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उत्तरप्रदेश के खनन माफियाओं की मोहकमगढ़ में पौ-बारह

मोहकमगढ़ में सक्रिय हैं खनिज के लुटेरे

रात-दिन हो रहा उत्खनन, प्रशासन मौन

rajesh dwivedi
सतना, उत्तरप्रदेश-मध्यप्रदेश की सीमा पर बसे चित्रकूट क्षेत्र में एक बार पुन: खनन माफियाओं ने अपनी नजरें गड़ा ली हैं। हालात ये हैं कि उत्तरप्रदेश के भू-माफिया चित्रकूट के आसपास अवैध उत्खनन कर रहे हैं और प्रशासन चुप्पी साधे बैठा है। ऐसा ही एक मामला चित्रकूट के मोहकमगढ़ का सामने आया है, जहां रात-दिन भारी मशीनों के पंजे धरती की सीना खोद कर बेशकीमती खनिज पार कर रहे हैं। बताया जाता है कि यहां उत्तरप्रदेश के कुछ खनिज माफिया अधाधुंध खनिज उत्खनन कर रहे हैं।

क्या है मामला
धर्मनगरी चित्रकूट से सटे मोहकमगढ़ में इन दिनों अवैध उत्खनन किया जा रहा है। बताया जाता है कि यहां भारी मात्रा में श्रमिकों को लगाकर भारी मशीनों के जरिये न केवल पहाड़ का सीना खोदा जा रहा है, बल्कि इन्हीं उत्खननकारियों द्वारा मंदाकिनी नदी के किनारों से रेत भी ले जायी जा रही है। यहां होने वाले उत्खनन से मोहकमगढ़ के वाशिन्दे बेहद परेशान हैं। दिन-रात उत्खनन होने से मोहकमगढ़ धूल और धुंध के गुबार में समा रहा है। बताया जाता है कि यहां धरती से निकलने वाले पत्थर को न केवल निकाला जाता है बल्कि यहीं इसकी तुड़ाई किये जाने से भारी मात्रा में वायु प्रदूषण होता है। उत्खननकारी यहीं पत्थर निकालते हैं और उसे यहीं गिट्टी व छोटे पत्थर में तब्दील कर यहां की आवोहवा में जहर घोला जा रहा है। बताया जाता है कि शिवरामपुर निवासी राजा सिंह समेत कई छोटे-बड़े उत्खननकारी मोहकमगढ़ में अवैध उत्खनन कर रहे हैं जिनको लेकर प्रशासन उदासीनता बरत रहा है।

किराए पर रहकर कर रहे उत्खनन
दिलचस्प बात यह है कि मप्र में मिल रही अवैध उत्खनन की सुविधा ने उप्र के खनिज माफियाओं को यहां काम करने के लिए प्रेरित किया है । बताया जाताहै कि राजापुर पहाड़ी निवासी राजा सिंह इन दिनों सिरसावन में आवास किराए पर लेकर जहां अवैध उत्खनन कर रहा है वहीं उप्र के सुरेंद्र सिंह पटेल का नाम भी अवैध उत्खनन में ग्रामीण लेकर कर रहे हैं।

सड़कें भी चौपट
मोहकमगढ़ वैसे भी संसाधनों से रहित गांव है जहां सरकारें बुनियादी सुविधायें नहीं विकसित कर पायी हैं। ऊपर से अवैध उत्खनन कोढ़ में खाज साबित हो रहा है। बताया जाता है कि यहां दिन-रात खनिज का अवैध परिवहन करने वाले वाहनों की धमाचौकड़ी के कारण यहां की सड़कें बेदम हो चुकी हैं। भारी मात्रा में अवैध परिवहन होने से सड़कें टूट गयी हैं। जहां से पैदल गुजरना भी ग्रामीणों के लिये मुश्किल बना रहता है। सूत्रों की माने तो शाम ढलते ही यहां भारी वाहन अवैध रूप से खोदे गये खनिज का परिवहन करने में जुट जाते हैं जिससे सड़कें क्षतिग्रस्त हो गयी हैं। ग्रामीणों ने प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराते हुये मोहकमगढ़ में चल रहे अवैध उत्खनन रोकने की मांग की है।

यूं होती है निगरानी
बेशक मोहकम गढ़ गरीबी से जूझता गांव हो लेकिन यहां इन दिनों लग्जरी कारों को फर्राटे मारते देखा जा सकता है। बताया जाता है कि उत्खननकारी के गुर्गे यहां गांव के बाहर लग्जरी कारों में पहरा देते हैं और प्रशासनिक अमले की आहट पाते ही मजदूरों को सतर्क कर देते हैं। हालांकि प्रशासनिक अमलापहले से ही फिट रहता है लेकिन यदि कोई गाहे-बगाहे पहुंच भी गया तो निगरानी करने वाले गुर्गे सचेत कर देते हैं।

पुलिस भी काटती है चांदी
मोहकमगढ़ के अवैध उत्खनन पर पुलिस की भूमिका भी संदिग्ध नजर आती है। बताया जाता है कि यहां से निकलने वाले खनिज से लदे वाहनों पर पुलिस कभी कार्रवाई नहीं करती। जिससे पुलिस की भूमिका पर भी प्रश्नचिन्ह खड़ा होता है। ग्रामीणों की माने तो पुलिस को खनन माफियाओं ने मासिक दर पर सेट कर रखा है जिसके चलते पुलिस खनिज लदे वाहनों को नजरअंदाज कर देती है।

ajay dwivedi
the authorajay dwivedi