पटना के ‘अन्नदाताओं’ पर भारी ‘शिव-राज’ के अफसरों का रसूख

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Sdm se naraj kisan

एसडीएम ने पहले दी धमकी फिर दर्ज करा दिया किसानों पर फर्जी मुकदमा

Sandeep singh gaharwar

भोपाल। खुद को किसान पुत्र कहते हुए नहीं थकने वाले प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार में उनके ही मातहत नौकरशाह किसानों की रीढ़ तोडऩे में अमादा है। भावांतर के भंवर में किसानों को शब्ज बाग दिलाने वाले शिवराज सरकार के अफसर उनकी नाक के नीचे ही कहीं किसानों पर गोली चलवा रहे हैं तो कहीं उन पर फर्जी मुकदमे दर्ज करा रहे हैं। प्रदेश में 14 सालों से सत्ता पर काबिज भाजपा सरकार में ‘सरकारी हुक्मरानों’ की मनमर्जी अब सिर चढ़ कर बोलने लगी है। ऐसा ही ऐ मामला प्रदेश की राजधानी भोपाल से सटे रायसेन जिले का सामने आया है, जहां विभिन्न समस्या से जूझ रहे किसानों की समस्या का निराकरण करने के बजाय अफसरों ने निरीह किसानों पर ही मुकदमा दर्ज करा दिया। इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार रायसेन जिले की उदयपुरा तहसील के ग्राम पंचायत पटना के समस्त किसान, मजदूरों एवं महिलाओं ने 7 सितंबर को विभिन्न मांगों एवं समस्याओं से संबंधित एक मांग पत्र मुख्यमंत्री के नाम से नायब तहसीलदार को सौंपा था। मांगों का निराकरण नहीं होने पर समस्त ग्राम वासियों ने समाजसेवी एवं स्थानीय अधिवक्ता सुनील कुमार दीक्षित की अगुवाई में 14 सितंबर से आमरण अनशन प्रारंभ कर दिया। 2 दिन का आमरण अनशन चला तब तहसीलदार उदयपुरा द्वारा 16 सितंबर को मांगों को पूरा करने का लिखित आश्वासन दे कर अनशन तुड़वाया गया। इसके बाद भी पटना ग्राम के किसानों की  मांगें पूरी नहीं हुई। इसी दौरान 7 अक्टूबर को किसान बसन्त पाल एवं हरिराम पाल द्वारा तहसीलदार उदयपुरा व थाना प्रभारी उदयपुरा को इस आशय का आवेदन दिया गया कि हमारे बड़े भाई लक्ष्मण पाल की पत्नी 2 बेटे 2 बेटियों का मानसिक परीक्षण करवाया जाये और यदि वो बीमार हो तो उनका इलाज करवाया जाये। क्योकि उनको कभी भी देवी-देवता आते है और वो हम दोनों भाईयो से व हमारे परिवार से विवाद करते हैं।

Sdm se naraj kisanएसडीएम ने किया अभद्र भाषा का प्रयोग
मांगों का निराकरण लिखित आश्वासन देने के बाद भी पूरा न होने पर एक बार फिर 13 अक्टूबर को सभी किसान, मजदूर व महिलाएं समाजसेवी एवं अधिवक्ता सुनील कुमार दीक्षित के नेतृत्व में एसडीएम बरेली को ज्ञापन देने जाते हैं । एसडीएम बरेली किसी दूसरे अफसर को ज्ञापन लेने भेजते हैं पर एसडीएम को ही ज्ञापन देने पर अड़े ग्रामीणों पर एसडीएम बरेली इतने भड़क गये कि किसानों से अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए ज्ञापन लेने से इंकार करते हुए देख लेने तथा ठिकाने लगाने की धमकी देते हैं। इतना ही नहीं सभी महिलाओं, ंकिसानों और मजदूरों को, जो लगभग 200 की संख्या में थे जेल भेजने की धमकी भी दे देते हैं। (जिसका वीडियो भी है) एसडीएम बरेली के व्यवहार से नाराज ग्रामीणों ने पुलिस थाना उदयपुरा में एसडीएम के विरुद्ध अपराध दर्ज करने का एक आवेदन दे कर आमरण अनशन प्रारंभ किया, जो पांच दिन तक चला। बाद में जिसको एडीएम रायसेन जैन व विधायक उदयपुरा द्वारा 17 अक्टूबर को अनशन तुड़वाया।

