कालेधन के खिलाफ मोदी सरकार का अभियान, स्विट्जरलैंड से 10 लोगों का ब्योरा मांगा

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नई दिल्ली, विदेशों में जमा भारतीयों के कालेधन के खिलाफ अभियान को तेज करते हुए भारत ने स्विट्जरलैंड से कम से कम 10 लोगों और इकाइयों का बैंकिंग ब्योरा मांगा है। समझा जाता है कि इन लोगों ने अपना बेहिसाबी धन स्विट्जरलैंड के बैंकों में जमा किया है। इनमें दो सूचीबद्ध कपड़ा कंपनियां हैं जबकि अन्य आर्ट क्यूरेटर तथा उसके कालीन निर्यात कारोबार से जुड़ी हैं। स्विट्जरलैंड के कर विभाग ने इन लोगों को पिछले सप्ताह नोटिस जारी कर 30 दिन में जवाब देने को कहा है। ये इकाइयां 30 दिन में भारत के सूचना के आग्रह पर प्रशासनिक सहयोग प्रदान करने के फैसले के खिलाफ अपील कर सकती हैं।

अपने स्थानीय नियमों के तहत ऐसे मामलों में स्विट्जरलैंड सरकार दूसरे देश के साथ सूचना साझा करने से पहले संबंधित लोगों और इकाइयों को अपनी बात रखने का एक अंतिम अवसर देती। यदि ये नोट संबंधित बैंक या कर विभाग द्वारा सीधे नहीं पहुंचाए जा सकते हैं तो इन्हें गजट अधिसूचना के जरिये सार्वजनिक किया जाता है।
पिछले सप्ताह भारत से जुड़े लोगों और इकाइयों के संबंध में 10 नोटिस गजट में जारी किए। यह एक सप्ताह में किसी भी एक देश के मामले में सबसे ऊंचा आंकड़ा है। इन नोटिसों में दो कपड़ा कंपनियों नियो कॉरपोरेशन इंटरनेशनल और एसईएल मैन्युफैक्चरिंग कंपनी लि. का नाम शामिल है।

इसके अलावा कई अन्य कंपनियां ऐसी हैं जिनकी स्थापना कर पनाहगाह पनामा और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड में की गई हैं। इनमें से ज्यादातर कंपनियां और लोग कालीन निर्यात कारोबार और आर्ट क्यूरेटर से जुड़े हैं जिनका परिचालन कई देशों में फैला है। इनमें अब्दुल राशीद मीर, अमीर मीर, साबेहा मीर, मुजीब मीर और तबस्सुम मीर शामिल हैं। इन नोटिसों में जो अन्य कंपनियां हैं, उनमें कॉटेज इंडस्ट्रीज एक्सपोजिशन, मॉडेल एसए और प्रोग्रेस वेंचर्स ग्रुप शामिल हैं।

इनमें कुछ नाम लीक पनामा दस्तावेजों भी थे। लेकिन इन दो सूचीबद्ध कंपनियों के सहित अन्य ने किसी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है। इससे पहले स्विट्जरलैंड के संघीय कर प्रशासन (एफटीए) नोटिस जारी इनमें से कुछ इकाइयों से अपना प्रतिनिधि नियुक्त करने को कहा था जिससे भारत को उनके बारे में सूचना साझा करने से पहले उनका पक्ष सुना जा सके। स्थानीय कानून के अनुसार स्विट्जरलैंड संबंधित इकाई को उनकी सूचना साझा करने से पहले सूचना साझा करने को चुनौती देने का अधिकार देता है।