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फिर बाजार में आई प्लास्टर आॅफ पेरिस से बनी मूर्तियां

Then the market came statues PC

शनिवार होगी मां की घटस्थापना

Then the market came statues PCgajraj singh meena

ब्यावरा। शारदीय नवरात्रि पर्व को लेकर जिले सहित क्षेत्र की दुर्गा समितियां शहर और गांव-गांव में अपने पांडाल सजाने व उत्सव को चार चांद लगाने के लिए रात दिन एक कर रहे हैं। आने वाले एक अक्टूबर को माता रानी की मूर्ति व घट स्थापना की जाएगी, जिसको लेकर तैयारियां जोरों पर चल रही है। शहर के मूर्तिकारों की कला और सुंदरता की जितनी तारीफ की जाए वह कम है, क्योंकि शहर के कलाकारों द्वारा निर्माण की हुई मां दुर्गा, गणेष तथा लक्ष्मी जी आदि की प्रतिमाओं की मांग केवल शहर व जिले तक ही सीमित न रहकर दूर दूर तक है, लेकिन प्लास्टर आॅफ पेरिस से बनने वाली प्रतिमाओं की ओर प्रतिबंध के बावजूद आदेष का पालन व्यवहारिक धरातल पर हो रहा है या नहीं इसके बारे में अधिकारियों को रत्ती मात्र भी चिंता नहीं है। इसका नजारा पिछले दिनों गणेषोत्सव पर्व के दौरान देखने को मिला। जिले के अधिकारी बार-बार शासन अथवा न्यायालयीन आदेष व्यवस्था के नाम पर दे तो देते हैं, लेकिन उसका पालन कराने में बिलकुल फिसड्डी साबित हो रहे है। ग्रीन टिब्यूनल के निर्देष के आधार पर प्लास्टर आॅफ पेरिस की प्रतिमाओं को लेकर कलेक्टर तरूण कुमार पिथौड़े ने गणेषोत्सव पर्व से पहले प्लास्टर आॅफ पेरिस से बनने वाली प्रतिमाओं पर प्रतिबंध लगाते हुए हर वर्ष की तरह निर्माण पर रोक लगाने के निर्देष जारी किए गए थे। कलेक्टर के निर्देष के बावजूद आज तक जिन स्थानों पर मूर्तियों का निर्माण किया जा रहा है या जिन स्थानों पर ऐसी मूर्तियों का विक्रय किया जा रहा है, वहां कोई भी अधिकारी या पुलिस का दल तक नहीं पहुंचा है। मखौल उड़ाते हुए मूर्तिकार खुलेआम पीओपी की मूर्तियां बनाकर पहले गणेषोत्सव में नजर आए और अब माता रानी की प्रतिमाएं बनवाकर उन्हें बाहर भेजने और बाहर से लाने का काम पहले की तरह ही खुलेआम किया जा रहा है। हास्यास्पद बात तो यह है कि हर बार प्रषासन दल बनाकर ग्रीन टिब्यूनल के निर्देषों का पालन कराने के लिए धारा 144 लागू कर एसडीएम व तहसीलदार का दल बनाकर मूर्ती निर्माण स्थल पर भेजता रहा है, किंतु इस बार कार्रवाई तो दूर उन स्थानों पर नजर डालने के लिए ही अधिकारी नहीं पहुंचते हैं। थानों व पुलिस चैकी के आस-पास ही विक्रय, निर्माण होने वाले निर्माण की जानकारी के बावजूद अधिकारी अंजान बनकर मूकदर्षक की तरह उन्हें खुली छूट दे रहे हैं। धारा 188 के तहत अभी तक किसी मूर्तिकार पर कार्रवाई नहीं की गई और न ही मूर्तियां जब्त कर मूर्तिकारों से मिट्टी की मूर्ति बनाने के लिए कहा गया।
नपा काम्पलेक्स, बाजार में फिर आई पीओपी की मां मूर्तियां
सप्ताह भर बाद 01 अक्टूबर को फिर से मूर्तिकार बाजार में जगह जगह सजने वाली दुकानों पर पीओपी की बनी मूर्तियां नजर आएगी, किंतु इन्हें देखकर भी अमला कोई कार्रवाई नहीं करेगा। धर्म के नाम पर अधिकारी दूषित होने वाले पेयजल को बचाने के बजाय उसे दूषित करने में सहभागी बन रहे हैं, जबकि पर्यावरण को बचाने के लिए सुप्रीम कोट ने भी सख्त निर्देष जारी कर दिया है। उसके बाद भी जिला प्रषासन इन विषयों पर मौन साधे हुए हैं, जबकि प्रषासन को चाहिए आमजन में इस बात को लेकर जागरूकता फैलाई जाए, लेकिन यह सब बातें मौखिक और कागजों की दुनिया में ही सिमटती जा रही है।

ajay dwivedi
the authorajay dwivedi