आवासीय भवनों में 93 फीसदी बिजली खर्च ऊर्जा दक्षता के दायरे में नहीं

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नई दिल्ली 
बिजली के किफायती इस्तेमाल को लेकर ऊर्जा दक्षता के मानक तो हैं लेकिन वह इस्तेमाल होने वाली बिजली के एक छोटे से भाग को ही कवर कर पा रहे हैं। आवासीय भवनों में सिर्फ सात फीसदी बिजली ही ऊर्जा दक्षता उपायों के साथ खर्च होती है। जबकि आवासीय और व्यावसायिक भवनों में आज सबसे ज्यादा करीब चार लाख गीगावाट बिजली सालाना बिना ऊर्जा दक्षता उपायों के खर्च होती है। यह उद्योग जगत या किसी भी क्षेत्र में खर्च होने वाली बिजली से ज्यादा है। सेंटर फार मीडिया स्टीडीज (सीएमएस) एवं बिल्डिंग एनर्जी एफिसिएंसी प्रोजक्ट (बीईईपी) के अध्ययन में यह बात सामने आई है। यह अध्ययन बताता है कि ऊर्जा दक्षता के मानकों को लागू करके घरेलू और आवासीय भवनों में बड़े पैमाने पर बिजली को बचाया जा सकता है। एलईडी के इस्तेमाल से उजाले के लिए प्रयुक्त बिजली की खपत 75 फीसदी कम हुई। इसी प्रकार यदि भवनों में ऊर्जा दक्षता के मानक लागू हो जाएं तो अतिरिक्त 30 फीसदी बिजली बच सकती है। सांख्यिकी मंत्रालय की ऊर्जा स्ट्रैस्टिक्स रिपोर्ट 2020 के अनुसार उद्योग जगत सबसे ज्यादा 42 फीसदी बिजली खर्च करता है। जबकि दूसरे नंबर पर घरेलू क्षेत्र 24 फीसदी बिजली खर्च करता है। व्यावसायिक भवनों में बिजली की खपत आठ फीसदी है। भवन क्षेत्र की कुल खपत 32 फीसदी है। लेकिन भवनों में ऊर्जा दक्षता के मानकों का क्रियान्वयन सबसे कम हुआ है। 

सिर्फ 23 फीसदी बिजली उपयोग में दक्षता
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) के अध्ययन के अनुसार देश में उद्योग क्षेत्र में 38 फीसदी बिजली खपत पर ऊर्जा दक्षता के मानक लागू हुए हैं। जबकि घरेलू बिजली सिर्फ सात फीसदी ऊर्जा दक्ष हो पाई है। व्यावसायिक भवनों में यह प्रतिशत 19 के करीब है। परिवहन में महज दो फीसदी। कुल 23 फीसदी बिजली का उपयोग ही ऊर्जा दक्षता के उपायों के साथ हो रहा है। जबकि 77 फीसदी बिजली के खर्च में ऊर्जा दक्षता नहीं अपनाई जा रही है।

भवनों में ऊर्जा दक्षता की सर्वाधिक कमी
अध्ययन के अनुसार वर्ष 2018-19 के दौरान कुल 1372000 गीगावाट बिजली खर्च हुई। इसमें से 24 फीसदी यानी करीब 329280 गीगावाट आवासों में खर्च हुई। केवल सात फीसदी यानी 23049 गीगावाट ही दक्षता के साथ खर्च हुई और 306231 गीगावाट बिना दक्षता के। इसी प्रकार व्यावसायिक भवनों में 109760 गीगावाट बिजली खर्च हुई जिसमें 19 फीसदी यानी 20854 गीगावाट दक्षता उपायों एवं 88906 गीगावाट बिना दक्षता उपायों के। सभी भवनों में कुल 395137 गीगावाट बिजली बिना दक्षता के खर्च हुई।

उद्योगों में 38 फीसदी दक्षता
उद्योग क्षेत्र में हालांकि बिजली की खपत सबसे ज्यादा 42 फीसदी यानी करीब 576240 गीगावाट हुई। लेकिन वहां खर्च होने वाली 38 फीसदी बिजली ऊर्जा दक्षता के दायरे में है। इस प्रकार उद्योगों में सबसे ज्यादा 218971 गीगावाट बिजली दक्षता उपायों एवं 357269 बिना दक्षता उपायों के साथ खर्च हुई। उद्योगों में बिना दक्षता के बिजली का इस्तेमाल भवन क्षेत्र की तुलना में कम है।

दक्षता बढ़ानी होगी
बिल्डिंग एनर्जी एफिसिएंसी कोड्स में भारत सरकार के प्रतिनिधि सौरभ डिड्डी कहते हैं कि भवनों में ऊर्जा दक्षता मानकों की अपार संभावनाएं हैं। नये व्यावसायिक भवनों के लिए बिल्डिंग कोड लागू किए गए हैं। लेकिन पुराने भवनों एवं आवासों में ऊर्जा दक्ष उपकरणों के इस्तेमाल से बिजली की खपत को कम किया जा सकता है। ब्यूरो आफ एनर्जी एफिसिएंसी ने अब तक घरों में इस्तेमाल होने वाली 26 उपकरणों को ऊर्जा दक्ष बनाया है। इनका इस्तेमाल बढ़ रहा है लेकिन इनमें से सभी के लिए मानक अनिवार्य नहीं हैं। कई बिजली चालित उपकरणों के दक्षता मानक अभी भी नहीं है। घरों, भवनों में इस्तेमाल होने वाले बिजली उपकरणों की सूची सौ से से भी ज्यादा उपकरण आते हैं। इसलिए यह सुनिश्चित करना होगा कि भवनों में इस्तेमाल होने वाले सभी ऊर्जा उपकरण दक्षता मानकों के दायरे में हों, और उन्हें स्वैच्छक नहीं अनिवार्य रूप से लागू किया जाए।

अभियान की जरूरत
ग्रीनटैक नालेज सोल्यूशन के निदेशक डा. समीर मैथेल कहते हैं कि लोगों में ऊर्जा दक्षता को लेकर चेतना बढ़ी है लेकिन जिस प्रकार लोगों ने और सरकार ने एलईडी को लेकर अभियान चलाया, और उसके नतीजे बेहद सार्थक रहे, वैसा अन्य उपकरणों के मामले में नहीं हुआ। दूसरे, कई उपकरण स्टार रेटिंग और बिना स्टार रेटिंग दोनों में भी उपलब्ध हैं। स्टार रेटिंग वाले उपकरण की कीमत ज्यादा होती है। ऐसे में उपभोक्ता कम कीमत के चक्कर में बिना रेटिंग वाले उपकरणों को ले लेता है। जिन उपकरणों के लिए स्टार रेटिंग लागू है, उनमें बिना रेटिंग वाले उपकरणों की बिक्री पर रोक होनी चाहिए। एक अमेरिकी अध्ययन के अनुसार देश में एलईडी वल्बों एवं ट्यूब लाइट के इस्तेमाल से उजाले के लिए खर्च होने वाली बिजली में करीब 75 फीसदी की कमी आई है। भवनों में बिजली की खपत को लेकर भी कई अध्ययन हुए हैं जो बताते हैं कि ऊर्जा दक्ष उपकरणों के इस्तेमाल से करीब 30 फीसदी बिजली खपत कम की जा सकती है। यानी भवनों में 1.20 लाख गीगावाट बिजली बचाए जाने की संभावनाएं मौजूद हैं। यह बिजली एक बिहार और झारखंड जैसे राज्यों के एक साल की जरूरत के बराबर है।