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शुगर रोगियों के लिए जरुरी है, …ये जानना

शुगर रोगियों के लिए जरुरी है ये जानना

Sugar is important for patients, ... to know

डायबीटीज लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों में ना सिर्फ कॉमन है, बल्कि शुगर का हर पांचवां मरीज हमारे देश में है। ऐसे में इस बीमारी से बचाव और बीमारी हो जाने पर इसके मैनेजमेंट के बारे में जानना बहुत जरूरी है। पूरी जानकारी दे रहे हैं डॉ. अनूप मिश्रा

Sugar is important for patients, ... to knowक्या है डायबीटीज
डायबीटीज एक मेटाबॉलिक डिसऑर्डर है। हम जो भी खाना खाते हैं, वह ग्लूकोज में बदलकर खून में जाता है और एनर्जी देता है। पैंक्रियाज़ से निकलने वाला इंसुलिन हॉर्मोन ग्लूकोज को ब्लड सेल्स में जाने और ब्लड लेवल को कंट्रोल करने में मदद करता है। जब इंसुलिन लेवल गड़बड़ा जाता है तो डायबीटीज की बीमारी होती है। डायबीटीज होने पर खाने से मिली एनर्जी खून में ही घूमती रहती है, जिससे ब्लड में शुगर का लेवल बढ़ जाता है। सही इलाज और मैनेजमेंट ना हो तो डायबीटीज के मरीजों को हार्ट अटैक, लकवा, किडनी फेल्योर, आंखों की समस्या, पैरों की समस्या, पुरुषों में नपुंसकता और महिलाओं में बांझपन, फ्रोजन शोल्डर (कंधे का जाम होना) जैसी बीमारियों का खतरा भी रहता है।

डायबीटीज 2 तरह की होती है:
1. टाइप 1 डायबीटीज
यह शरीर के अचानक इंसुलिन हॉर्मोन बनाना बंद करने पर होती है और बचपन में ही हो जाती है। इसके मरीज बहुत कम होते हैं। इसमें शरीर के ग्लूकोज को कंट्रोल करने के लिए इंसुलिन देना पड़ता है।

2. टाइप 2 डायबीटीज
गलत लाइफस्टाइल, मोटापा और बढ़ती उम्र की वजह से टाइप 2 डायबीटीज होती है। इसमें शरीर में कम मात्रा में इंसुलिन बनता है। ज्यादातर मरीज इसी कैटिगरी में आते हैं।

क्या करें कि शुगर से बचे रहें
1. रोज एक्सरसाइज करें
रोजाना 45-60 मिनट एक्सरसाइज करें। इसमें एरोबिक्स (ब्रिस्क वॉक, ट्रेडमिल, साइकलिंग, स्वीमिंग, बैडमिंटन जैसे खेल आदि) और स्ट्रेंथनिंग (वेटलिफ्टिंग) दोनों को शामिल करें। ब्रिस्क वॉक बहुत अच्छी एक्सरसाइज है। इसमें एक मिनट में करीब 80 कदम चलने होते हैं। रोजाना कम-से-कम 10,000 कदम चलने की कोशिश करें। अगर लगातार टाइम नहीं मिल रहा तो 15-15 मिनट 3 बार वॉक कर लें। योग करना भी अच्छा है लेकिन यह एरोबिक्स की जगह नहीं ले सकता। हां, मेडिटेशन से तनाव कम होता है, जोकि ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखने में मदद करता है।

2. डाइट पर कंट्रोल करें
पौष्टिक डाइट लें। रोजाना कम-से-कम 5 सर्विंग फल और सब्जियां खाएं। एक सर्विंग एक मीडियम साइज कटोरी के बराबर दाल/सब्जी या एक छोटे सेब के बराबर होती है। अलग-अलग रंग के फल और सब्जियों को खाने में शामिल करें। रात 8 बजे तक डिनर कर लें। हफ्ते में 1-2 बार से ज्यादा तला-भुना या जंक फूड न खाएं। रोजाना 10-12 बादाम, 1-2 अखरोट और 1 चम्मच फ्लैक्स सीड्स लें। इस तरह बैलेंस्ड डाइट लेने से डायबीटीज की आशंका काफी कम हो जाती है।

