…तो सिंधिया की राह हो सकती आसान!

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... Scindia may be the easiest way!
jyotiraditya sindhiya

राहुल गांधी के अध्यक्ष बनते ही ज्योतिरादित्य को मध्यप्रदेश की मिल सकती है कमान

anil dubey
सागर। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में 19 साल बाद राष्टÑीय अध्यक्ष पद पर कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी को जिम्मेदारी देने की तैयारी के बाद अब ग्वालियर राजघराने के युवराज मध्यप्रदेश से गुना सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में कांग्रेस आगामी मिशन 2018 के विधानसभा का चुनाव लड़ने का ऐलान कर सकती है। राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद अगर विरोध के स्वर मुखर नहीं हुए तो फिर सिंधिया की राह आसान हो सकती है।

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jyotiraditya sindhiya
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Rahul Ghandi

कांग्रेस आलाकमान मध्यप्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के पहले मुख्यमंत्री पद के दावेदार की घोषणा करने के बिल्कुल मूड में नही थी लेकिन राहुल गांधी को दिसंबर 2017 में कांग्रेस की सल्तनत मिलने के पहले यह कयास लगाए जा रहे है कि कांग्रेस ने यह ठान लिया हैं कि युवा नेतृत्व को आगे करके ही आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति तय की जाए। जिसका सबसे बड़ा फैसला मध्यप्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की जिम्मेदारी युवा नेता के हाथ में सौंपे जाने को लेकर लिया जा सकता है। जिसमें युवा चेहरों में शुमार मध्यप्रदेश से सिंधिया को यह मौका मिल सकता है। जिसकी अटकले राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने के पहले से ही लगाई जाने लगी है। वैसे भी सिंधिया के नेतृत्व में कांग्रेस मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव लड़े, इसकी वकालत सिंधिया समर्थक जोर-शोर से कर रहे है।

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Kamalnath

इसके पहले अटेर विधानसभा के उप चुनाव में सिंधिया की बदौलत यह सीट कांग्रेस के कब्जे में आ गई। अब अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी मध्यप्रदेश के कोलारस, मुंगावली विधानसभा उप चुनाव में सिंधिया को एक बार फिर अजमा रही है। जिससे सिंधिया का यह आंकलन सामने आ सके कि वे मध्यप्रदेश में युवायों के लिए कितने पसंद किए जाते है। हालांकि जिन दो विधानसभा में उप चुनाव होना है। यहां कांग्रेस का ही अधिकतर राज रहा है। यह बात अलग है कि अब इस चुनाव में मतदाता किसे अपना वोट देते है। सिंधिया की जिम्मेदारी में अगर कांग्रेस को इन दोनों विधानसभा सीटों से विजय मिलती है तो अटेर चुनाव के साथ इन 2 विधानसभा सीटों के जिताने का श्रेय सिंधिया के खाते में ही जाएगा लेकिन यहां भाजपा भी खार खाए बैठी है। चित्रकूट चुनाव का बदला लेने में कोई कसर नही छोड़ेगी।

सिंधिया को इन चुनावों की जिम्मेदारी मिलने की मुख्य वजह मुंगावली विधानसभा जो उनके संसदीय क्षेत्र में आती है। वहीं कोलारस उनकी मातृभूमि और गृह क्षेत्र से लगा विधानसभा क्षेत्र है। ऐसे में दोनों ही विधानसभा के उप चुनाव सिंधिया के लिए आगे की रणनीति तय करगें। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इन उप चुनाव के माध्यम से सिंधिया अगर सफल रहे तो फिर उनके विरोधियों के स्वर मुखर नहीं हो पाएंगे। वहीं कांग्रेस आलाकमान को भी जिम्मेदारी सौप्ांने में आसानी रहेगी। इस कारण ग्वालियर के युवराज को इन चुनावों की जिम्मेदारी देकर कांग्रेस आलाकमान शायद उनकी आगामी विधानसभा चुनाव की मुख्य जिम्मेदारी की राह आसान कर रही है। यह भले ही 2 सीटों के उप चुनाव है लेकिन इसके बाद यह तय हो जाएगा कि सिंधिया मध्यप्रदेश में कांग्रेस का विधानसभा चुनाव का नेतृत्व संभालने की कितनी ताकत रखते है।

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Digvijay Singh

सिंधिया की राह नहीं आसान
मध्यप्रदेश में 2008 और 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस आलाकमान के द्वारा चुनाव के पहले मुख्यमंत्री पद की घोषणा नहीं की थी लेकिन आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस आलाकमान इसका पहले फैसला ले सकती है। मध्यप्रदेश में किसके नेतृत्व में विधानसभा चुनाव लड़े, इसको लेकर वर्तमान में घमासान मचा हुआ है। यहां कांग्रेस आला नेताओं के समर्थक अपने-अपने आला नेता को जिम्मेदारी दिलाने के लिए जी-जान से लगे है। मध्यप्रदेश की राजनीति से जुड़े जिन कांग्रेस नेताओं का कार्यकर्ताओं के बीच ग्लेमर है। उसमें सबसे ऊपर नाम माँ नर्मदा की परिक्रमा कर रहे मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह का है। जहाँ उनके मध्यप्रदेश में सबसे अधिक समर्थक है जो न केवल प्रभावशाली बल्कि उनकी अपने-अपने क्षेत्र में खासी पकड़ भी है। इसके अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री छिंदवाड़ा सांसद कमलनाथ का मध्यप्रदेश में अच्छा खासा नेटवर्क है। मध्यप्रदेश की शायद ही ऐसी कोई विधानसभा हो जहां उनके समर्थक न हो। कमलनाथ के समर्थक भी अपने क्षेत्र में कम पावर फु ल नहीं है।

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Ajay Singh Rahul

विधानसभा नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल का मध्यप्रदेश में कार्यकर्ताओं के बीच अच्छा तालमेल है। वहीं चित्रकूट उप चुनाव नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के नेतृत्व में ही लड़ा गया। जहां उन्होंने इस चुनाव में भाजपा को चुनौती देते हुए यह तक कहा था कि धन-बल, बाहुबल का कितना भी उपयोग कर लो यह सीट अब भाजपा के कब्जे में नहीं आने वाली नहीं है।

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Suresh Pachouri

इस चुनाव को जिताने की जिम्मेदारी कांग्रेस आलाकमान द्वारा अजय सिंह को दी गई थी। वहीं कार्यकर्ताओं में सुरेश पचौरी की भी अच्छी खासी घुसपेठ है। मध्यप्रदेश में इनके समर्थकों की कमी नही है। ऐसे में विधानसभा चुनाव के पहले कांग्रेस से मुख्यमंत्री पद के दावेदार की घोषणा आलाकमान के लिए इतना आसान भी नहीं है। जितना सिंधिया के समर्थक समझ रहे है।