अमेजन और फ्लिपकार्ट की फेस्टिवल सेल में जीएसटी की कर वंचना का संदेह

0
1

रायपुर
केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीथारमन एवं वाण्जिय मंत्री पियूष गोयल को आज भेजे गए एक पत्र में कन्फेडरेशन आॅफ आॅल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने इन कंपनियों द्वारा लगाए जाने वाली आगामी फेस्टिवल सेल में जीएसटी और आयकर से बचने का संदेह जाहिर करते हुए अमेजन और फ्लिपकार्ट की आगामी फेस्टिवल सेल पर प्रतिबंध लगाने या इन सेल पर होने वाली बिक्री पर नजर रखने के लिए एक विशेष कार्य बल के गठन की मांग की है जो यह सुनिश्चित करे कि इन कंपनियों द्वारा की जानी वाली सेल में जीएसटी और आयकर की कोई वंचना न हो।

श्रीमती सीतारमण और गोयल को भेजे पत्र के संदर्भ में कन्फेडरेशन आॅफ आॅल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के प्रदेश अध्यक्ष अमर पारवानी, कार्यकारी अध्यक्ष मंगेलाल मालू, विक्रम सिंहदेव, महामंत्री जितेंद्र दोषी, कार्यकारी महामंत्री परमानंद जैन, कोषाध्यक्ष अजय अग्रवाल, प्रवक्ता राजकुमार राठी ने बताया कि ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट ने 16 अक्टूबर से एक फेस्टिवल सेल आयोजित करने की घोषणा की है वहीं अमेजन अपनी फेस्टिवल सेल  17 अक्टूबर से आयोजित कर रहा है जो सीधे तौर पर सरकार की एफडीआई नीति का पूरी तरह से उल्लंघन है और इससे इन कंपनियों को एक बड़ी राशि पर लगने वाले जीएसटी से बचने का एक और मौका मिलेगा। पारवानी ने इन ई-कॉमर्स कंपनियों की त्यौहार बिक्री की अवधि के दौरान विशेष रूप से बड़ी संख्या में वस्तुओं की बिक्री की ओर ध्यान आकर्षित किया है जहां बड़े डिस्काउंट  देकर वास्तविक कीमत की तुलना में बहुत कम कीमत पर सामान बेचा जाता है। यह डिस्काउंट 10 प्रतिशत  से 80 प्रतिशत  तक होता है जो वस्तु की लागत से काफी कम होती है और यह कंपनियां उस लागत से भी कम मूल्य पर उस वस्तु को बेचती हैं और उसी कीमत पर जीएसटी लगाती है जबकि है सामान्य स्थिति में उक्त वस्तु के वास्तविक बाजार मूल्य पर जीएसटी वसूला जाता है और इसके कारण सरकार को जीएसटी राजस्व का बड़ा नुकसान होता है। इसी तरह आनुपातिक रूप से अगर माल की वास्तविक कीमत पर जीएसटी वसूला जाए तो सरकार को आयकर भी अधिक मिलेगा।

पारवानी ने कहा कि यह एक खुला तथ्य है कि इन ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा दी जाने वाली गहरी छूट की भरपाई उनके निवेशक करते हैं और वास्तविक रूप से  इन कंपनियों को कोई नुक्सान नहीं होता बल्कि नुक्सान तो सरकार को राजस्व का होता है। जीएसटी में स्पष्ट प्रावधान है की वास्तविक बाजार मूल्य पर ही जीएसटी लिया जाएगा लेकिन इन ई-कॉमर्स कंपनियों के खुले हेरफेर के कारण सरकार को उसके उचित राजस्व से वंचित किया जाता है। यह बहुत ही आश्चर्यजनक है कि ये कंपनियाँ पिछले कई वर्षों से घाटे में चल रही हैं लेकिन फिर भी वे अपने व्यवसाय संचालन और अनेक प्रकार की फेस्टिवल सेल वर्ष भर आयोजित करती हैं। क्या घाटे में चल रही कंपनियों के लिए साल में बार-बार बिक्री करना संभव है, यह एक ऐसा सवाल है जिसके जवाब की खोज होनी जरूरी है।

कैट ने आग्रह किया है कि या तो इन कंपनियों द्वारा आयोजित त्यौहार की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए या सरकार को बिक्री पर नजर रखने और जीएसटी के अंतर्गत सही राजस्व प्राप्त करने के लिए विशेष कार्य बल की नियुक्ति करनी चाहिए जो यह देखे की जीएसटी वस्तु के मूल मूल्य पर लगे ना की डिस्काउंट की हुई कीमत पर। जबकि ये कंपनियां ष्छूटष् की आड़ में शिकारी मूल्य पर जीएसटी वसूल रही हैं। पारवानी ने कहा कि यह विडंबना है कि यदि कोई व्यापारी अपने व्यवसाय के दौरान थोड़ी सी भी गलती करता है, तो उसे कई दंड और यहां तक उसके खिलाफ मुकदमा भी चलाया जाता है। हालाँकि ये ई कॉमर्स कंपनियां जो केवल बिजनेस टू बिजनेस (बी 2 बी) गतिविधियों को करने के लिए अधिकृत हैं सरकार की नाक के ठीक नीचे बिजनेस टू कंज्यूमर्स (बी 2 सी) की बिक्री कर रही हैं और उनके खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। यह एफडीआई नीति का स्पष्ट उल्लंघन है। कैट ने यह स्पष्ट किया कि व्यापारी ई-कॉमर्स व्यवसाय के खिलाफ नहीं हैं और यह मानते हुए कि ई-कॉमर्स देश में व्यापार करने का भविष्य का तरीका है और किसी भी स्पर्धा से नहीं डरता है लेकिन इसके लिए देश में सामान स्तर का प्रतिस्पर्धी वातावरण होना जरूरी है।