घर की बजाय क्लीनिक, नर्सिंग होम में प्रैक्टिस

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शासकीय डॉक्टर अलाउंस भी दे रहे और प्रैक्टिस भी कर रहे

brijesh parmar
उज्जैन। शासकीय डॉक्टरों की सेवा क्लीनिक और नर्सिंग होम में जमकर चल रही है। प्रायवेट प्रैक्टिस से जमकर दो तरफा आनन्द उठाया जा रहा है। इसे पर रोक के लिए जिले के अधिकारियों की इच्छा शक्ति का अभाव उनके बयानों से साफ झलकता है। इसी के चलते शासकीय डॉक्टरों की सेवा प्रायवेट में जमकर फल-फूल रही है। कतिपय नर्सिंग होम संचालक जमकर जनता की जेब इनके माध्यम से काटने में लगे हैं।

bhavtarini logo_new copyशासकीय अस्पताल मेें सेवाओं को लेकर ईमानदारी के दोहे पड़ने वाले कतिपय डॉक्टर प्रायवेट क्लिनिक और नर्सिंग होम के मोहपाश में पूरी तरह जकड़े हुए हैं। इसे लेकर शासन को भी कुछ नहीं समझते हुए नियमों को सीधे-सीधे हवा में उड़ा रहे हैं। इनकी इस प्रकार की कार्यप्रणाली से आम जन की जेब सीधे-सीधे कट रही है। लेकिन इन्हें इससे कोई वास्ता नहीं है। नियमानुसार शासकीय चिकित्सक को घर पर प्रायवेट प्रैक्टिस करने की पात्रता दी गई है। न कि क्लिनीक और नर्सिंग होमों में जाकर अपनी सेवाएं प्रदान करने की। इसके विपरीत उज्जैन शासकीय अस्पताल के तमाम विधा के कतिपय डॉक्टर शहर भर के विभिन्न क्षेत्रों में निजी क्लिनिक और निजी नर्सिंग होम में प्रायवेट प्रैक्टिस करते हुए अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। नियम मुताबिक शासन डॉक्टरों को नान प्रैक्टिस भत्ता भी देता है। इसके लिए जो शासकीय डॉक्टर लिखकर देता है कि वह प्रायवेट प्रैक्टिस नहीं करता है तो उसे शासन भत्ता प्रदान करता है। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार अधिकांश डॉक्टर भत्ते का लाभ लेते हुए निजी क्लिनिक और निजी नर्सिंग होम में बराबर सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। इस सेवा के बदले में उन्हें बड़ा आर्थिक मेवा मिल रहा है। स्थिति इतनी दयनीय बन पड़ी है कि कई वरिष्ठ चिकित्सक भी इसमें शामिल है। गिनती के इक्का-द ुक्का चिकित्सक ही घर पर प्रैक्टिस कर रहे हैं।

– प्रायवेट प्रैक्टिस के नियम नेट पर जाकर देखे जा सकते हैं। हमारे पास कोई लिखित में शिकायत नहीं है।
– डॉ. वी.के. गुप्ता, सीएमएचओ, उज्जैन