22 दिन की सर्चिंग के बाद घटियाखुर्द के जंगल में पकड़ा गया तेंदुआ

0
64
Leopard caught in Chhathyakhurde forest after 22 days of search
Leopard

वन विभाग की टीम को मिली सफलता

amjad khan
शाजापुर। कालीसिंध नदी के तट पर बसे गांवों में मवेशियों का शिकार कर ग्रामीणों को भयभीत करने वाले तेंदुए को आखिरकार वन विभाग की टीम ने मशक्कत के बाद पिंजरे में कैद कर ही लिया। तेंदुए के पकड़े जाने के साथ ही गांव के लोगों की दहशत भी खत्म हो गई है वहीं तेंदुए को देवास जिले के जंगल में सुरक्षित छोड़ा गया है। गौरतलब है कि कालीसिंध नदी के आसपास बसे ग्राम घटियाखुर्द, रूपापुरा सहित इलाकों में जंगली जानवर के द्वारा मवेशियों के शिकार किए जाने की शिकायत लगातार ग्रामीणों द्वारा वन विभाग को की जा रही थी।

Leopard caught in Chhathyakhurde forest after 22 days of search
Leopard

मामले को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग के एसडीओ राकेश लहरी के मार्गदर्शन में रेस्क्यू टीम ने नदी किनारे अपना डेरा जमाया और करीब 22 दिन की लगातार सर्चिंग के दौरान टीम को तेंदुए की मौजूदगी के पुख्ता सबूत मिले। जगह बदल-बदल कर लगाए गए ट्रैप कैमरे ने रात के समय तेंदुए की तस्वीर कैद करली। इसके बाद लहरी के मार्गदर्शन में डिप्टी रेंजर केएल भिलाला, अशोकसिंह बघेल, नवनीत चौहान, वनरक्षक कमलेश सोनी, सीताराम तिवारी, गौरव व्यास, शफीउद्दीन कुरैशी, ललित उपाध्याय, रेस्क्यू सहायक आनंद भावसार, अर्जुन मालवीय, मांगीलाल गवली, दुलेसिंह और रेस्क्यू एक्सपर्ट हरीश पटेल ने ग्राम घटियाखुर्द के नाहर खोरिया इलाके में पिंजरा लगाया। एसडीओ लहरी ने बताया कि तेंदुए को आकर्षित करने के लिए मंगलवार को बकरी का सहारा लिया गया और इसके लालच में तेंदुआ पिंजरे में जा घुसा जिसे सुरक्षित देवास जिले के खिवनी के जंगल में बुधवार को छोड़ा गया। रेस्क्यू अभियान बिना किसी हानि के सफलतापूर्वक सफल रहा।

सबसे पहले पहुंचे पटेल
रात के अंधेरे में जैसे ही पिंजरे के शटर बंद होने की आवाज आई तो सबसे सबसे पहले रेस्क्यू एक्सपर्ट हरीश पटेल पिंजरे के पास पहुंचे और पास जाकर देखने का प्रयास किया तो तेंदुआ जोर से दहाड़ उठा। इसके बाद पटेल ने पिंजरे के समीप जाकर उसका प्रथम फोटो लिया और फिर वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी। बुधवार सुबह करीब सुबह 5.45 बजे पिंजरा चेक किया गया। तेंदुए के पकड़े जाने की खबर लगते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण भी जंगल में जा पहुंचे जिनकी मदद से तेंदुए को पिंजरे सहित वैन में चढ़ाया गया और देवास ले जाकर उसे खिवनी के जंगल में सुरक्षित छोड़े जाने की कार्रवाई की गई।

22 दिन की सर्चिंग के बाद मिली सफलता
कालीसिंध नदी के किनारे लगातार तेंदुए की मौजूदगी के संकेत मिलने से आसपास के ग्रामीणों में दहशत का माहौल निर्मित हो गया था और ग्रामीणों ने शाम के समय खेतों पर भी जाना कम कर दिया था। इधर सूचना मिलने के बाद से लगातार वन विभाग की टीम जंगल में सर्चिंग करने में जुटी हुई थी, ऐसे में सोमवार के दिन वन विभाग की टीम को तेंदुए के पगमार्क मिले जिसके आधार पर सर्चिंग अभियान को बल मिला और घटियाखुर्द में पिंजरा लगा दिया गया। एसडीओ लहरी ने बताया कि मंगलवार रात 9 बजकर 22 मिनट पर तेंदुए को पकडऩे के लिए पिंजरे में बकरी बांधी गई। इस दौरान टीम ने करीब 50 मीटर दूरी पर तेंदुए की मौजूदगी मेहसूस की और टॉर्च से देखने पर झाडिय़ों में 2 आंखें चमकती दिखाई दी। इसके बाद टीम को यकीन हो गया कि उनकी मेहनत जल्द ही रंग लाने वाली है। 22 दिन की सर्चिंग के बाद रेस्क्यू टीम को आखिरकार सफलता मिली और उन्होने तेंदुए को पिंजरे में कैद कर लिया। श्री लहरी के अनुसार संभवत: रात एक बजे बाद ही तेंदुआ पिंजरे में आया होगा। लहरी ने बताया कि जिस स्थान से तेंदुए का रेस्क्यू किया गया है यह वही स्थान है जहां से 11 जनवरी 2016 में बाघ का रेस्क्यू किया गया था। फिलहाल पकड़े गए तेंदुए को देवास जिले के खिवनी में सुरक्षित छोड़ दिया गया है और गांव के लोगों ने भी राहत की सांस ली है।