आवाज दबाने बनाया फर्जी मुकदमा
ग्राम पटना के किसानों, मजदूरों और महिलाओं की 5 दिवसीय आमरण अनशन के वाबजूद मांगे पूरी नहीं हुई  बल्कि दो निरीह किसानों पर फर्जी मुकदमें दर्ज कर दिया गये, ताकि कार्रवाई से घबराकर किसानों का आंदोलन बिखर जाये। 28 नवंबर को पुलिस थाना उदयपुरा के डायल 100 की एक गाड़ी बसन्त पाल के घर आती है और बसन्त पाल के बेटे अशोक पाल से बसन्त पाल व हरिराम पाल को बुलबाती है जो अनार सिंह पाल के खेत में कीटनाशक दवा डलवा रहे थे। बसन्त पाल, हरिराम पाल व लक्ष्मण पाल को डायल 100 में बिठा कर उदयपुरा लाती है और उदयपुरा में हरिनारायण पटेल निवासी पटना को झूठा गवाह बना कर बसन्त पाल, हरिराम पाल व लक्ष्मण पाल, वीरेंद्र पाल पर उदयपुरा बस स्टैण्ड पर झगड़ा करने का फर्जी आरोप लगाते हुए धारा 151 में बंद कर देती है। बरेली प्रशासन के ईशारे पर की गई कार्रवाई के कारण बसन्त व हरिराम को जमानत भी नहीं दी जाती। दोनों को जमानत के लिये जब तहसीलदार उदयपुरा के समक्ष पेश किया गया तो वहां कला बाई ने 3.70 एकड़ की ऋ ण पुस्तिका को बसन्त व हरिराम की जमानत में लगाती है इसके वाबजूद भी बसन्त व हरिराम को उप जेल बरेली भेज दिया गया। प्रशासन की मनमानी इस कदर थी कि दूसरे दिन शाम 6 बजे के लगभग रिहाई पत्रक पर हस्ताक्षर किया गया। दिन भर तहसीलदार अपने कार्यालय में मौजूद नहीं रहे, जिससे बसन्त व हरिराम तीसरे दिन 12 बजे के लगभग जेल से बाहर आ पाये। उक्त मामले में बड़ी बात यह है कि  गवाह के रूप में जिस हरिनारायण पटेल को साक्ष्य बनाया है उन्होंने भी इसे झूठा  मुकदमा बतलाया है।

मानव अधिकार आयोग पहुंची शिकायत
बरेली के राजस्व अफसरों एवं पुलिस अफसरों की प्रताडऩा से परेशान पटना ग्राम के किसानों ने आखिरकार राजधानी पहुंचकर मानव अधिकार आयोग की शरण ली है।  लगभग 19 किसान, महिलाओं और मजदूरों द्वारा 2 दिसंबर को एक आवेदन कलेक्टर रायसेन, पुलिस अधीक्षक रायसेन व भोपाल में मानव अधिकार आयोग को सौंपा। आवेदन में लेख किया गया है कि प्रशासन द्वारा द्वेष पूर्ण ढंग से हम अनशनकारियों पर मुकदमे बनाये जा रहे है साथ एसडीएम बरेली, तहसीलदार उदयपुरा एंव पुलिस थाना उदयपुरा के एएसआई राकेश सिंह के विरुद्ध मुकदमा कायम किया जावे और लक्ष्मण पाल के परिवार के 5 सदयस्यों का मानसिक परीक्षण कराया जाये।