3. वजन कंट्रोल में रखें
अपने आइडियल वजन में से 5-10 फीसदी कम करके डायबीटीज की आशंका को काफी हद तक कम किया जा सकता है या कम-से-कम इसे टाला जा सकता है। बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 18 से 23 के बीच रखें। बीएमआई निकालने का फॉर्म्युला है: BMI = वजन (किलो में)/ लंबाई मीटर स्क्वेयर में। आइडियल वजन निकालने का दूसरा तरीका है: लंबाई (सेमी में) – 100, यानी अगर किसी की हाइट 170 सेमी और वजन 90 किलो है तो उसे 20 किलो वजन कम करने की जरूरत है। कमर से भी मोटापा माप सकते हैं। पुरुषों की कमर का घेरा 90 सेमी (35.4 इंच) और महिलाओं का 80 सेमी (31.4 इंच) से ज्यादा होना मोटापे की निशानी है।

4. फैमिली हिस्ट्री है तो शुगर टेस्ट कराएं
अगर पैरंट्स में से किसी को डायबीटीज है या खून के रिश्ते में किसी और करीबी (दादा-दादी, नाना-नानी आदि) को डायबीटीज है तो बच्चों को यह बीमारी होने की आशंका काफी बढ़ जाती है। इसलिए 30 साल की उम्र के बाद हर साल शुगर टेस्ट जरूर कराएं।

5. तनाव को कम करें
अगर किसी चीज का तनाव है तो उससे निपटने के लिए एरोबिक्स करें, मेडिटेशन करें, अच्छा म्यूजिक सुनें और अपनी पसंदीदा हॉबी के लिए वक्त निकालें। मालिश करने-कराने से भी मन रिलैक्स होता है।

टेस्ट
1. ब्लड ग्लूकोज टेस्ट
यह दो बार किया जाता है: खाली पेट (फास्टिंग) और नाश्ता या ग्लूकोज लेने के बाद (पीपी)।
फास्टिंग ब्लड शुगर (नॉर्मल): 70-100 mg/dl
(रात में खाना खाने के बाद 8-10 घंटे की फास्टिंग जरूर हो। अगर रात में 12 बजे कुछ खाया है तो दिन में 8 बजे से पहले टेस्ट न कराएं।)
पोस्ट प्रैंडियल (पीपी) शुगर: 70-140 तक mg/dl
खाने का पहला कौर खाने के 2 घंटे बाद कराएं)

2. रैंडम प्लाज्मा टेस्ट
इसे कभी भी कर सकते हैं।
200 mg/dL: नॉर्मल

3. HbA1c टेस्ट: इसे हीमोग्लोबिन A1c या ऐवरेज ब्लड शुगर टेस्ट भी कहते हैं। इस टेस्ट से पिछले तीन महीने के ऐवरेज ब्लड शुगर लेवल का पता लग जाता है। इसमें खाली पेट और खाने के दो घंटे बाद का ब्लड सैंपल देना नहीं पड़ता। कभी भी, किसी भी लैब में जाकर एचबीए1सी (ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन) टेस्ट के लिए सैंपल दे सकते हैं।
5.7 से कम: नॉर्मल
5.7 से 6.4: प्री-डायबीटिक
6.5 या ज्यादा: डायबीटिक

ध्यान रखें:
1. टेस्ट से 24 घंटे पहले कॉलेस्ट्रॉल कम करनेवाली टैब्लेट, विटामिन-सी, ऐस्प्रिन, गर्भ-निरोधक दवाएं आदि इस्तेमाल ना करें। इनसे शुगर लेवल कम आ सकता है।
2. जिसे ग्लूकोज पीकर दो घंटे बाद टेस्ट देना है, उसे वहीं ठहरना चाहिए। एक-डेढ़ घंटे घूमकर आने पर रिजल्ट पर असर पड़ता है।

