रेल लाइन के किनारे टहल रहा था शेर, देखकर खंभे में चढ़ गए गैंगमैन

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टाइगर मुन्ना

मझगवां-टिकरिया के बीच पिटी इलाहाबाद-इटारसी पैसेंजर

rajesh dwivedi
सतना। आपने अब तक अपनी मांगे मंगवाने के लिए लोगों को टावर अथवा टंकी में खड़े होकर धमकी देते सुना होगा , लेकिन शेर के भय से खंभे में चढऩे की घटना आपने शायद ही सुनी होगी।

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टाइगर मुन्ना

सतना-मानिकपुर रेलखंड बीती रात ऐसी ही एक घटना का तब गवाह बन गया जब रेल ट्रैक के किनारे टहल रहे एक शेर को देखकर ड्यूटीरत गैंगमैन खंभे में चढ़ गए। ट्रैक पर शेर की मौजूदगी के चलते इलाहाबाद से इटारसी की ओर जाने वाली पैसेंजर तकरीबन एक घंटे टिकरिया-मझगवां स्टेशन के बीच खड़ी रही ।

और बंध गई घिघ्घी
बताया जाता है कि बीती रात गैंगमैन आलोक आनंद व महेंद्र यादव ड्यूटी कर रहे थे। दोनों गैंगमैन रेलवे ट्रैक की मुस्तैदी से जंाच कर ही रहे थे कि अचानक उनकी नजर रेलवे के माइलोमीटर क्रमांक 1223/6 के निकट खड़े एक शेर पर पड़ी। आनन-फानन उन्होने घटना की जानकारी पीडब्लूआई एमएन मीणा को दी जिसके बाद पीडब्लूआई हरकत में आ गए और उन्होने टिकरिया स्टेशन मास्टर को जानकारी देते हुए माइलोमीटर क्रमांक 1223/6 पर 15190 डाउन इलाहाबाद इटारसी पैसेंजर को रोके जाने का परमिट मांगा। परमिट मिलते ही आरपीएफ एसआई महावीर सिंह व अन्य स्टाफ के साथ पीडब्लूआई जब माइलोमीटर क्रमांक 1223/6 पर पहुंचे तो उन्होने गैंगमैन आलोक यादव व महेंद्र यादव को रेलवे के ही एक पोल में टंगा पाया। स्टाफ के आने पर बदहवाश गैंगमैन पोल से नीचे उतरे। इस दौरान पैसेंजर खड़ी रही जिससे ठंड में मुसाफिर हलाकान हुए।

विभागों की भी शेर बचाने दिलचस्पी नहीं
बेशक समूचे विश्व में सेव टाइगर जैसी मुहिम चल रही हों, लेकिन ये मुहिम सतना में दम तोड रही है। कुछ माह पूर्व ऐसी ही एक घटना में मझगवां-चितहरा रेलखंड के बीच एक शेर रेल ट्रैक से कटा था जिसके बाद रेलवे और वन विभाग के आला अधिकारियों ने इस ट्रैक का भ्रमण कर सुरक्षा की रणनीति तैयार की थी। प्लान बनाया गया था कि वन विभाग व रेलवे मिलकर जंगल से सटी रेल लाइन के किनारों की फेंसिंग कराएंगे ताकि बाघ व शेर जैसे खतरनाक जंगली जानवर न लोगों के लिए खतरा बन सकें और न ही रेल ट्रैक शेरों के लिए खतरा बन सके। घटना के बाद जिस प्रकार से हो हल्ला मचा था, ठीक उसी तेजी से इस मामले में शांति भी छा गई , नतीजतन फेंसिंग का काम अब तक नहीं हो सका। जाहिर है कि शेर बचाने की सरकारी चिंता सतही है जिसके कारण जंगल के राजा का अस्तित्व संकट में है।

वन महकमे की केवल लकड़ी बेचने में दिलचस्पी मझगवां में शेर देखे जाने का यह कोई पहला मामला नहीं है बल्कि यहां अकसर शेर देखे जाते हैं, लेकिन वचन विभाग की दिलचस्पी वन्य प्राणियों को बचाने के बजाय केवल लकडिय़ां व वन संपदाओं की अवैध बिक्री तक ही सीमित रहती है। बताया जाता है कि यहां सत्यनाराण पांडे रेंजर कै तौर पर पदस्थ हैं, लेकिन उनके कार्यकाल में लगातार वन्य प्राणी मारे जा रहे हैं, जबकि उनका पूरा समय लकडिय़ों की अवैध बिक्री व वसूली में गुजरता है। यही कारण है कि वन विभाग न तो शेरों के मूवमेंट को गुंभीरता से लेता है और न ही वन्य प्राणी संरक्षण को।