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किसान मित्रों का शोषण कर 5वीं बार कृषि कर्मण ले रही सरकार

4 साल से 500 रुपए महीने में किसानों को खेती के गुर सिखा रहे किसान मित्र

Government adopting farm workers for the fifth time by exploiting peasant friends

किसानों के ‘मित्रों’ से 16 रुपए की दिहाड़ी करा 5वीं बार कृषि कर्मण ले रही सरकार

भोपाल, केंद्र एवं राज्य सरकारों की खेती की योजनाओं का किसानों के बीच प्रचार-प्रसार करने वाले ‘किसान मित्र एवं किसान दीदी’ प्रदेश में 16.44 रुपए दिहाड़ी में काम कर रहे हैं। ये गांव-गांव जाकर किसानों को नई योजनाएं एवं तकनीक के बारे में समझाते हैं। प्रदेश में 25,934 कृषक मित्र एवं दीदी अप्रैल 2014 से प्रदेश के 54 हजार गांवों में काम कर रहे हंै। इस बीच सरकार ने खेती के क्षेत्र में तरक्की करने पर कई राष्टÑीय एवं अंतरराष्टÑीय पुरस्कार जीते हैं। खास बात यह है कि राज्य सरकार शनिवार को दिल्ली में लगातार पांचवी बार कृषि कर्मण अवार्ड लेने जा रही है। लेकिन कृषक मित्रों पर किसी का ध्यान नहीं है। भारत सरकार की आॅन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन (आत्मा) परियोजना के तहत खेती की तकनीक एवं योजनाओं से किसानों को अवगत कराने का काम किया जाता है। आत्मा परियोजना के तहत यह काम प्रदेश में 1 अप्रैल 2014 से कृषक मित्र एवं किसान दीदी के जरिए कराया जा रहा है।

Government adopting farm workers for the fifth time by exploiting peasant friendsमानदेय बढ़ाने को राजी नहीं हैं केंद्र सरकार
किसान मित्र संघ की ओर से लगातार यह मांग की जाती रही है कि उनका मानदेय बढ़ाया जाए। इस संबंध में किसान मित्र अनिल मिश्रा ने बताया कि संघ द्वारा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन को ज्ञापन भी सौंपा गया है। जिसमें मित्रों ने मांग की है कि उनका मानदेय 30 हजार रुपए महीना किया जाए और उन्हें नियमित किया जाए। सरकारी योजनाओं को किसानों तक पहुंचाने के लिए किसान मित्रों पर निर्भर हो चुकी राज्य सरकार ने केंद्र को मानदेय बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा था। जिसमें 6 हजार से बढ़ाकर 12 हजार सालाना करने की मांग की गई, जिसे केेंद्र सरकार ने मंजूर नहीं किया।

25,934 किसान मित्र एवं किसान दीदी
कृषि विभाग के अनुसार प्रदेश में ऐसे किसान मित्र एवं किसान दीदी 25,934 हैं, जो निरंतर गांवों में काम कर रहे हैं। हर मित्र को दो गांवों की जिम्मेदारी दी जाती है। इन्हें शासन की ओर से सिर्फ योजना एवं तकनीके बारे में सिर्फ प्रशिक्षण दिया जाता है। ये गांवों में जाकर किसानों को ख्ोती की योजना एवं तकनीक के बारे में समझाते हैं। इसके एवज में सरकार सिर्फ किसान मित्रों को साल में 6000 रुपए का भुगतान करती है। यानी 16.44 रुपए रोज का भुगतान होता है। खास बात यह है कि यह भुगतान भी समय पर नहीं मिलता है। आत्मा परियोजना का संचालन राज्य एवं केंद्र सरकार द्वारा किया जाता है। जिसमें किसान मित्रों के प्रशिक्षण, मानदेय एवं अन्य खर्चें दोनों सरकार बराबर वहन करती हंै।

खेती के मामले में मप्र आगे
मप्र खेती के मामले में देश में सबसे आगे हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान 17 मार्च का लगातार पांचवी बार कृषि कर्मण अवॉर्ड लेने जा रहे हैं। जिसमें किसान मित्रों की भी अहम भूमिका है। वे 4 साल से लगातार काम कर रहे हैं। लेकिन सरकार ने किसान मित्रों के मानदेय पर विचार नहीं किया है। कृषि विभाग के प्रमुख सचिव राजेश राजौरा ने पिछले साल 4 जून 2017 को भारत सरकार को पत्र भेजा था, जिसमें उन्होंने बताया कि कृषक मिश्रा खेती की योजनाओं में सक्रिय भागीदारी कर रहे हैं। आवागमन एवं अन्य सुविधाएं महंगी हो गर्इं है। ऐसे में उन्हें भत्ते बढ़ाने पर विचार किया जाए।

राज्य सरकार ने कृषक मित्रों का मानदेय बढ़ाने वाला प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया है। जिस पर अभी केंद्र ने फैसला नहीं किया है। केंद्र से मंजूरी मिलने के बाद कृषक मित्रों को बढ़ा हुआ मानदेय मिलने लगेगा।
राजेश राजौरा, प्रमुख सचिव, कृषि विभाग मप्र

ajay dwivedi
the authorajay dwivedi