इलाज
इलाज के तीन हिस्से हैं: 1. दवाएं, 2. डाइट, 3. कसरत
– डायबीटीज टाइप 1 के मरीजों को जिंदगी भर इंसुलिन लेने की जरूरत पड़ती है। इन मरीजों खासकर बच्चों को भरपूर डाइट की जरूरत पड़ती है ताकि उनके विकास पर बुरा असर न पड़े। बार-बार डॉक्टर के पास जाने, लगातार इंसुलिन के इंजेक्शन लगवाने और खाने में पाबंदियों की वजह से ऐसे बच्चों को दूसरों से अलग होने का अहसास चिड़चिड़ा, गुस्सैल या निराश कर सकता है। पैरंट्स को इन बच्चों की जरूरतों को ज्यादा बारीकी से समझना चाहिए। उसके दोस्तों को भी जागरूक करना चाहिए ताकि वे अपने दोस्त की समस्या को समझ सकें। जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग भी कराएं।
– टाइप 2 डायबीटीज में अगर मरीज का शुगर लेवल बॉर्डर पर है और दूसरी दिक्कतें नहीं हैं तो डॉक्टर की सलाह से एक्सरसाइज और लाइफस्टाइल व डाइट में बदलाव के साथ इसे कंट्रोल किया जा सकता है। अगर शुगर लेवल ज्यादा है तो डॉक्टर दवा शुरू करते हैं, जिसे नियमित रूप से लेना होता है। इसके इलाज के लिए अब बेहतर दवाएं आ गई हैं। ये दवाएं शुगर के मरीजों में हार्ट अटैक के खतरे को 30 फीसदी तक कम करती हैं। साथ ही, वजन भी कम करती हैं और शुगर को कंट्रोल में रखती हैं।
– ड्यूलैग्लूटाइड (Dulaglutide) इंजेक्शन हफ्ते में एक दिन लगाना होता है। यह वजन कम करने में काफी अहम रोल निभाता है और हार्ट अटैक की आशंका भी कम करता है।
– ब्लड शुगर मॉनिटर करने के लिए ग्लूकोमीटर की मदद ले सकते हैं। अब मेमरी वाले ग्लूकोमीटर भी मिलते हैं। इनमें पिछले 3 महीने की पूरी रीडिंग सेव रहती है। इन्हें मोबाइल से कनेक्ट कर पूरा डेटा भी लिया जा सकता है। बायर (Bayer), रॉश (Roush) और जॉन्सन एंड जॉन्सन (Johnson & Johnson) के ग्लूकोमीटर को अच्छा माना जाता है। इनकी कीमत 800 से 1500 रुपये है। इनके अलावा भी अच्छे ग्लूकोमीटर मार्केट में हैं।
– CGMS यानि Continuous Glucose Monitoring System पैच से लगातार शुगर लेवल पर निगाह रखी जा सकती है। यह पैच बांह में लगाया जाता है और इसमें एक सेंसर लगा होता है। इससे बेहतर मॉनिटरिंग की जा सकती है। इस पैच को 7 या 15 दिन में बदलना पड़ता है।
– इंसुलिन पंप से शुगर पर रियल टाइम निगाह रखी जा सकती है। इसे इंटेलिजेंट पंप भी कहा जाता है। यह पैंक्रियाज की तरह लगातार इंसुलिन शरीर में देता रहता है। अलार्म वाले पंपों में मौजूद अलार्म शुगर बहुत ज्यादा या बहुत कम होने पर बज उठता है। प्रेग्नेंट लेडीज और बच्चों के लिए ये पंप काफी अच्छे होते हैं। हालांकि महंगे हैं और एक की कीमत 2 से 5 लाख रुपये पड़ती है।
– सुईयों से राहत के लिए इंसुलिन पेन का इस्तेमाल कर सकते हैं। इन्हें लगाने के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता, ना ही रोज सूई बदलनी पड़ती है। इंसुलिन का एक इंजेक्शन जिसे कई बार उपयोग कर सकते हैं, उसकी कीमत करीब 250-300 रुपये और पेन करीब 400-500 रुपये का पड़ता है।

इंसुलिन लेते हैं तो रखें ध्यान
– इंसुलिन का इंजेक्शन लगाते हुए ध्यान रखें कि मरीज ने खाना जरूर खाया हो क्योंकि इंसुलिन ब्लड शुगर लेवल को कम करता है। अगर कोई बिना खाना खाए, यह इंजेक्शन लगा ले तो ब्लड शुगर लेवल लो यानि हापोग्लाइसीमिया हो सकता है।
– किसी वजह से मरीज सुबह या शाम को इंजेक्शन लगाना भूल जाता है तो मरीज को दो इंजेक्शन एक साथ कभी नहीं लगाने चाहिए। कभी मरीज को लगता है कि आज खाने पर कंट्रोल नहीं हो पाएगा तो वह इंसुलिन की मात्रा बढ़ा सकता है।
– इंसुलिन हमेशा नाश्ता करने और डिनर करने के 15-20 मिनट बाद लेना चाहिए। दो इंजेक्शनों के बीच 10-12 घंटों का फासला होना जरूरी है। खाने के एकदम साथ न लगाएं क्योंकि ऐसा करने से ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है।
– इंसुलिन की क्वॉलिटी बरकरार रखने के लिए इसे 8 से 10 डिग्री तापमान पर रखना चाहिए।

