कुषल तैराक हाथी केन नदी में कैसे डूबा!

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Kushal swimmer elephant drowning in the river!

हाथी विंध्या की रहस्यमयी मौत की षुरू हुई जांच

फोरेन्सिक जांच के लिए जबलपुर भेजा जायेगा बिसरा

shadik khan
पन्ना- मध्यप्रदेश के पन्ना टाईगर रिजर्व में हाथी विंध्या की केन नदी में डूबने से मौत होने की अप्रत्याशित घटना के सामने आने के बाद से हर कोई हैरान है। धरती के विशालकाय जीव हाथी कुदरती तौर पर कुशल तैराक माने जाते है, इसलिए हाथी के केन नदी में डूब कर मरने के बात पर वन्यजीव विशेषज्ञों तथा जनसामान्य के लिए भरोसा कर पाना मुश्किल हो रहा है। इससे विंध्या की मौत को लेकर संदेह लगातार गहरा रहा है।

Kushal swimmer elephant drowning in the river!दरअसल इसके पीछे जो कारण बताये जा रहे है उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। सर्वविदित है कि कटनी तथा पन्ना जिले में अल्पवर्षा के चलते केन नदी में पानी कम है और उसका प्रवाह भी नाममात्र का है। पीपरटोला के आसपास केन नदी इतनी गहरी भी नहीं है कि हाथी जैसे कुशल तैराक उसमें डूब जाये। पीपरटोला के हाथी कैम्प के पास शनिवार 9 सितम्बर की शाम केन नदी में जिस स्थान पर किशोरवय हाथी विंध्या मृत अवस्था में पाया गया वहां नदी के दोनांे किनारों की दूरी भी इतनी नहीं कि हाथी जैसे जीव के लिए उसे पार करना कठिन हो।

Kushal swimmer elephant drowning in the river!15 वर्षीय विंध्या की मौत इसलिए भी संदिग्ध प्रतीत हो रही है कि नदी में उतरने पर तलछट की चट्टान में यदि उसका पैर फंसता या फिर मगरमच्छ हमला बोलते तो निश्चित ही शरीर पर घाव साफ नजर आते। लेकिन केन नदी के पानी में मृत पड़े विंध्या को बाहर निकलवाकर पार्क प्रबंधन द्वारा जब उसके शरीर की गहन जांच कराई गई तो ऐसा कोई जख्म या खरोंच नहीं पाई गई। इसकी पुष्टि स्वंय पन्ना टाईगर रिजर्व के शीर्ष अधिकारी द्वारा की गई है। विंध्या की मौत की खबर आने पर कतिपय लोग यह भी अशंका जता रहे थे कि संभवतः उसकी मौत किसी जहरीले जीव-जन्तु के काटने से हुई है। पोस्टमाटर्म रिपोर्ट ने इस तरह के कयासों पर पूर्ण विराम लगा दिया है। शार्ट पोस्टमाटर्म रिपोर्ट के अनुसार हाथी विंध्या की मौत प्राथमिक तौर पर पानी में डूबने से हुई है। पार्क के अधिकारियों की मानें तो यदि जहरीले जीव-जन्तु हाथी को डंसते तो उसके शरीर में जहर का असर विभिन्न लक्षणों के रूप में दिखने लगता। लेकिन विंध्या के शरीर की बाहरी जांच-पड़ताल तथा पोस्टमाटर्म में जहर का कोई लक्षण नहीं पाया गया।

