विधायक ऊषा को मंत्र आर्य ने किया गुमराह

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Minister Arya did wrong to MLA Usha

अमरपाटन ब्लाक में अधिकारी द्वारा बहू को बकरा अनुदान देने का मामला

Rajesh dwivedi

सतना। पर परागत बकरी पालकों को उन्नत किस्म के बकरा अनुदान में दिये जाने के मामले में हुई गफलतों पर न केवल विभाग पर्दा डालने की कोशिश कर रहा है बल्कि प्रदेश सरकार के मंत्री भी पुरजोर कोशिशें कर रहे हैं। यही कारण है कि विधानसभा में सामान्य प्रशासन मंत्री ने विधायक ऊषा के सवाल पर जवाब देते हुए उन्हें गुमराह किया। मंत्री द्वारा दिये गये जवाब में कहा गया है कि बकरा अनुदान पाने वाली महिला अमरपाटन के डॉक्टर की बहू नहीं है।

Minister Arya did wrong to MLA Ushaजबकि रिकार्ड बताते हैं कि जिस महिला को अनुदान के रूप में बकरा दिया गया है वह अमरपाटन में पदस्थ रहे पशु चिकित्सक की बहू है। बताते हैं कि अमरपाटन ब्लाक के पशु चिकित्सक डॉ. चन्द्रशेखर पटेल अमरपाटन के रहने वाले हैं और सत्र 14-15 में उनके द्वारा अपनी बहू रजनी पटेल पति आलोक पटेल को अनुदान दिया गया था। बताते हैं कि इस योजना में मु य रूप से ऐसे लोगों को लाभ दिया जाना था जो पर परागत रूप से बकरी पालक हों लेकिन डॉ. चन्द्रशेखर पटेल ने इन नियमों को ताक पर रखते हुए गैर बकरी पालको और परिवार के सदस्यों को बकरे का अनुदान देकर उन्हें उपकृत करने का प्रयास किया है। बताता हैं कि हितग्राही की सूची में रजनी पटेल को ग्यारहवें न बर पर रखकर योजना का लाभ दिया गया है। हालांकि मंत्री ने इस बात से पूर्णत: इनकार किया है।

लिपकीय त्रुटि का अधिकारियों ने उठाया फायदा

बकरा अनुदान घोटाले में अधिकारियों को लिपकीय त्रुटि  ने बचने का मौका दे दिया। सूत्र बताते हैं कि रैगांव विधायक ऊषा चौधरी के द्वारा लगाई गई विधानसभा में सत्र 2011-12 में नर बकरा अनुदान के नाम पर फर्जीवाड़ा करने का आरोप लगाया गया था जिसके कारण लिपकीय त्रुटि का फायदा उठाते हुए उपसंचालक पशु एवं विकासखण्ड अमरपाटन में पदस्थ पशु चिकित्सा अधिकारी ने इसे नकार दिया। बताते हैं कि यह घोटाला सत्र 14-15 में हुआ था जिसमें न केवल विकासखण्ड में पदस्थ पशु चिकित्सा अधिकारी की बहू को बकरे का अनुदान दिया गया था। बल्कि कई अमीरजादों को भी अनुदान के रूप में बकरा दिया गया था।

महलों के मालिक को भी बकरे का अनुदान

गौरतलब है कि अमरपाटन के पशु चिकित्सा अधिकारी के द्वारा सत्र 14-15 में नरबकरा अनुदान योजना के तहत करही निवासी रोहित सिंह पिता दीपनारायण सिंह, दीपनारायण सिंह पिता बृजनरेश सिंह और अविक्षित सिंह पिता राकेश सिंह को भी अनुदान का लाभ दिया गया है। बताते हैं कि इन तीनों के घर आलीशान महलनुमा बने हुए हैं जिनका बकरी पालन से कोई वास्ता ही नहीं है फिर भी इन्हें योजना का लाभ देकर शासकीय राशि का दुरूपयोग किया गया है। सूत्रों का दावा है कि अगर अधिकारी इस मामले की निष्पक्षता पूर्वक जांच कराएं तो अधिकारी की गर्दन नप सकती है।

अभी तक नहीं हुई जांच

नस्ल सुधार के नाम पर 16 लोगों को नियमों के विपरीत बकरा अनुदान देने के ग भीर मामले पर उपसंचालक पशु चिकित्सा इकाइ सतना भी ग भीर नहीं है। 13 नव बर को प्रकाशित की गई खबर के मामले में बातचीत करते हुए उन्होंने कहा था कि मामले की जांच कराकर दोषी के विरूद्ध वसूली की कार्रवाई होगी लेकिन समय बीतने के बाद भी और विधानसभा में मामला उठने के बावजूद किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की गई।