डाइट
– डायबीटीज के मरीजों को बैलेंस्ड डाइट लेनी चाहिए, जिसमें 50-60 पर्सेंट कार्बोहाइड्रेट, 15-20 पर्सेंट प्रोटीन और 20-25 पर्सेंट फैट और दूसरी चीजें शामिल हों। एक बार के खाने में 2-4 सर्विंग कार्ब ले सकते हैं। 1 सर्विंग = 15 ग्राम या 1 चपाती, 1 ब्रेड, 1/2 कटोरी दलिया, 1/2 कटोरी उपमा, 1 इडली, 2 पूरी, 1 छोटा रसगुल्ला, डेढ़ गिलास दूध आदि।
– मरीज खाने में ज्यादा गैप न रखें। ज्यादा गैप रखने से शुगर लेवल में उतार-चढ़ाव होता है। हर दो घंटे में कुछ खाएं। खाना थोड़ा-थोड़ा, बार-बार खाएं। ना तो ज्यादा देर भूखे रहें और ना ही एक बार में ढेर सारा खाना खाएं। खाने की मात्रा भी करीब-करीब बराबर ही रखें।
क्या और कितना खाएं
खा सकते हैं
कार्बोहाइड्रेट: चोकर वाला आटा, जौ, जई, रागी, दलिया, मल्टिग्रेन ब्रेड, काला चना, सोया, राजमा
फल: सेब, चेरी, जामुन, मौसमी, संतरा, स्ट्रॉबेरी, शहतूत, आलूबुखारा, नाशपाती, अंजीर
सब्जियां: ककड़ी, तोरी, टिंडा, सेम, शलजम, खीरा, चने का साग, सोया का साग, लहसुन, पालक, मेथी, आंवला, घीया
अन्य: डबल टोंड दूध और उससे बनी चीजें, छिलके वाली दालें, मछली (बिना ज्यादा तेल और मसाले वाली), फ्लैक्ससीड्स, छाछ आदि

कम खाएं
कार्बोहाइड्रेट: बिना चोकर का आटा, सूजी, सूजी के रस, ब्राउन ब्रेड, सफेद चना
फल: अमरूद, पपीता, तरबूज, खरबूजा
सब्जियां: अरबी, आलू, जिमीकंद, गोभी
मीठा: आर्टिफिशल स्वीटनर, खांड (बिना रिफाइन वाली शुगर)
अन्य: टोंड दूध और उससे बनी चीजें, बिना छिलके वाली दालें, अंडा, चिकन, बादाम, अखरोट, देसी घी, अच्छे तेल (सरसों, ऑलिव, कनोला, राइसब्रैन आदि)

ना खाएं
कार्बोहाइड्रेट: सफेद चावल, मैदा, पूरी, समोसा, वाइट ब्रेड
फल: आम, चीकू, अंगूर, केला
सब्जियां: शकरकंद, आलू,
मीठा: मिठाई, चीनी, गुड़, शहद, गन्ना, आइसक्रीम, जैम, केक, पेस्ट्री, कुकीज़
अन्य: फुल क्रीम दूध और उससे बनी चीजें, रेड मीट, कोल ड्रिंक्स, रिफाइंड ऑयल।
नोट: अगर शुगर के साथ-साथ कोई दूसरी बीमारी भी हो जैसे किडनी तो यह डाइट लागू नहीं होगी। बेहतर यही है कि डॉक्टर की राय से ही अपना डाइट चार्ट बनाएं।

ये भी फायदेमंद
– डायबीटीज के मरीज करेला का पाउडर या जूस और घिया का जूस भी पी सकते हैं। हालांकि इन्हें नैचरल तरीके से ही लें यानि मार्केट के बोतलबंद जूस या पाउडर के मुकाबले ताजा खाना ही बेहतर है। इन्हें सब्जी के रूप में भी खा सकते हैं।
– रोजाना आधा छोटा चम्मच दालचीनी का पाउडर लें। दालचीनी खून में ग्लूकोज लेवल, ब्लड प्रेशर और वजन को भी कम करती है। पानी के साथ या किसी सलाद आदि पर डालकर भी ले सकते हैं। गर्म चीजों में मिलाकर ना लें। 18 साल से कम उम्र वाले और प्रेग्नेंट व दूध पिलानेवाली महिलाएं ना लें।

