कलेक्टर के आदेश को लेकर सियासी पारा गर्म

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Political warm up on collector's order

राजधानी से लेकर सतना तक उबाल

rajesh dwivedi
सतना। कलेक्टर नरेश पाल द्वारा जारी एक आदेश में भाजपा के पितृपुरूष माने जाने वाले पंडित दीनदयाल उपाध्याय की तस्वीर चस्पा करने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। कलेक्टर नरेश पाल के आदेश व एक कार्यक्रम में मंच पर भाजपा नेताओं के साथ उपस्थिति ने प्रदेश सरकार को रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया है। राज्य सरकार के मंत्री अब जिस प्रकार से कलेक्टर के बचाव में उतर आए हं उससे यह कयास लगाए जा रहे हैं कि सरकारी आदेश में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की तस्वीर आदेश में चस्पा करने के मामले में राज्य सरकार ने भले ही निर्देश न दिए हों लेकिन उनकी मूक सहमति थी।

Political warm up on collector's orderइस मामले में मंत्री लाल सिंह आर्य ने कलेक्टर के बचाव में बयान जारी कर विपक्षी दलों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों को हवा दे दी है। गत दिवस सरकारी लैटर में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की तसवीर चस्पा करने के मामले में लाल सिंह आर्य का कहना है कि मु यमंत्री ने प्रदेश में पंडित दीन दयाल जन्म शताब्दी वर्ष पर राजनीतिक, प्रशासकीय दृष्टि से राजकीय चिन्ह के साथ दीन दयाल उपाध्याय के मोनो के उपयोग करने को मंजूरी दी है। हालांकि इस दौरान विवाद से बचने उन्होने कहा कि राजकीय चिन्ह तो अनिवार्य है और यदि सतना कलेक्ट्रेट से अगर बिना राजकीय चिंन्ह के लेटर जारी हुआ है तो ये जांच का विषय है, जांच कराई जाएगी.। साथ ही लाल सिंह ने कलेक्टर नरेश पाल का बचाव करते हुए ये भी कहा कि हो सकता है कि कलेक्टर से भूलवश या कागज में गलती के चलते ये गफलत हुई होगी। लाल सिंह आर्य के इस बयान के बाद राज्य में सियासी पारा गरम हो गया है और सतना से लेकर भोपाल तक की राजनीति गर्म हो गई है।

कांग्रेस को मिला हथियार
कलेक्टर की कार्यप्रणाली ने मुद्दों की तलाश में रहने वाले विपक्षी दलों को एक हथियार थमा दिया है। पहले मु यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यक्रम में भाजपा नेताओं के साथ हाथ उठाकर समर्थन देने और बाद में जारी अपने एक आदेश में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की तस्वीर चस्पा करा कलेक्टर नरेश पाल अचानक विपक्षी दलों के लिए राजनैतिक हथियार बन गए हैं। नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल से लेकर स्थानीय कांग्रेसी तक सरकारी तंत्र के भगवाकरण के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं। यहां तक कि अब प्रदेश सरकार को इस मामले में सफाई देनी पड़ रही है।

क्या है मामला
मामला प्रशासन के भगवाकरण का है। पिछले दिनों कलेक्टर कार्यालय से 8 सित बर 2017 को जारी आदेश क्रमांक 762/3बी/स्था./2017 के जरिये सहायक ग्रेड-2 एवं सहायक ग्रेड-3 का स्थानांतरण किया गया है। इस आदेश में म.प्र. शासन के मोनों से छेड़छाड़ कर पं. दीनदयाल उपाध्याय की तस्वीर चस्पा कर दी गई। यह सब कैसे हुआ इसको लेकर तमाम चर्चायें हैं, मगर यह घटना कांग्रेस के आरोपों को सच्चाई के करीब ले जाती दिख रही है। इसके पूर्व भी एक आदेश को लेकर नरेश पाल विवादित हो चुके है। जिला कलेक्टर नरेश पाल द्वारा जारी आदेश में पं. दीनदयाल की तस्वीर लगे होने से पहले, मझगवां ब्लाक में अधिकारियों की पोस्टिंग को लिखे अद्र्धशासकीय पत्रसे भी विवाद उपजा था। उन दिनों म.प्र. के नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल ने कलेक्टर के पत्र को राजनीति से प्रेरित बताया था। ज्ञात हो कि यह पत्र कलेक्टर ने डीपीओ, पीओ सहित मझगां ब्लाक के अधिकारियों को हटाने के लिये लिखा था।

इनका कहना है
सरकारी अफसरों का भगवाकरण कर शिवराज सरकार प्रदेश का इतिहास बदलने पर आमदा है। सरकार का पार्टी के पितृपुरूषों को सरकारी दस्तावेजों में जगह देना प्रदेशवासियों के साथ धोखाहै जिसका कांग्रेस विरोध करेगी। प्रदेश सरकार ने अधिकारियों को पार्टी के काम में लगा रखा है जिससे प्रदेश का विकास बाधित है ।
अजय सिंह राहुल, नेता प्रतिपक्ष

निश्चित तौर पर सरकारी तंत्र का चुनावी इस्तेमाल गलत है। सरकारीअधिकारियों पर जनता नेताओं से अधिक भरोसा करती है, ऐसेमें अधिकारियों का इस्तेमाल चुनावों में करना गलत है। निश्चित तौर पर इस पर अंकुश होना चाहिए क्योंकि इससे लोकातांत्रिक प्रक्रिया अपवित्र होती है। प्रदेश में अराजकता का माहौल है। पाठ्यक्रमों में राजनीति परोसी जा रही है और अफसरों को भाजपा का गुलाम बनाया जा रहा है।सरकारी तंत्र का भगवाकरण लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक हैऔर संविधान का उल्लंघन है। सरकारी तंत्र का राजनैतिक दुरूपयोग रोकने जनता को भी साथ आना होगा।
राजाराम त्रिपाठी, पूर्व महापौर

भाजपा सरकार समूचे प्रशासनिक तंत्र को भगवा रंग में रंग देना चाहती है। शासकीय कार्यक्रमों का भी भगवाकरण किया गया और अब अफसरों को भगवा चोला पहनने के लिए बाध्य किया जा रहा है। चुनावी फायदे के लिए ऐसा करना ब्यूरोक्रेसी का दुरूपयोग भी है और अपमान भी। हम इस मामले में चुप नहीं रहेंगे।
रवींद्र सेठी, प्रदेश सचिव व सदस्य , पीसीसी

भाजपा जनविश्वास खो चुकी है, जिसके चलते वह अधिकारियों की मदद से चुनाव जीतने के लिए मजबूर है। अटेर व शहडोल में सरकार ने यही किया। सतना में भी ऐसा ही किया जा रहा है और अधिकारियों को चित्रकूट उपचुनाव में झोंककर जनता के वोट से नहीं अधिकारियों की ओट से चुनाव जीतने का मंसूबा बनाया जा रहा है।
अजीत पटेल, महामंत्री जिला कांग्रेस कमेटी