परियोजना वही, विभाग भी वहीं पर मुआवजा अलग-अलग

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Panna-Satna rail line to Poojan 18

ललितपुर-सिंगरौली रेल प्रोजेक्ट: कहीं एकड़ में तो कहीं वर्ग फुट में बंटा मुआवजा

इसे जिले के अन्नदाताओं के साथ अन्याय कहें अथवा प्रशासनिक चूक कि एक ही परियोजना और एक ही विभाग के एक मामले में किसानों को मुआवजे की दर अलग-अलग मापदंडों पर तय की गई है। यह परियोजना है ललितपुर-सिंगरौली रेल परियोजना जिसमें अलग-अलग जिलों में अलग-अलग मापदंडों पर मुआवजा निर्धारित किया जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल के गृहक्षेत्र में जहां वर्गफुट के हिसाब से मुआवजा दिया गया है, वहीं सतना जिले में एकड़ के हिसाब से मुआवजा देने की तैयारी है।

rajesh dwivedi
सतना। सतना जिले का अन्नदाता एक बार पुन: प्रशासनिक धांधली का शिकार बनने जा रहा है। इस मर्तबा जिले के किसानों के साथ सरकार ही धांधली कर रही है। यह धांधली ललितपुर-सिंगरौली रेल परियोजना के दायरे में आ रहे उन किसानों के साथ की जा रही है, जिन किसानों की जमीनें प्रस्तावित रेल लाइन के दायरे में फंस रही है। इस अहम मसले को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल बेशक चुप हों, लेकिन किसानों का गुस्सा धीरे-धीरे चरम पर पहुंच रहा है। प्रभावित किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि मुआवजा निर्धारण में ऐसी ही धांधली बरती गई तो तीव्र आंदोलन कर रेल लाइन के काम को प्रारंभ नहीं करने दिया जाएगा।

Panna-Satna rail line to Poojan 18क्या है मामला
दरअसल रेलवे महत्वाकांक्षी ललितपुर-सिंगरौली रेल परियोजना को पूरा करने में जुटा हुआ है। इस परियोजना के तहत पन्ना-सतना रेल लाइन का निर्माण किया जाना है। यदि रेलवे से प्राप्त जानकारी पर गौर करें तो नागौद क्षेत्र के मढ़ा, खमरेही, इटमा बाघेलान, हरदुआ, अतरौरा, नौँनिया, गंगवरिया, पिपरी, बारापत्थर, सढ़वा, नामतारा, खैरा, बिकरा, भुलनी,रेरूआ खुर्द, बचवई, बरहा समेत दो दर्जन से अधिक गांव प्रभावित हैं। इन गांवों में सरकार ने जिस दर से मुआवजा निर्धारण किया है, उससे किसानों में भारी आक्रोश है। किसानों ने एक बातचीत में कहा कि रेलवे को जमीन देने से उन्हें कोई एतराज नहीं है क्योंकि रेलवे विकास के द्वार भी खोलता है, लेकिन प्रशासन जिस दर पर उनकी जमीनें हड़पना चाहता है, वह उन्हें स्वीकार नहीं है। किसानों का आरोप है कि प्रशासन ने उनके मुआवजा निर्धारण में ऐसी प्रक्रिया अपनाई है, जिससे किसानों को न्यूनतम मुआवजा मिले जबकि नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल के गृहक्षेत्र में वर्गफुट के हिसाब से मुआवजा बांटकर अधिकतम मुआवजा दिया गया है।

क्यों बिफरे किसान
आखिर किसान इस मसले को लेकर आक्रोशित क्यों हैं? जब इस मामले से जुड़े दस्तावेजों को खंगाला गया तो पता चला कि सतना जिले के किसानों को मुआवजे के नाम पर झुनझुना पकड़ाया जा रहा है। दस्तावेज भी इसकी गवाही देते हैं। इस मामले में सीधी जिले के चुरहट तहसील के ग्राम टीकटकला के राजस्व दस्तावेज देखे गए तो पता चला कि टीकटकला निवासी विकास सिंह तनय श्रवण कुमार को 0.26 आरए भूखंड का मुआवजा 6,88,582 रूपए मुआवजा दिया गया, जबकि ऐसे ही एक मामले में सतना जिले के नागौद ब्लाक अंतर्गत आने वाले गंगवरिया गांव निवासी प्रवीण तनय रामावतार को 0.26 आरए भूखंड का महज 77 हजार मुआवजा दिया गया। इसी प्रकार से सीधी जिले के चुरहट तहसील अंतर्गत टीकट कला निवासी मणिराज सिंह तनय विकास सिंह को 0.24 आरए भूखंड का 562023 रूपए तथा इसी तहसील के चिलरी कला गांव निवासी शेषमणि तनय शिवधारी को 0.24 आरए का 562023 रूपए मुआवजा निर्धारित किया गया। दूसरी ओर सतना जिले के नागौद तहसील अंतर्गत गंगवरिया गांव निवासी शीतला तनय गुलाबदास को 77877 रूपए का मुआवजा दिया गया।

ये नियम भी हासिए पर किसानों की मानें तो ग्रामीण क्षेत्रों में भम अधिगृहण कू दौरान मूल्यांकन बोर्ड के नियमों को भी हासिए पर रखा गया है। उल्लेखनीय है कि ग्रामीण क्षेत्रों में 300 वर्गमीटर तक के भूखंडों का मूल्य प्रति वर्गमीटर की निर्धारित करने का नियम था। अध्यक्ष केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड एंव महानिरीक्षक पंजीयन भोपाल ने निर्देश दिए थे कि ऐसे भूखंडों का निर्धारण मूल्यांकन बोर्ड के नियमों के तहत किया जाय। किसानों ने कहा-कलेक्टर को सुधार का अधिकार किसानों का कहना है कि उनके प्रकरण में कलेक्टर अधिनिर्णय में सुधार कर किसानों को हितलाभ प्रदान कर सकते हैं।
गौरतलब है कि भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुर्नव्यवस्थान में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 की कंडिका 33 में दिए गए अधिकारों का उपयोग कर कलेक्टर अधिनिर्णय की तारीख के छ माह के भीतर धारा 64 के तहत स्वप्रेरणा से अथवा हितबद्ध किसी व्यक्ति के आवेदन के आधार पर त्रुटि सुधार कर सकता है। नागौद तहसील के प्रभावित किसानों ने कलेक्टर से अपेक्षा की है कि सीमावर्ती जिलों में बांटे गए मुआवजा प्रकरणों का अध्ययन कर सतना जिले के किसानों को भी उसी दर पर मुआवजा दिलाया जाय जिस दर पर दूसरे जिले के किसानों को दियागया है।

इनका कहना है
मुआवजा कलेक्टर गाइडलाइन के हिसाब से ही दिया जाता है। जहां जैसी गाइडलाइन होती है, वहां उसी के अनुसार मुआवजा निर्धारित किया जाता है। यदि ऐसी कोई विसंगति है तो उसे देखा जाएगा। गाइडलाइन के अनुसार मुआवजा वितरण के लिए हम कटिबद्ध हैं।
मुकेश शुक्ल, कलेक्टर