नोट: डाइट की डायरी रखें और जो भी खाएं, उसमें नोट करें। Calorie Counter – MyFitnessPal, Lose It! – Calorie Counter, MyPlate Calorie Tracker जैसे किसी मोबाइल ऐप की मदद भी ले सकते हैं।

शुगर-फ्री
डायबीटीज के मरीज मीठे के लिए आर्टिफिशल स्वीटनर या शुगर-फ्री ले सकते हैं। ये स्वाद में मीठे होते हैं और इनमें कैलरी कम होती हैं। लेकिन ज्यादा मात्रा में लेने से ये नुकसान पहुंचाते हैं। ओवरडोज से एलर्जी, सिरदर्द, घबराहट, उलटी, नींद कम आना, याददाश्त कमजोर होना, जोड़ों में दर्द और घबराहट आदि हो सकती है। अमेरिका के फूड एंड ड्रग्स असोसिएशन (FDA) ने रोजाना के लिए स्वीटनर्स के लिए रोजाना की लिमिट 2-3 गोलियां या आधार चम्मच पाउडर या 5 बूंदें तय की हैं। अमेरिकी फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन ने जिन स्वीटनर्स की इजाजत दी है, वे हैं:

सुक्रलोज़ (Sucralose): स्पेंडा (Splenda) नाम से मिलता है।
सैक्रीन (Saccharin): स्वीटेक्स (Sweetex), स्वीट एंड लो (Sweet’N Low) आदि।
अस्पार्टेम (Aspartame): ईक्वेल (Equal), न्यूट्रिस्वीट (Nutrasweet) आदि।
ऐसीसल्फेम पोटैशियम (Acesulfame Potassium): स्वीट वन (SweetOne), ऐस-के (Ace-K) आदि।
नियोटेम (Neotame): हुआस्वीट नियोटेम (Huasweet) नाम से मिलता है।
स्टीविया (Stevia): ज़ीरोविया (Zerovia), स्वीटलीफ (Sweetleaf), स्टीविया आदि।

रखें ध्यान
-शुगर-फ्री चीजें (चॉकलेट, डाइट कोक, बेकरी आइटम आदि) कम खाएं क्योंकि इनमें शुगर अल्कोहल, फ्रक्टोस, सैक्रीन, मैल्टोडेक्सट्रिन आदि होते हैं जोकि शुगर नहीं हैं लेकिन इनमें कार्बोहाइड्रेट काफी ज्यादा होते हैं, जिससे ब्लड ग्लूकोज़ लेवल पर असर पड़ता है।
– प्रेग्नेंट महिलाएं, बच्चे को दूध पिलाने वाली मांएं और बच्चे आर्टिफिशल स्वीटनर का इस्तेमाल ना करें।
– यह बात कोरी अफवाह है कि आर्टिफिशल स्वीटनर्स से कैंसर, सदमा, मिरगी का दौरा, मेमरी लॉस जैसी समस्याएं हो सकती हैं। किसी भी रिसर्च में यह साबित नहीं हुआ है।
– हालांकि हाल की एक स्टडी में कहा गया है कि जिन लोगों को डायबीटीज नहीं है वे आर्टिफिशल स्वीटनर लेते हैं तो उन्हें वजन कम करने में मदद नहीं मिलती, उलटे डायबीटीज़ जैसी मेटाबॉलिक बीमारियां होने का खतरा होता है।
– बेहतर है कि इन स्वीटनर्स को कम मात्रा में ही इस्तेमाल किया जाए।

मोबाइल ऐप्स
BG Monitor Diabetes
प्लैटफॉर्म: एंड्रॉयड
डायबीटीज को मैनेज करने में यह ऐप काफी मददगार है। यह आपके ब्लड ग्लूकोज, खाने, इंसुलिन, एक्सरसाइज आदि का लेखा-जोखा रखता है।

Diabetic Connect
प्लैटफॉर्म : एंड्रॉयड, आईओएस
टाइप 1 और टाइप 2, दोनों तरह के डायबीटीज के मरीजों के लिए यह ऐप काफी फायदेमंद है। आपके तमाम मेडिकल डेटा का रेकॉर्ड रखकर यह शुगर मैनेजमेंट में मदद करता है।

mysugr.com
प्लैटफॉर्म: विंडोज़, एंड्रॉयड, आईओएस
इसकी मदद से आप अपनी शुगर के आंकड़ों पर निगाह रख सकते हैं। इसके आधार पर आप अपना रोजाना का खाना, डाइट, मेडिसिन आदि की डोज तय कर सकते हैं।

