इमरान खान के लिए पाकिस्तानी सेना ने कराई थी चुनावों में धांधली

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कराची
पाकिस्तान में पहली बार दो प्रमुख विपक्षी दल देश की शक्तिशाली सेना के खिलाफ खुलकर सामने आए हैं। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) ने आरोप लगाया है कि इमरान खान की तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी को सत्ता में लाने के लिए सेना ने 2018 के चुनावों में धांधली कराई थी। अभी तक पाकिस्तान के राजनीतिक नेता परोक्ष रूप से ही देश के राजनीतिक मामलों में सैन्य प्रतिष्ठान की संलिप्तता की ओर इशारा करते रहे थे। पूर्व प्रधानमंत्री और पीएमएल-एन के प्रमुख नवाज शरीफ जो पिछले साल नवंबर से लंदन में हैं और भ्रष्टाचार के कई मुकदमों का सामना कर रहे हैं, ने पहला हमला 'पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट' की उद्घाटन बैठक को संबोधित करते हुए किया। पिछले महीने इसका गठन विपक्षी पाíटयों ने प्रधानमंत्री खान को सत्ता से बेदखल करने के लिए किया था। शरीफ ने इमरान खान को सत्ता में लाने के लिए सेना पर चुनावों में धांधली करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वर्दी पहनकर राजनीति में हस्तक्षेप देश के संविधान के तहत देशद्रोह के बराबर है। उनके आरोपों से तिलमिलाए इमरान ने कहा कि शरीफ सेना और खुफिया सेवा का अपमान कर बहुत खतरनाक खेल खेल रहे हैं। उन्होंने चुनाव में धांधली के आरोपों को आधारहीन करार देते हुए खारिज कर दिया। बता दें कि शरीफ तीन बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने और हर बार कार्यकाल पूरा नहीं कर सके। पहली बार 1993 में राष्ट्रपति ने उन्हें पदच्युत किया। इसके बाद 1999 में सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ ने उनका तख्ता पलट दिया। तीसरी बार 2017 में अदालत ने भ्रष्टाचार के आरोपों में उन्हें पदच्युत किया। इसके बाद पूर्व क्रिकेटर इमरान खान ने 2018 में सत्ता संभाली।

शरीफ के बाद पीपीपी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने भी शुक्रवार को सेना पर 2018 के चुनावों में धांधली करने का आरोप लगाया। बिलावल ने चेतावनी दी कि आगामी गिलगिट-बाल्टिस्तान के विधानसभा चुनावों में किसी तरह के हस्तक्षेप पर उनकी पार्टी इस्लामाबाद का घेराव और धरना-प्रदर्शन सहित कड़ी प्रतिक्रिया देगी। 'डॉन' अखबार ने बिलावल के हवाले से लिखा, 'इस तरह की चीजें जनरल जिया और जनरल मुशर्रफ की तानाशाही के दौरान भी नहीं देखी गईं। मुझे आश्चर्य हो रहा है कि मतदान केंद्र के भीतर एक सैनिक और बाहर दूसरा सैनिक कैसे तैनात किया जा सकता है। वह बहुत अजीब था। आपने (सैन्य प्रतिष्ठान) कुछ गलत किया हो अथवा नहीं, आप पर आरोप लगेंगे और यह नहीं होना चाहिए। पीपीपी किसी को भी आगामी गिलगिट-बाल्टिस्तान चुनाव में जनादेश की चोरी करने की अनुमति नहीं देगी।' पाकिस्तान ने एक बार स्थगित किए जा चुके गिलगिट-बाल्टिस्तान में विधानसभा चुनाव 15 नवंबर को कराने की घोषणा की है। भारत के कड़े विरोध के बावजूद पाकिस्तान सैन्य कब्जे वाले क्षेत्र की स्थिति बदलने के लिए कदम बढ़ा रहा है। भारत ने पाकिस्तान को साफ संदेश दे दिया है कि गिलगिट-बाल्टिस्तान सहित पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश देश का अभिन्न अंग है। इस बीच, पाकिस्तानी सेना के शीर्ष अधिकारियों ने हाल में राजनीतिक पाíटयों को सलाह दी है कि वे उन्हें राजनीति में घसीटना और उसके खिलाफ आधारहीन आरोप लगाना बंद करें। वहीं, प्रधानमंत्री इमरान खान ने शुक्रवार को कहा कि विपक्ष की सेना के साथ असली समस्या उनका भ्रष्टाचार उजागर होने के बाद अन्य एजेंसियों की तरह खुफिया एजेंसी आइएसआइ पर नियंत्रण नहीं कर पाना है। याद दिला दें कि 20 सितंबर को 11 प्रमुख विपक्षी पाíटयों ने तीन चरण में सरकार विरोधी आंदोलन की कार्ययोजना के तहत पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) का गठन किया था। इसकी शुरुआत राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों से हुई है और जनवरी 2021 में इस्लामाबाद की ओर निर्णायक मार्च निकाला जाएगा।