एक दर्जन से ज्यादा स्क्यिूरिटी एजेसियों को नोटिस

0
60

– नहीं दे रहीं टैक्स, नियमों की कर रहीं अनदेखी

-दो संस्थाएं एकसाथ जुटा रहीं जानकारियां

जबलपुर । टैक्स वसूली सुनिश्चित करने सख्त कदम बढ़ा रहे केंद्रीय उत्पाद एवं सेवा शुल्क विभाग ने शहर की सभी छोटी-बड़ी स्क्यिूरिटी एजेसियों को नोटिस जारी किये हैं। शहर में ऐसी स्क्यिूरिटी एजेंसियों की संख्या लगभग 14 बताई जा रही हैं, जो संभाग स्तर पर शैक्षणिक, मेडिकल, बैंकिंग और अन्य सेक्टर सहित मॉल एवं निजी एवं शासकीय संस्थानों में सुरक्षा सेवा उपलब्ध करवाती हैं। इनमें से अधिकांश एजेंसियां ऐसी है जिन्होंने सर्विस टैक्स विभाग में अपना पंजियन ही नहीं करवाया है और न ही इनके द्वारा पीएफ नियमों का पालन किया जा रहा है। इसके चलते अब दो विभागों ने एक साथ ऐसी सुरक्षा एजेंसियों की तरफ ध्यान देना शुरू किया है जो शासन और अपने कर्मचारियों दोनों को नुकसान पहुंचा रही हैं।

Notice to Over a Doubt of Skyrity Agenciesज्ञात हो कि पिछले कुछ वर्षो में निजी स्क्यिूरिटी एजेंसियों तेजी से अस्तित्व में आई है। इनमें से कुछ तो राष्ट्रीय स्तर की है जो विशेषतौर पर बैंकिंग सेक्टर में अपनी सेवाएं प्रदान कर रही हैं। जबकि जिला और संभागीय स्तर पर कार्य करने वाली एजेंसियों की भी कमी नहीं है जो दोनों शासकीय और निजी संस्थानों में अपनी सेवाएं प्रदान कर रही है। सुरक्षा एजेंसियों के बढ़ते दायरे को देखते हुए चेते सर्विस टैक्स विभाग ने इस बात की पतासाजी शुरू की ऐसी कितनी एजेंसियां है जो शासकीय नियमों का पालन कर रही है तो चैकानें वाली जानकारियां सामने आई हैं। बताया जाता है कि राष्ट्रीय स्तर पर कार्य कर रही एजेंसियों को छोड़ दिया जाये तो शहर में नजर आने वाले लोकल एजेंसियों के अधिकांश सुरक्षा गार्ड ऐसी कंपनियों में कार्यरत् है, जो सर्विस टैक्स की चोरी के अलावा पीएफ नियमों की भी अनदेखी कर रही है।

वसूली के बावजूद भुगतान से परहेज-
विभागीय सूत्रों की माने तो अधिकांश सुरक्षा एजेंसियां जो शासकीय और गैर शासकीय संस्थानों को सेवाएं प्रदान कर रही है वे संबंधित विभागों से सर्विस टैक्स की राशि तो वसूल रही हैं। लेकिन यह राशि सेवा शुल्क विभाग के खाते में जमा नहीं की जा रही है। खास बात यह है कि इन एजेंसियों द्वारा बराबर पक्का बिल दिया जा रहा है जिसमें पूरा ब्यौरा है, जो इस बात को दर्शा रहा है कि पूरा कारोबार टैक्स चोरी कर किया जा रहा है।

पीएफ नियमों की भी अनदेखी
दूसरी तरफ भविष्य निधि कार्यालय ने भी सुरक्षा एजेंसियों में कार्यरत् कर्मचारियों से इस बात की अपील की है कि यदि उनके संचालक उनका पीएफ खाता नहीं खुलवा रहे हैं या खोले गये खाते में राशि जमा नहीं कर रहे हैं तो इसकी शिकायत अविलंब करें। दरअसल ऐसी कोई एजेंसी नहीं है जिसमें 20 से कम सुरक्षा गार्ड हो। वहीं हो यह रहा है कि सुरक्षा एजेंसियां गिने चुने कर्मचारियों को ही अपने पास कार्यरत् होना दर्शा रही है, जबकि शेष से न्यूनतम वेतन पर काम करवाया जा रहा है। वहीं उन गार्ड जिनके पास खुद का गन लायसेंस है, सिर्फ उन्हें नियमानुसार वेतन और पीएफ के दायरे में रखा जा रहा है।