वेबसाइट्स
dlife.com: इस वेबसाइट्स पर डायबीटीज मैनेजमेंट के बेहतरीन टिप्स मिल सकते हैं।
webmd: यहां डायबीटीज की वजहें, इलाज आदि पर अच्छी जानकारी दी गई है।

FB पेज
Living with Diabetes in India, Diabetes Care Foundation of India जैसे कई फेसबुक पेजों पर डायबीटीज से निपटने के बेहतरीन टिप्स के साथ अपने अनुभव शेयर करने वाले लोग भी मिल जाएंगे।

चंद अहम सवाल और जवाब
अगर पैरंट्स या भाई-बहन को डायबीटीज है तो हमें भी होगी ही?
ऐसा नहीं है। कुछ मामलों खासकर टाइप 1 डायबीटीज में जिनेटिक वजहें हो सकती हैं, लेकिन असली वजह लाइफस्टाइल होता है जोकि आमतौर पर एक परिवार में एक जैसा ही होता है। इसीलिए अगर एक को शुगर है तो परिवार के दूसरे लोगों को भी होने की आशंका होती है। अगर कम उम्र से ही सही डाइट और लाइफस्टाइल अपनाया जाए तो शुगर की आशंका काफी कम हो जाती है।

शुगर खाने का डायबीटीज से कोई नाता नहीं है?
रिसर्च कहती हैं कि कोला जैसे चीनी से बनने वाले ड्रिंक्स पीने से डायबीटीज होने की आशंका बढ़ जाती है। डायबीटीज से बचने के लिए लोगों को कोला, फ्रूट-ड्रिंक्स, एनर्जी ड्रिंक्स, स्पोर्ट्स ड्रिंक्स, मीठी चाय आदि से दूर रहना चाहिए। इनसे एक ही बार में सैकड़ों कैलरी मिलती हैं और ये ब्लड ग्लूकोज़ बढ़ा देते हैं। अगर हेल्दी डाइट के साथ लिमिट में मीठा लिया जाए तो लेवल नहीं बढ़ता।

करेले का जूस या दूसरे घरेलू नुस्खे ब्लड शुगर लेवल कम करने में मददगार हैं?
करेला, मेथीदाना, दालचीनी, जामुन, घीया (लौकी) आदि शुगर लेवल कम करने में काफी अहम भूमिका निभाते हैं। बेहतर है कि इन्हें नेचरल तरीके से ही खाएं। ध्यान रखें कि अलोपैथिक दवाएं बंद नहीं करनी हैं।

जिन्हें शुगर है, वे चॉकलेट या मिठाई नहीं खा सकते?
अगर हेल्दी डाइट अपनाएं और नियमित रूप से एक्सरसाइज करें तो कभी-कभार मिठाई या चॉकलेट खा सकते हैं। बस, ध्यान रखें कि मिठाई की मात्रा कम हो और खाने का ज्यादातर हिस्सा हेल्दी हो।
फल तो हेल्दी होते हैं तो क्या जितने चाहे, फल खा सकते हैं?
फल हेल्दी होते हैं क्योंकि इनमें फाइबर, विटामिन और मिनरल होते हैं लेकिन फलों में सिंपल कार्बोहाइड्रेट भी होते हैं इसलिए इन्हें ज्यादा मात्रा में नहीं खाना चाहिए। आमतौर पर रोजाना दो सर्विंग (100-150 ग्राम) फल रोजाना खा सकते हैं।

जिन्हें डायबीटीज है, उन्हें उबला खाना खाना चाहिए और सख्त डाइट प्लान अपनाना चाहिए?
ऐसा बिल्कुल नहीं है। बल्कि आपको कम कार्बोहाइड्रेट, लो सैचुरेटिड फैट, हाई फाइबर वाला खाना खाना चाहिए। रोजाना 2-3 चम्मच तक हेल्दी घी-तेल ले सकते हैं। जिन्हें डायबीटीज़ नहीं है, उन्हें भी लगभग ऐसी ही डाइट अपनानी चाहिए।

