 में अंचल से 12 सीटें हासिल करने वाली कांग्रेस को 2018 में 26 सीटों पर प्रचंड विजय देकर सरकार बनाने का मार्ग प्रशस्त कर दिया। इस बीच प्रदेश की कमलनाथ सरकार के खिलाफ बगावत करने वाले 22 मंत्री-विधायकों में सर्वाधिक 15 ग्वालियर और चंबल संभाग से हैं, जिनके कारण 15 साल के लंबे इंतजार के बाद सत्ता सुख पाने वाली कांग्रेस का राजनैतिक वनवास हो गया।

कांग्रेस के जिन मंत्रियों और विधायकों के बागी तेवरों के चलते प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनने के आसार बने उनमें ग्वालियर और चंबल संभाग में कांग्रेस के कुल 26 एमएलए में से 15 की निर्णायक भूमिका रही है। इनमें प्रद्युम्न सिंह तोमर, इमरती देवी, मुन्नालाल गोयल, महेन्द्र सिसौदिया, रघुराज कंषाना, जसवंत जाटव,  रक्षा संतराम सिरौनिया, ओपीएस भदौरिया, रणवीर जाटव, सुरेश धाकड़, एंदल सिंह कंषाना, गिर्राज दंडौतिया, जजपाल सिंह जज्जी, कमलेश जाटव और बृजेन्द्र यादव शामिल हैं।