Kushal swimmer elephant drowning in the river!पानी में डूबने से पहली बार हुई मौत- विंध्या की मौत को लेकर आश्चर्य इसलिए भी है, क्योंकि किसी हाथी की नदी में डूबने से देश में संभवतः मौत की पहली घटना है। इसके पूर्व कहीं भी इस तरह हाथी की मौत होने का प्रमाणिक उल्लेख नहीं मिलता। वन्यप्राणी विशेषज्ञ राजेश दीक्षित का कहना है कि हाथी जन्मजात तैराक होते है। इसका प्रमाण यह है कि देश के पूर्वोत्तर राज्यों में हर साल भीषण बाढ़ की स्थिति में वहां के हाथी उफनती हुई नदी को पार कर सुरक्षित ठिकाने पर पहुंच जाते है। ऐसे में किसी हाथी का पानी में डूबकर मरना विरोधाभास पैदा करता है। केन नदी में हाथी किस हालत में मृत मिला उसका फोटो या वीडियो पार्क प्रबंधन की ओर से जारी नहीं किया गया। फलस्वरूप विंध्या की मौत को लेकर अभी भी संदेह बरकरार है। मृत हाथी का बिसरा आदि के नमूने फोरेन्सिक जांच हेतु वेटनरी यूनिवर्सिटी जबलपुर स्थित वाईल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट को भेजा जा रहा है। उम्मीद है कि उक्त जांच रिपोर्ट आने पर हाथी विंध्या की संदिग्ध मौत का सही कारण ज्ञात हो सकेगा। मालूम हो कि विन्ध्या हाथी का जन्म वर्ष 2002 में रूपकली से हुआ था।

गष्ती के बाद के बाद छोड़ा था चरने- पन्ना टाईगर रिजर्व प्रबंधन द्वारा हाथी की मौत के संबंध में प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार पीपरटोला कैम्प में तीन हाथियों का कैम्प रखा गया था। शनिवार 9 सितम्बर को तीनों हाथियों सेे प्रातः गश्ती कराई गई थी। गश्ती उपरान्त तीनों हाथियों को खाना खिला कर छोड़ दिया गया था। दोपहर करीब 3 बजे दो हाथियों को नदी के किनारे खड़े देखा गया तथा विंध्या हाथी के न दिखने पर हाथी महावत ने मौके पर पहुंच कर तलाश कीे तथा सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई। सूचना प्राप्त होते ही तत्काल सहायक संचालक परिक्षेत्र अधिकारी एवं अन्य स्टाॅफ मौके पर पहुंच कर विन्ध्या की सर्चिंग की गई। देर शाम विंध्या हाथी का शव केन नदी के पानी में तैरता हुआ दिखा। विन्ध्या हाथी के शव को बाहर निकाला गया तब तक रात्रि हो चुकी थी। मृत हाथी के शव को पोस्टमाटर्म उपरान्त पीपरटोला में दफनाया गया है।

जंजीर फंसने से हुई मौत- हाथी विंध्या की मौत की पार्क प्रबंधन द्वारा बताई जा रही हैरान करने वाली कहानी पर चैतरफा गंभीर सवाल उठ रहे है। वहीं इस तरह की खबरें आ रही है कि हाथी विंध्या के पैरों में पड़ी जंजीर के नदी में फंसने के कारण उसकी जल समाधि बनी है। अपुष्ट खबरों पर भरोसा करें तो हाथी विंध्या जंजीर के फंसने से नदी के अंदर बेबस और असहाय हो चुका था। काफी देर तक जीवन और मौत से संघर्ष करने के दौरान समय रहते विंध्या को जब कोई मद्द नहीं मिली तो तड़पते हुये उसकी दर्दनाक मौत हो गई। अगर इस बात में जरा भी सच्चाई है तो निश्चित ही यह पार्क प्रबंधन की बड़ी लापरवाही है। जंगल से बाहर आ रहीं खबरों की मानें तो पार्क प्रबंधन ने अपनी इस घोर लापरवाही को छिपाने के लिए हाथी की मौत की अचरज भरी कहानी गढ़ी है।

इनका कहना है- विंध्या की मौत केन नदी के पानी में डूबने से हुई है निःसंदेह सामान्य परिस्थितियों में हाथी डूबकर नहीं मरता है। लेकिन यह भी सही है कि अच्छे तैराक हमेशा डूबकर ही मरते है। जंजीर फंसने के कारण विंध्या की मौत की बात निराधार है क्योंकि जिन लोगों ने उसे सबसे पहले देखा उन्हें ऐसा कुछ भी नहीं मिला। उसके शरीर पर भी इस तरह के कोई निशान नहीं पाये गये। घटना की प्रारंभिक जांच सहायक संचालक प्रतिभा शुक्ला को सौंपी है। जांच रिपोर्ट तथा बिसरा रिपोर्ट आने पर हाथी की मौत के कारण का सही पता चल पायेगा।
-विवेक जैन, क्षेत्र संचालक पन्ना टाईगर रिजर्व