क्या करें जब अचानक शुगर लो (कम) हो जाए?
वक्त पर खाना न खाने या कम मात्रा में खाना खाने, बहुत ज्यादा एक्सरसाइज करने, ज्यादा शराब पीने, किडनी आदि की बीमारी होने पर कई बार ब्लड शुगर लेवल बहुत नीचे (70 mg/dl से नीचे) गिर जाता है। इस स्थिति को हाइपोग्लाइसीमिया कहा जाता है। इसमें मरीज को बेहद पसीना आना, घबराहट, चक्कर आना, कमजोरी, चक्कर आना, सिरदर्द, नींद न आना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हाइपोग्लाइसीमिया होने पर मरीज को 3-5 ग्लूकोज़ की गोलियां या 2-4 चम्मच चीनी या शहद या 1-2 कप फलों का जूस या 1 कोल्ड ड्रिंक या 5-6 टुकड़े चॉकलेट या मिठाई के एक-दो पीस फौरन खाने चाहिए। अगर 10 मिनट में शुगर का लेवल 100 mg/dl तक ना पहुंचे तो मरीज को और ग्लूकोज व चॉकलेट खानी चाहिए। साथ में एक गिलास दूध के साथ 2 ब्रेड भी लें। फिर भी आराम ना मिले तो डॉक्टर के पास जाएं। ध्यान रखें कि लो ब्लड शुगर या हाइपोग्लाइसीमिया बहुत खतरनाक हो सकता है। यह दिल की बीमारी से लेकर जान जाने की वजह तक बन सकता है।

हाइपोग्लाइसीमिया के लक्षण
– पसीना आना
– बहुत भूख लगना
– चक्कर या उलटी आना
– घबराहट होना
– कमजोरी लगना
– धड़कन बढ़ जाना
– सिरदर्द होना
– भ्रम की स्थिति, कंसंट्रेशन में दिक्कत होना
-लेवल बहुत गिरने पर बेहोशी, दौरे जैसी स्थिति भी हो सकती है
नोट: लो ब्लड शुगर या हाइपोग्लाइसीमिया बहुत खतरनाक हो सकता है। यह दिल की बीमारी से लेकर जान जाने की वजह तक बन सकता है।

ब्लड शुगर लक्ष्य
फास्टिंग ब्लड शुगर (रात में 8-10 घंटे की फास्टिंग के बाद): 90-130 mg/dl
जवान: 80-120 mg/dl
बुजुर्ग: 90-140 mg/dl
पोस्ट प्रैंडियल शुगर (खाने के पहले कौर के 2 घंटे बाद): 120-180 mg/dl
जवान: 110-160 mg/dl
बुजुर्ग: 130-200 mg/dl
प्री प्रैंडियल शुगर (खाने से आधा घंटा पहले)
80-130 mg/dl
रात में 3 बजे की शुगर
90-100 mg/dl से ज्यादा (ताकि रात में लो शुगर की समस्या न हो)
– शुगर-फ्री चीजें (चॉकलेट, हाइट कोक, बेकरी आइटम आदि) कम खाएं क्योंकि इनमें शुगर अल्कोहल, फ्रक्टोस, सैक्रीन, मैल्टोडेक्सट्रिन आदि होते हैं जोकि शुगर नहीं हैं लेकिन इनमें कार्बोहाइड्रेट काफी ज्यादा होते हैं, जिससे ब्लड ग्लूकोज़ लेवल पर असर पड़ता है।
– प्रेग्नेंट महिलाएं, बच्चे को दूध पिलाने वाली मांएं और बच्चों को आर्टिफिशल स्वीटनर का इस्तेमाल न करें।
– यह बात कोरी अफवाह है कि आर्टिफिशल स्वीटर्स से कैंसर, सदमा, दौरा, मेमरी लॉस जैसे समस्याएं हो सकती हैं। किसी भी रिसर्च में यह साबित नहीं हुआ।
– हालांकि हाल की एक स्टडी में कहा गया है कि जिन लोगों को डायबीटीज नहीं है और वे आर्टिफिशल स्वीटर लेते हैं तो उन्हें वजन कम करने में मदद नहीं मिलती, उलटे मेटाबॉलिक डिसीज़ जैसे कि डायबीटीज़ होने का खतरा होता है।
– बेहतर है कि इन स्वीटर्न को कम मात्रा में ही इस्तेमाल किया जाए। साभार नवभारत टाइम्स

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