प्रदेश में हर दिन13 महिलाओं से रेप: एनसीआरबी की रिपोर्ट

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Repeat from 13 women every day in the state: Report of NCRB

2016 में बलात्कार की 4,882 वारदातें प्रदेश में

भोपाल, प्रदेश को एक बार फिर दुष्कर्म के मामले में शर्मसार होना पड़ा है। राज्य में दुष्कर्म के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की जारी ताजा रिपोर्ट में रेप के मामले में प्रदेश पहले नंबर पर है। राज्य में औसतन हर रोज 13 युवतियां दुष्कर्म का शिकार बन रही हैं। एनसीआरबी की रिपोर्ट वर्ष 2016 की अवधि को लेकर आई है। यह रिपोर्ट बताती है कि देश के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दुष्कर्म की 38,947 वारदातें हुई हैं। इनमें सबसे ज्यादा वारदातें 4,882 प्रदेश में हुई हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो एक बात साफ हो जाती है कि राज्य में औसतन हर रोज 13 महिलाएं दुष्कर्म का शिकार बन रही हैं। एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार, इसी अवधि में उत्तर प्रदेश में 4,816, महाराष्ट्र में 4,189 दुष्कर्म के मामले दर्ज किए गए।

Repeat from 13 women every day in the state: Report of NCRBशर्मनाक आंकड़े
प्रदेश में बालिका जन्म को प्रोत्साहित करने से लेकर महिला सशक्तिकरण के लिए लाडली लक्ष्मी योजना, लाडो योजना, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, मुख्यमंत्री साइकिल योजना तो संचालित हो रही है, साथ में युवतियों को आत्मसुरक्षा के लिए सक्षम बनने हेतु शौर्या दल बनाए जा रहे हैं, मगर महिला अपराधों को लेकर जो आंकड़े सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं।

दुष्कर्मी को फांसी की सजा का प्रावधान संबंधी विधेयक पेश
विधानसभा में गुरुवार को दंड विधि (मध्यप्रदेश संशोधन) विधेयक पेश किया गया, जिसमें बारह वर्ष तक की आयु की महिला के साथ दुष्कर्म के दोषी को मृत्युदंड या कठोर कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है। विधि और विधायी मंत्री रामपाल सिंह ने सदन में इस आशय का संशोधन विधेयक पेश किया। इसमें इस तरह के अपराध के दोषी की सजा के संबंध में अन्य प्रावधान भी किए गए हैं।

दुष्कर्मी को फांसी एवं स्कूल फीस का विधेयक पारित
विधानसभा में सरकार ने आज दंड विधि विधेयक 2017 को पेश कर दिया है। जो विधानसभा में पारित हो गया है। इस विधेयक के अनुसार 12 साल की बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म के आरोपियों को फांसी की सजा का प्रावधान किया गया है। इसी तरह सरकार ने निजी स्कूलों के लिए फीस नियंत्रण विधेयक भी पेश किया। जिसके अनुसार निजी स्कूल हर साल 10 फीसदी तक ही फीस बढ़ा सकते हैं। विधेयक में सरकार ने निजी स्कूलों को सांस्कृतिक कार्यक्रम, खेल स्पर्धाएं आदि के नाम पर फीस वसूलने की छूट दे रखी है। आज सदन में 9 विधेयक पारित किए गए।