अब ग्वालियर-रीवा महापौर को ‘कारण बताओ’ नोटिस, बढ़ सकती है मुश्किलें

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भोपाल
छिंदवाड़ा महापौर के बाद ग्वालियर और रीवा महापौर पर अपने काम में अनियमितता बरतने का आरोप लगा है। इसी के चलते राज्य सरकार ने दोनों महापौरों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। जहां  ग्वालियर नगर निगम नियमों के विपरीत दैनिक वेतन भोगियों को स्थाई करने और मेयर इन काउंसिल की बैठक में अनियमितताओं को लेकर महापौर को नोटिस दिया गया है, वही रीवा महापौर को भी नगर निगम के टेंडरों में गड़बड़ी और मेयर इन काउंसिल की बैठक में अनियमितताओं को लेकर कारण बताओ नोटिस दिया गया है।ऐसे में अब महापौर का पद बचाये रखना ग्वालियर और रीवा महापौर के लिये बड़ी चुनौती बन गया है।

दरअसल, राज्य सरकार ने ग्वालियर नगर निगम में हुई गड़बड़ियों के लिए महापौर विवेक शेजवलकर को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। ग्वालियर नगर निगम नियमों के विपरीत दैनिक वेतन भोगियों को स्थाई करने और मेयर इन काउंसिल की बैठक में अनियमितताओं को लेकर महापौर को नोटिस दिया गया है । छिंदवाड़ा महापौर की तरह वे कोर्ट में न चले जाएं, इसलिए शासन ने कैवियट भी लगा दी है। ग्वालियर निगम आयुक्त को भी नोटिस जारी हुआ है। वही रीवा महापौर को भी नगर निगम के टेंडरों में गड़बड़ी और मेयर इन काउंसिल की बैठक में अनियमितताओं को लेकर कारण बताओ नोटिस दिया गया है।

बताते चले कि दोनों नगर निगम में भाजपा के महापौर हैं। महापौर को जो नोटिस दिया गया है, उसके तहत उनसे निगम को हुई आर्थिक क्षति की वसूली हो सकती है और उन्हें पद से भी हटाया जा सकता है।इसके पहले छिंदवाड़ा महापौर को नोटिस दिया गया था हालांकि वे कोर्ट चली गई थी और उन्हें राहत मिल गई।अब वे अपनी पद पर बनी रहेंगीं।

बता दे कि प्रदेश में कांग्रेस सरकार आने के बाद नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने 21 दिसंबर को ग्वालियर, रीवा और छिंदवाड़ा नगर निगमों की जांच के आदेश दिए थे। नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय की तीन टीमों ने अलग-अलग निगमों की जांच की। जांच में तीनों नगर निगमों में लाखों के घोटाले और अनियमितताएं उजागर हुई। अधिकतर मामलों में इन गड़बड़ियों के लिए महापौर और आयुक्त को जिम्मेदार बताया गया।इसी के चलते तीनों को नोटिस जारी किया गया है। हालांकि छिंदवाड़ा महापौर को कोर्ट से राहत मिल गई है, जबकी रीवा और ग्वालियर महापौर की मुश्किलें अब भी बढ़ी हुई है।

इससे पहले राज्य सरकार ने काम में अनियमितता बरतने पर छिंदवाड़ा महापौर को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इस पर वे हाईकोर्ट चली गई। वहां से उन्हें राहत मिल गई और कारण बताओ नोटिस को खारिज कर दिया गया। वही इस मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार भी लगाई थी।

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